लोकसभा चुनाव के नतीजे से पहले बीजेपी की पहली जीत, सूरत में वॉकओवर; ऐसा क्यों हुआ?

मौजूदा लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना खाता खोल लिया है। गुजरात के सूरत निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी के उम्मीदवार मुकेश दलाल ने चुनाव जीत लिया है क्योंकि उनके सभी प्रतिद्वंद्वी अब मैदान से बाहर हो गए हैं। दलाल को बधाई देते हुए गुजरात बीजेपी प्रमुख सीआर पाटिल ने कहा, ‘सूरत लोकसभा सीट से उम्मीदवार मुकेश दलाल को निर्विरोध चुने जाने पर बधाई और शुभकामनाएं।’

जहां कांग्रेस उम्मीदवार का फॉर्म रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया, वहीं इस सीट के अन्य आठ उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस ले लिया।

सूरत लोकसभा सीट से कांग्रेस उम्मीदवार नीलेश कुंभानी अपने तीन प्रस्तावकों में से एक को भी चुनाव अधिकारी के सामने पेश नहीं कर पाए, जिसके बाद उनका नामांकन फॉर्म रद्द कर दिया गया।

कुंभानी के नामांकन फॉर्म में तीन प्रस्तावकों के हस्ताक्षर में गड़बड़ी को लेकर बीजेपी ने सवाल उठाए थे। सूरत से कांग्रेस के स्थानापन्न उम्मीदवार सुरेश पडसाला का नामांकन फॉर्म भी अमान्य कर दिया गया, जिससे पार्टी शहर में चुनाव मैदान से बाहर हो गई।

रिटर्निंग ऑफिसर सौरभ पारधी ने अपने आदेश में कहा कि कुंभानी और पडसाला द्वारा जमा किए गए चार नामांकन फॉर्म खारिज कर दिए गए क्योंकि पहली नजर में प्रस्तावकों के हस्ताक्षरों में विसंगतियां पाई गईं और वे वास्तविक नहीं लगे।

पारधी के आदेश में कहा गया है कि, प्रस्तावकों ने अपने हलफनामे में कहा कि उन्होंने स्वयं फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। संयोग से, कुंभानी के तीन प्रस्तावक उनके रिश्तेदार थे।

प्रस्तावकों के दावे के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने नीलेश कुंभानी को अपना जवाब दाखिल करने के लिए एक दिन का समय दिया था। कांग्रेस प्रत्याशी अपने अधिवक्ता के साथ चुनाव अधिकारी के पास आये, लेकिन उनके तीन प्रस्तावकों में से कोई नहीं आया।

आदेश में कहा गया है कि कांग्रेस उम्मीदवार के वकील के अनुरोध पर जांचे गए वीडियो फुटेज में भी हस्ताक्षरकर्ताओं की उपस्थिति नहीं पाई गई। इस बीच, कांग्रेस ने सत्तारूढ़ भाजपा पर बेईमानी का आरोप लगाया और दावा किया कि हर कोई सरकार की धमकी से डरा हुआ है।

कांग्रेस नेता और वकील बाबू मंगुकिया ने कहा कि कुंभानी के तीन प्रस्तावकों का अपहरण कर लिया गया है। उन्होंने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर को इसकी जांच करनी चाहिए न कि फॉर्म पर हस्ताक्षर किए गए हैं या नहीं।

मंगुकिया ने कहा कि बिना टेली-चेक किए हस्ताक्षर और प्रस्तावक के हस्ताक्षर सही हैं या गलत, इसकी जांच किए बिना फॉर्म रद्द करना गलत है।

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा, ”पीएम मोदी के अन्याय काल में एमएसएमई मालिकों और व्यापारियों की समस्याओं और गुस्से को देखकर बीजेपी इतनी डर गई है कि वह सूरत लोकसभा का ‘मैच फिक्स’ करने की कोशिश कर रही है। वे 1984 के लोकसभा चुनाव के बाद से लगातार इस सीट से जीत रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “हमारा चुनाव, हमारा लोकतंत्र, बाबासाहेब अंबेडकर का संविधान – सब कुछ गंभीर खतरे में है। मैं दोहराता हूं – यह हमारे जीवनकाल का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव है।”

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