महाराष्ट्र में एनसीपी संकट के बीच दोनों गुट–शरद पवार और अजित पवार- ने बुधवार को शक्ति प्रदर्शन किया। जहां अजित पवार खेमे की बैठक एमईटी बांद्रा में हुई, वहीं एनसीपी प्रमुख शरद पवार द्वारा बुलाई गई बैठक मुंबई के वाईबी चव्हाण सेंटर में हुई। अजित पवार खेमे द्वारा बुलाई गई बैठक में 30 विधायक और चार एमएलसी पहुंचे तो वहीं वाईबी चव्हाण केंद्र में शरद पवार के नेतृत्व वाली बैठक में कुल 13 विधायक पहुंचे। दोनों गुटों ने 40 से ज्यादा विधायकों के समर्थन का दावा किया था।
इस बीच चुनाव आयोग को अजित पवार की ओर से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और पार्टी चिह्न पर दावा करने वाली याचिका मिली है। आयोग को जयंत पाटिल से भी एक चेतावनी मिली है कि उन्होंने 9 विधायकों के खिलाफ अयोग्यता प्रक्रिया शुरू कर दी है।
अजित पवार गुट भले ही 40 विधायकों के समर्थन की बात कर रहा है, लेकिन पार्टी के विधायक तीन गुटों में बंट गए हैं। एक गुट अजित, तो दूसरा गुट शरद पवार के साथ है। जबकि विधायकों का एक धड़ा ऐसा भी है जो अभी अगर-मगर की स्थिति में फंसा हुआ है और ये फैसला नहीं कर पा रहा है कि जाएं तो जाएं कहां?
अजित पवार ने माना कि बैठक में वे सभी विधायक नहीं हैं, जिन्हें लेकर उन्होंने हस्ताक्षर करने का दावा किया था। उन्होंने कहा, कई विधायक आज यहां नहीं हैं। कुछ अस्पताल गए हैं। कुछ पहुंच नहीं सके हैं। कुछ विधायक वाई बी चव्हाण सेंटर में हैं, लेकिन सभी मेरे संपर्क में हैं।
288 सीटों वाली महाराष्ट्र विधानसभा में एनसीपी के 53 विधायक हैं। अजित पवार के साथ 8 विधायकों ने मंत्रिपद की शपथ ली। अजित पवार गुट का दावा है कि उनके पास एनसीपी के 40 विधायकों का समर्थन है।
अजित पवार ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि हमने ये कदम क्यों उठाया? यह बड़ा सवाल है। शरद पवार हमारे नेता और गुरु हैं। इसमें कोई संदेह नहीं है। लेकिन आज देश में जिस तरह की राजनीति हो रही है, वह देखने की जरूरत है। हम एससी, एसटी, ओबीसी, अल्पसंख्यकों के लिए काम करना चाहते हैं। उनके लिए काम करना हमारा सपना है। वह सीएम कैसे बने? तब भी वही स्थिति पैदा हुई। वसंतदादा पाटिल की सरकार का पतन हुआ और शरद पवार ने PULOD का गठन किया और 1978 में सीएम बने।
उन्होंने कहा, 1980 में कांग्रेस की सुनामी आई। इंदिरा गांधी फिर देश की पीएम बनीं। इतिहास देखिए देश को करिश्माई नेतृत्व की जरूरत है। अब कहां हैं जनता पार्टी, जो 77 में सत्ता में थे, वे अब कहीं नहीं हैं। क्योंकि उनके पास करिश्माई नेतृत्व नहीं है।
अजित पवार ने कहा, 1999 में पवार साहब ने कहा था कि सोनिया गांधी विदेशी हैं। वह हमारी पीएम नहीं हो सकतीं। हमने पवार साहब की बात सुनी। भुजबल साहब ने शिवाजी पार्क में रैली की और हमने महाराष्ट्र में जाकर प्रचार किया और हमने 75 सीटें जीतीं। सभी को महत्वपूर्ण विभाग मिले। लेकिन मुझे कृष्णा खोरे महामंडल मिला, जो 6 जिलों तक सीमित था। लेकिन मैंने लगातार काम किया। शासन-प्रशासन पर मेरी पकड़ बनाई।
अजित पवार ने हाल ही में पटना में विपक्षी नेताओं की बैठक का भी मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा, ”विपक्षी नेता खाना खाकर चले गए।” प्रफुल पटेल ने इस बैठक को लेकर कहा, “मैं शरद पवार के साथ पटना में संयुक्त विपक्ष की बैठक में गया था और जब मैंने वहां का दृश्य देखा तो मुझे हंसने का मन हुआ। वहां 17 विपक्षी दल थे, उनमें से 7 के पास लोकसभा में केवल 1 सांसद हैं और एक पार्टी ऐसी है जिसके पास 0 सांसद हैं। ये पार्टियां दावा करती हैं कि वे बदलाव लाएंगी।”
अजित पवार ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए आगे कहा कि पवार साहब आप 83 साल के हो गए हैं, आप कभी रुकेंगे या नहीं। उन्होंने कहा, “आपने मुझे सबके सामने खलनायक के रूप में दिखाया। मेरे मन में अभी भी उनके (शरद पवार) लिए सम्मान है…आप मुझे बताएं, IAS अधिकारी 60 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं…राजनीति में भी भाजपा नेता 75 साल की उम्र में रिटायर हो जाते हैं। आप लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी का उदाहरण देख सकते हैं…इससे नई पीढ़ी को आगे बढ़ने का मौका मिलता है…आप (शरद पवार) हमें अपना आशीर्वाद दें… लेकिन आप 83 वर्ष के हैं, क्या आप रुकने वाले नहीं हैं?”
जूनियर पवार के इस कमेंट पर सुप्रिया सुले ने कहा, ‘लोग कह रहे हैं कि कुछ लोग बूढ़े हो गए हैं इसलिए उनको सिर्फ आशीर्वाद देना चाहिए। रतन टाटा, अमिताभ बच्चन, वॉरन वफेट सब लोग बूढ़े हैं। फारूक अब्दुल्ला जो शरद पवार से तीन साल बड़े हैं वो भी बोल रहे हैं कि शरद को लड़ना चाहिए।’ सुप्रिया ने यह भी कहा कि मुझे या किसी को भी निशाना बनाएं, लेकिन मेरे पिता (शरद पवार) को नहीं।
सुप्रिया ने कहा, “हमारी लड़ाई बीजेपी के खिलाफ है। हमारी पार्टी बीजेपी के खिलाफ है। सुप्रिया ने आगे कहा, ‘उन्होंने कहा कि NCP भ्रष्ट पार्टी है। ना खाऊंगा ना खाने दूंगा कहने वाले जरूरत पड़ने पर सबको खा जाएंगे। मेरा कहना है कि सिर्फ एक भ्रष्ट पार्टी है, वह बीजेपी है। असली एनसीपी शरद पवार के साथ है और असली प्रतीक हम हैं।”
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने भी अपने गुट के नेताओं की बैठक के बाद मीडिया को संबोधित किया। अजित पवार पर इशारे में बात करते हुए शरद पवार ने कहा कि अगर आप किसी चीज से खुश नहीं थे तो बातचीत से रास्ता निकालना चाहिए था। अगर उसके मन में कुछ था तो वह मुझसे संपर्क कर सकता था। आज पूरे देश की नजर हम पर है…एनसीपी के लिए ये मुलाकात ऐतिहासिक है। हमें अपने रास्ते में आने वाली बाधाओं के बावजूद आगे बढ़ते रहना है। हमें सत्ता की भूख नहीं है; हम लोगों के लिए काम करते रहेंगे।
पीएम मोदी का जिक्र करते हुए सीनियर पवार ने कहा, मोदी ने मध्य प्रदेश में भाषण दिया और कहा कि NCP ने 70 लाख करोड़ का स्कैम किया है। पीएम ने NCP पर कई कमेंट किए हैं। फिर अगर NCP भ्रष्ट पार्टी है तो उसे सरकार में क्यों शामिल किया? उद्धव ठाकरे के साथ जो हुआ वह दोहराया गया है।
पवार ने आगे कहा कि जिन विधायकों ने अलग होने का फैसला किया, उन्होंने हमें विश्वास में नहीं लिया। अजित पवार गुट ने किसी भी प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। पार्टी का चुनाव चिह्न हमारे पास है, वह कहीं नहीं जायेगा। जो लोग और पार्टी कार्यकर्ता हमें सत्ता में लाए, वे हमारे साथ हैं।
इस बीच मातोश्री में उद्धव ठाकरे द्वारा भी एक बैठक बुलाई गई थी। बैठक के दौरान, उद्धव ठाकरे ने उन्हें (पूर्व विधायकों को) काम करने और लोगों के मुद्दों को हल करने का निर्देश दिया। उद्धव ठाकरे 9 जुलाई से राज्य भर का दौरा शुरू करेंगे। सूत्रों ने बताया है कि महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री राज्य के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।
बता दें कि अजित पवार ने तीन साल और 7 महीने में अपने चाचा और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार से दूसरी बार बगावत की है। अजित पवार ने 23 नवंबर 2019 की तरह ही 2 जुलाई 2023 को राजभवन पहुंच अचानक डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली थी। पिछली बार शरद पवार ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया था और भतीजे अजित की बगावत को 48 घंटे के भीतर विफल कर दिया था। इसके बाद अजित पवार को डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा था और वे चाचा के खेमे में वापस लौट गए थे।
लेकिन इस बार बगावत अपने अगले दौर में पहुंच गया है। अजित पवार ने 2 जुलाई को महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम पद की शपथ ली। उनके साथ एनसीपी के 8 विधायकों ने भी शिंदे सरकार में मंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद शरद पवार एक्शन में आ गए। उन्होंने अजित के साथ बगावत करने वाले तमाम नेताओं को एनसीपी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। शरद पवार गुट के नेता जयंत पाटिल ने स्पीकर से अजित पवार और 8 मंत्रियों को अयोग्य घोषित करने की मांग की है।
