कूनो नेशनल पार्क में एक और चीता सूरज की मौत, पांच महीने में 8वीं घटना

दक्षिण अफ्रीका से लाए गए सातवें चीते की मौत के कुछ ही दिनों बाद नामीबिया से लाए गए चीता सूरज की मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मौत हो गई। वह पिछले पांच महीनों में मरने वाला आठवां चीता है। सूरज की मौत का कारण अभी तक पता नहीं चल सका है। सूरज की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में 15 चीते और एक शावक बचे हैं। इससे पहले मंगलवार को कथित तौर पर चोट लगने के बाद चीता तेजस की मौत हो गई थी।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने कहा कि कूनो में सूरज नामक एक और नर चीता की मौत हो गई है, जिससे कुल संख्या 8 हो गई है। मौत का कारण पोस्टमॉर्टम के बाद पता चलेगा। ऐसे प्रोजेक्ट में अक्सर मौतें होती रहती हैं। अगर ये मौतें स्वाभाविक रूप से हो रही हैं तो हमें घबराना नहीं चाहिए। हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहे हैं कि आगे कोई मौत न हो। सभी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।

केंद्रीय वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने कहा, ”हम अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों सहित विशेषज्ञों के संपर्क में हैं। हमारी टीम वहां का दौरा करेगी। उन्हें स्थानांतरित नहीं किया जाएगा और वे कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ही रहेंगे। मुझे उम्मीद है कि परियोजना सफल होगी।”

मध्य प्रदेश के वन मंत्री डॉ. कुँवर विजय शाह ने कहा, “मैंने अधिकारियों से भी बात की है और यह जानवरों में एक प्राकृतिक घटना है। विदेशी विशेषज्ञों सहित विशेषज्ञों की एक टीम प्रत्येक चीता की निगरानी कर रही है।”

कांग्रेस नेता शोभा ओझा ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, ”जब मध्य प्रदेश में महिलाएं और आदिवासी सुरक्षित नहीं हैं, तो कोई कैसे उम्मीद कर सकता है कि चीते वहां सुरक्षित रहेंगे?”

पहली चीता की मौत की सूचना 27 मार्च को दी गई थी – मादा चीता साशा की किडनी की बीमारी से मृत्यु हो गई थी। अप्रैल में दक्षिण अफ़्रीका के नर चीतों में से एक ‘उदय’ की हृदय संबंधी समस्याओं से मृत्यु हो गई थी। इससे पहले मई में दक्षिण अफ्रीका की एक मादा चीता ‘दक्षा’ दो नर के साथ लड़ाई के बाद मारी गई थी। मार्च में सियाया (ज्वाला) के चार शावक पैदा हुए। हालांकि, कुछ महीने बाद मई में कूनो में चीता सियाया के दो महीने के शावक की मौत हो गई। प्रथम दृष्टया शावक की मौत कमजोरी से हुई है। पहले शावक की मौत के कुछ दिन बाद उसी महीने सियाया के दो और चीता शावकों की मौत हो गई।

मालूम हो कि पिछले साल 17 सितंबर को नामीबिया से आठ चीते भारत लाए गए और कूनो में छोड़े गए। फरवरी में, दक्षिण अफ्रीका से 12 और चीते लाए गए, जिनमें से छह जंगल में हैं और बाकी कूनो के विभिन्न बाड़ों में हैं। इस तरह कूनो में कुल 20 चीते हो गए थे। जबकि एक मादा चीता ने चार शावकों को जन्म दिया था। आठ की मौत हो जाने पर अब 16 चीते ही कूनो नेशनल पार्क में बचे है।

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