सुप्रीम कोर्ट में मोदी सरकार ने कहा कोरोना से मृत परिवारों को मुआवजा देना संभव नहीं, वित्तिय बोझ से दबी है सरकार, दूसरी तरफ सेंट्रल विस्टा जैसे खर्चीले प्रोजेक्ट जारी है।

दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कोरोना पीड़ितों को मुआवजा देने संबंधित दायर एक हलफनामे में सरकार ने जो जबाव दिया है वो बेहद आश्चर्यजनक हैं, सरकार ने कहा है कि केंद्र और राज्यों की वित्तिय हालात ठीक नहीं इसलिए कोरोना के कारण हुई मौतों के बदले पीड़ितों के परिवार को मुआवजा नहीं दिया जा सकता हैं।

ये जबाव केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में गृह मंत्रालय के माध्यम से दायर किया है। साथ ही इस हलफनामे में ये भी कहा गया है कि कोरोना के कारण सरकार की आमदनी और राजस्व में काफी कमी हुई है। स्वास्थ्य सुविधाओं पर हुये खर्चो ने केंद्र और राज्य सरकारों पर काफी बोझ बढ़ा दिया है। इसलिए मृतकों को मुआवजा नहीं दिया जा सकता।

 

गृहमंत्रालय ने कहा “यह दुःखद लेकिन जरूरी कोर्ट को बताना जरूरी हैं” सरकार के संसाधनों की सीमाएं हैं और मुआवजे की राशि बांटने से केंद्र सरकार पर बोझ से अतिरिक्त दबाव पड़ेगा जिसका असर अन्य स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजना को चलाने में असर पड़ेगा। सरकार कोरोना महामारी के वजह से उत्पन्न हालात का सामना कर रही जिसके कारण वित्तीय मद को लेकर अतिरिक्त दबाव में है। केंद्र सरकार के पास फण्ड की कमी हो जाएंगी अगर कोरोना पीड़ितों को मुआवजे की राशि बांटी जाने लगीं तो। और जीवन भर बीमारी से प्रभावित होने की।दशा में कोई नियम नहीं है पैसे देने का।

 

गृह मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर हलफनामे में ये जबाव इसलिए दाखिल इसलिए किया गया है, क्योंकि कोर्ट ने जबाव तलब किया था, महामारी में मृतकों को पूर्व में 4 लाख या राज्यों के हिसाब से आपदा प्रबंधन कोटे से पैसे दिये जाते हैं, और पिछली वेब में सरकार ने भी सहायता राशि देने का ऐलान किया था पीड़ित परिवारों को। जिससे अब सरकार पल्ला झाड़ रही हैं।

 

आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत राज्य आपदा कोष में ये व्यवस्था है कि किसी भी आपदा में पीड़ित हुये व्यक्ति के परिवार को राहत कोष से अधिनियम 12 अधिसूचित आपदाओं में वित्तिय सहायता दी जाती है। लेकिन MHA ने कहा है कि अगर हर व्यक्ति को पैसे दिये जायेंगे तो SDRF की पूरी राशि खर्च हो जायेगी।

MHA ने तर्क ये दिया कि इन मुआवजे की राशि को राष्ट्रीय स्तर पर निपटाना चाहिए। राज्यों के मामलें में इसे लागू करना ठीक नहीं। गृहमंत्रालय ने साथ ही ये स्वीकार किया है कि पीड़ितों को सहायता की जरूरत है। लेकिन लंबे समय के लिए पैसा देने का कोई नियम नहीं है।

 

केंद्र सरकार ने 11 जून को सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि केंद्र दो याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है, जिसमें रुपये की अनुग्रह राशि की मांग की गई है। COVID-19 महामारी से मरने वाले मृतकों के परिवारों को 4 लाख या अधिसूचित अनुग्रह राशि का मुआवजा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने पहले केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि वह भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के दिशा-निर्देशों सहित COVID-19 रोगियों को जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित कोई भी नीति या दिशानिर्देश रिकॉर्ड में लाए।

 

कोर्ट के सामने आपदा प्रबंधन अधिनियम की धारा 12 (3) के तहत निर्धारित सभी योजनाओं को अदालत के सामने रखने के लिए निर्देश दिए गए थे, जो उन लोगों के परिवारों को अनुग्रह मुआवजे के पहलू पर थे, जिन्होंने COVID ​​​​-19 में दम तोड़ दिया था।

केंद्र ने COVID के कारण मरने वाले मृतक के परिवार के सदस्यों को 4 लाख रुपये की अनुग्रह राशि और मुआवजे की मांग वाली याचिकाओं का जवाब देने के बाद SC के समक्ष हलफनामा दायर किया। केंद्र ने हलफनामा दायर किया है कि वित्तीय बाधाओं और अन्य कारकों के कारण परिजनों को अनुग्रह राशि का भुगतान नहीं किया जा सकता है।

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