सुप्रीम कोर्ट ने जैसे ही मंगलवार को ईडी चीफ संजय कुमार मिश्रा को दिए गए तीसरे एक्सटेंशन को अवैध घोषित किया, विपक्ष पार्टियों के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया और शीर्ष अदालत के इस फैसले को सरकार के चेहरे पर तमाचा बताया। लेकिन अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इनके ऊपर पलटवार करते हुए कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मनाने वाले विभिन्न कारणों से भ्रमित हैं। शाह ने कहा कि ईडी निदेशक कौन है, यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि जो कोई भी इस भूमिका को ग्रहण करेगा वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले हकदार वंशवादियों के एक आरामदायक क्लब के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर जरूर ध्यान देगा।
उन्होंने यह बात सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख संजय कुमार मिश्रा को दिए गए तीसरे विस्तार को अवैध ठहराए जाने और उनके विस्तारित कार्यकाल को 31 जुलाई तक कम करने के कुछ घंटों बाद कही।
गृह मंत्री ने कहा कि ईडी मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी मनाने वाले लोग विभिन्न कारणों से भ्रमित हैं। सीवीसी अधिनियम में संशोधन, जो संसद द्वारा विधिवत पारित किया गया था, उसे बरकरार रखा गया है। भ्रष्ट और कानून के गलत पक्ष पर काम करने वालों पर कार्रवाई करने की ईडी की शक्तियां वही रहेंगी। शाह ने कहा कि ईडी एक ऐसी संस्था है जो किसी एक व्यक्ति से ऊपर है और अपने मुख्य उद्देश्य को प्राप्त करने पर केंद्रित है यानी मनी लॉन्ड्रिंग के अपराधों और विदेशी मुद्रा कानूनों के उल्लंघन की जांच करना।
उन्होंने कहा, “इस प्रकार, ईडी निदेशक कौन है – यह महत्वपूर्ण नहीं है क्योंकि जो कोई भी इस भूमिका को ग्रहण करेगा वह विकास विरोधी मानसिकता रखने वाले हकदार वंशवादियों के एक आरामदायक क्लब के बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार पर ध्यान देगा।”
इससे पहले वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पार्टी महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा था कि ये फैसला सरकार के चहरे पर जोरदार तमाचा है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से विस्तार देने के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लग गया है। ये केंद्र सरकार की बड़ी विफलता है।
