अमित शाह ने गांधीनगर से नामांकन दाखिल किया: ‘यहां से बूथ कार्यकर्ता से सांसद तक बने’

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को गांधीनगर से अपना नामांकन दाखिल करते समय गुजरात में बूथ कार्यकर्ता से संसद सदस्य बनने तक की अपनी यात्रा को याद किया। अमित शाह ने कहा कि यह गर्व की बात है कि इस सीट का प्रतिनिधित्व लालकृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी वाजपेयी जैसे भाजपा के दिग्गजों ने किया। अनुभवी भाजपा नेता ने 30 वर्षों तक विधायक और फिर सांसद के रूप में गांधीनगर का प्रतिनिधित्व किया है।

शाह के साथ गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल भी थे, जब उन्होंने ठीक 12:39 बजे, जिसे ‘विजय मुहूर्त’ माना जाता है, राज्य की राजधानी में गांधीनगर कलेक्टर और जिला चुनाव अधिकारी को नामांकन पत्र जमा किया।

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अपना नामांकन दाखिल करने के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पिछले पांच वर्षों में गांधीनगर में 22,000 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई।

उन्होनें कहा, “यह मेरे लिए गर्व की बात है कि इस सीट का प्रतिनिधित्व लालकृष्ण आडवाणी, अटल जी ने किया और वह सीट जहां से नरेंद्र मोदी खुद मतदाता हैं। मैं इस सीट से 30 साल तक विधायक और सांसद रहा हूं। इस क्षेत्र के लोग उन्होंने मुझे बहुत प्यार दिया है।”

बूथ कार्यकर्ता से लेकर गृह मंत्री तक का सफर –

गुजरात के मानसा के एक गांव में पले-बढ़े अमित शाह को भाजपा को चुनाव जीतने वाली मशीन में बदलने का श्रेय दिया जाता है। बहुत कम उम्र से ही अमित शाह आरएसएस से प्रेरित थे। शाह ने 1980 से आरएसएस की शाखाओं में जाना शुरू कर दिया था, जब वह 16 साल के थे। वह 1983 में आरएसएस की छात्र शाखा, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में शामिल हुए।

एबीवीपी में शामिल होने से पहले, शाह ने नारनपुरा क्षेत्र में बूथ स्तर के कार्यकर्ता के रूप में काम किया और दीवारों पर भाजपा के पोस्टर चिपकाए।

शाह 1984-85 में भाजपा में शामिल हुए। एक संगठनकर्ता के रूप में उनकी कुशाग्र राजनीतिक बुद्धि और कौशल को नोट किया गया और जल्द ही उन्हें भारतीय जनता युवा मोर्चा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

अमित शाह के राजनीतिक करियर में बड़ा ब्रेक 1991 में आया।

उस वर्ष शाह को गांधीनगर लोकसभा क्षेत्र में लालकृष्ण आडवाणी का चुनाव अभियान प्रबंधक नियुक्त किया गया था। आडवाणी ने आसानी से सीट जीत ली और शाह के चुनाव प्रबंधन से प्रभावित हुए।

उसके बाद से उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो शाह भी उनके भरोसेमंद सिपहसालार बन गये।

2014 में शाह को भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया और पांच साल बाद, उन्हें गृह मंत्री के रूप में पदोन्नत किया गया।

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