उत्तर प्रदेश के मुज़फ़्फ़रनगर में एक स्कूल शिक्षक ने छात्रों से कक्षा के अंदर एक मुस्लिम बच्चे को थप्पड़ मारने को कहा। खब्बरपुर गांव में हुई इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। मुजफ्फरनगर पुलिस ने में आधिकारिक तौर पर एफआईआर दर्ज कर ली है। पीड़ित छात्र के पिता की शिकायत पर मंसूरपुर थाने में केस दर्ज हुआ है। पुलिस ने धारा 323, 504 के तहत एक्शन लिया है।
https://twitter.com/MujtabaAasif/status/1695040332273176741?s=20
वायरल वीडियो में, छात्र बारी-बारी से अपने साथी छात्र को थप्पड़ मारते हैं क्योंकि शिक्षक उन्हें “उसे और जोर से मारने” के लिए प्रोत्साहित करती हैं। एक उदाहरण में, उसने एक छात्र से “उसकी कमर पर मारने” के लिए भी कहा, जबकि वह पहले ही मुस्लिम छात्र को थप्पड़ मार चुका था।
पीड़ित छात्र के पिता ने कहा, “”मेरा बेटा सात साल का है। यह घटना 24 अगस्त की है। टीचर ने छात्रों से मेरे बच्चे को बार-बार पिटवाया। मेरे भतीजे ने वीडियो बनाया और वह किसी काम से स्कूल गया था। मेरा सात साल का बच्चा एक-दो घंटे तक प्रताड़ित किया गया। वह डरा हुआ है। यह हिंदू-मुस्लिम मामला नहीं है। हम चाहते हैं कि कानून अपना काम करे।”
मुजफ्फरनगर के डीएम अरविंद मल्लप्पा ने कहा, “वीडियो कल शाम से प्रसारित हो रहा है और जांच की गई। जांच करने पर पता चला कि वीडियो लड़के के चाचा द्वारा फिल्माया गया था। आज सुबह उनकी शिकायत दर्ज की गई। बाल कल्याण समिति बच्चों को परामर्श दे रही है। चूंकि शिकायत दर्ज कर ली गई है इसलिए कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं वायरल वीडियो में आरोपी शिक्षक का दावा है कि वायरल करने से पहले वीडियो के साथ छेड़छाड़ की गई थी। उन्होंने कहा, “मैंने एक छात्र को उसके सहपाठियों से पिटवाकर गलती की।”
विपक्ष ने इस कृत्य की निंदा की है और पूरे देश में नफरत और भेदभाव फैलाने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को दोषी ठहराया है।
इस घटना को लेकर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट कर कहा, “मुज़फ़्फ़रनगर के एक वायरल वीडियो में एक टीचर एक अल्पसंख्यक बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवा रही है। इसमें वो दोहरे अपराध की दोषी हैं क्योंकि वो पिटवा भी रही है और दूसरे बच्चों को हिंसक भी बना रही है। भाजपा सरकार ये वीडियो G20 की मीटिंग में दिखाकर साबित करे कि उसका नफ़रती एजेंडा किस प्रकार तरह से सही है। ऐसी टीचर शिक्षक समाज पर धब्बा है, पूरे देश के शिक्षकों को उस टीचर को दंडित करने के लिए आवाज़ उठानी चाहिए।”
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा, “मासूम बच्चों के मन में भेदभाव का ज़हर घोलना, स्कूल जैसे पवित्र स्थान को नफ़रत का बाज़ार बनाना – एक शिक्षक देश के लिए इससे बुरा कुछ नहीं कर सकता। ये भाजपा का फैलाया वही केरोसिन है जिसने भारत के कोने-कोने में आग लगा रखी है। बच्चे भारत का भविष्य हैं – उनको नफ़रत नहीं, हम सबको मिल कर मोहब्बत सिखानी है।”
वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने ट्वीट कर लिखा- ‘हम अपनी आने वाली पीढ़ियों को कैसा क्लासरूम, कैसा समाज देना चाहते हैं? जहां चांद पर जाने की तकनीक की बातें हों या नफरत की चहारदीवारी खड़ी करने वाली बातें. विकल्प एकदम स्पष्ट है। नफरत तरक्की की सबसे बड़ी दुश्मन है। हमें एकजुट होकर इस नफरत के खिलाफ बोलना होगा- अपने देश के लिए, तरक्की के लिए, आने वाली पीढ़ियों के लिए।
कुमार विश्वास ने ट्विटर पर लिखा- ‘हद है बदतमीजी की। ये महिला तो शिक्षिका के नाम पर कलंक है। एक मासूम बचपन के मन में जो अनकही पीड़ा इस महिला ने रौंपी है, वह इसके स्त्री-मन पर भी संदेह पैदा करती है। लानत है ऐसी शिक्षिका पर, जो नौनिहालों के मन में सांप्रदायिक सोच का बीजारोपण करती हो। पुलिस को इसे कड़ी से कड़ी सजा दिलाना सुनिश्चित करना चाहिए।
https://twitter.com/DrKumarVishwas/status/1695109223036932528?s=20
इस घटना को लेकर एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया और कहा, “मुजफ्फरनगर का वीडियो जहां एक शिक्षक अपने छात्रों से एक मुस्लिम लड़के को थप्पड़ मारने के लिए कह रहा है, वह पिछले 9 वर्षों का उत्पाद है। छोटे बच्चों के दिमाग में यह संदेश डाला जा रहा है कि कोई भी किसी मुस्लिम को बिना किसी परिणाम के पीट सकता है और अपमानित कर सकता है। बच्चे के पिता ने अपने बच्चे को स्कूल से निकाल लिया है और लिखित में दिया है कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहते क्योंकि उन्हें पता है कि उन्हें न्याय नहीं मिलेगा और इसके बजाय इससे “माहौल” खराब हो सकता है। ये कौन लोग हैं जो अपने बच्चे के लिए न्याय मांग रहे एक पिता पर माहौल को “खराब” करेंगे? यह एक अभियोग है। योगी आदित्यनाथ जी, नियम यह है कि लोगों को उचित प्रक्रिया पर भरोसा नहीं है। इस बात की अधिक संभावना है कि शिक्षक को दंडित होने के बजाय कोई सरकारी पुरस्कार मिलेगा। किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 75 स्पष्ट है। मुजफ्फरनगर पुलिस को कार्रवाई क्यों करनी पड़ी? एनसीपीसीआर और एनएचआरसी वैसे तो तुरंत स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई करते हैं लेकिन यहां उन्होंने कुछ नहीं किया है। कथित तौर पर, एनसीपीसीआर न्याय सुनिश्चित करने के बजाय वीडियो के वायरल होने को लेकर अधिक चिंतित है। योगी आदित्यनाथ जी , बुलडोज़र और “ठोक दो” का क्या हुआ?”
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने ट्वीट कर कहा, “यूपी के एक स्कूल में जिस तरह एक अध्यापिका ने धार्मिक भेदभाव कर एक बच्चे को दूसरे बच्चों से पिटवाया है, वो BJP-RSS की नफ़रत भरी राजनीति का विचलित कर देने वाला परिणाम है। ऐसी घटनाएँ हमारी वैश्विक छवि पर कालिख पोत देती हैं। ये संविधान के ख़िलाफ़ है। समाज में सत्ताधारी पार्टी की विभाजनकारी सोच का ज़हर इतना घुल गया है कि एक तरफ़ एक शिक्षा देने वाली अध्यापिका, तृप्ता त्यागी बचपन से ही मज़हबी विद्वेष का पाठ पढ़ा रही है तो दूसरी तरफ़ सुरक्षा देने वाला RPF जवान, चेतन कुमार धर्म के नाम पर निर्दोषों की जान लेने पर उतारू हो जाता है। किसी भी प्रकार की धार्मिक कट्टरता व हिंसा, देश के ख़िलाफ़ है। दोषियों को बख़्शना, देश के ख़िलाफ़ अपराध है। इसकी जितनी निंदा की जाएँ कम है। इस मामले में तत्काल कठोर कार्रवाई हो और सज़ा मिलनी चाहिए, ताकि कोई और ऐसा ज़हर घोलने के पहले सौ बार सोचे।”
घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए तृणमूल कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुष्मिता देव ने कहा, ‘नफरत बीजेपी के डीएनए में है।’ उन्होंने कहा, “हम उस छात्र के साथ दुर्व्यवहार की निंदा करते हैं, जिसे मुजफ्फरनगर में उसकी धार्मिक पहचान के कारण निशाना बनाया गया और पीटा गया। ऐसे समय में जब स्कूलों में शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और विविधता में एकता की शिक्षा दी जानी चाहिए, भाजपा शासित यूपी बच्चों और युवाओं के बीच सांप्रदायिकता का जहर घोलने का प्रयास कर रहा है।”
राष्ट्रीय लोक दल के सांसद जयंत सिंह ने एक्स पर लिखा, “मुजफ्फरनगर स्कूल का वीडियो एक दर्दनाक चेतावनी है कि कैसे गहरे धार्मिक विभाजन हाशिये पर पड़े अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा को भड़का सकते हैं। मुज़फ़्फ़रनगर के हमारे विधायक यह सुनिश्चित करेंगे कि यूपी पुलिस स्वत: मामला दर्ज करे और बच्चे की शिक्षा बाधित न हो!”
इस बीच बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी शुभम शुक्ला ने बताया कि शिक्षक और स्कूल प्रबंधन की जांच के लिए एक टीम गठित की गई है। आरोपी टीचर की पहचान तृप्ति त्यागी के रूप में हुई है। घटना मंसूरपुर थाना क्षेत्र के खुब्बापुर गांव की है।
