2001 के संसद हमले के 22 साल बाद, उस दिन पर एक नजर

बुधवार, 13 दिसंबर को पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादी समूहों द्वारा 2001 में संसद पर किए गए हमले के 22 साल पूरे हो गए हैं। हमले में मारे गए नौ सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी और अन्य नेताओं ने संसद में एक मिनट का मौन रखा।

https://x.com/airnewsalerts/status/1734784565749878818?s=20

13 दिसंबर 2001 की सुबह लगभग 11:40 बजे विंडशील्ड पर जाली गृह मंत्रालय के स्टिकर लगी कार में पांच आतंकवादियों को संसद भवन परिसर में प्रवेश करते देखा गया। संदेह होने पर कार को वापस मोड़ने के लिए मजबूर किया गया, जिसके बाद आतंकवादी नीचे उतरे और गोलीबारी शुरू कर दी। इससे अलार्म बज गया और सभी बिल्डिंग के गेट बंद कर दिए गए। उस समय संसद के अंदर 100 से अधिक मंत्री और/या सांसद मौजूद थे।

गोलीबारी 30 मिनट से अधिक समय तक चली, जिसमें पांच आतंकवादी, आठ सुरक्षाकर्मी और एक माली मारे गए और 15 घायल हो गए।

तत्कालीन गृह मंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि हमले को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठनों – लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद ने संयुक्त रूप से अंजाम दिया था। जांच के अनुसार, उन्होंने कहा कि “आत्मघाती दस्ते का गठन करने वाले सभी पांच आतंकवादी पाकिस्तानी नागरिक थे… उनके भारतीय सहयोगियों को पकड़ लिया गया है और गिरफ्तार कर लिया गया है।”

आडवाणी ने इस हमले को “भारत में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के लगभग दो दशक लंबे इतिहास में सबसे दुस्साहसिक और आतंकवाद का सबसे खतरनाक कृत्य” बताया था।

हमले के ही दिन पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर के बाद, दिल्ली पुलिस ने 1994 में आत्मसमर्पण करने वाले जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के पूर्व आतंकवादी मोहम्मद अफजल गुरु, उनके चचेरे भाई शौकत हुसैन गुरु, शौकत की पत्नी अफसान गुरु और दिल्ली विश्वविद्यालय में अरबी के व्याख्याताएसएआर गिलानी को गिरफ्तार कर लिया।

गुरु, गिलानी और शौकत को मौत की सजा सुनाई गई और अफसान को 29 दिसंबर 2001 को ट्रायल कोर्ट ने बरी कर दिया। गिलानी को 2003 में बरी कर दिया गया, जबकि शौकत को 2005 में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। सितंबर 2006 में अदालत ने आदेश दिया कि अफजल गुरू को फाँसी दी जाए।

तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने 3 फरवरी 2013 को गुरु की पत्नी द्वारा दायर दया याचिका खारिज कर दी और छह दिन बाद उसे फांसी दे दी गई। उसके अवशेषों को तिहाड़ जेल में दफनाया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *