अजित पवार के महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य प्रफुल्ल पटेल और सांसद सुनील तटकरे सहित पांच नेताओं को निष्कासित कर दिया है। एनसीपी ने रविवार को एकनाथ शिंदे कैबिनेट में मंत्री पद की शपथ लेने वाले अजित पवार और आठ अन्य विधायकों को औपचारिक रूप से अयोग्य घोषित करने का कदम भी उठाया। एनसीपी की अनुशासन समिति ने अजित पवार सहित नौ विधायकों को अयोग्य करार देने के लिए प्रस्ताव पारित किया है। इन सभी विधायकों को पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अयोग्य करार दिया गया है।
पार्टी ने जिन पांच नेताओं को बर्खास्त किया है उनमें से तीन हैं- पार्टी के क्षेत्रीय महासचिव शिवाजी राव गरजे, पार्टी के अकोला शहर जिला अध्यक्ष विजय देशमुख और पार्टी के मुंबई डिवीजन के कार्यकारी अध्यक्ष नरेंद्र राणे। पार्टी ने अपने बयान में इन तीनों पार्टी नेताओं में से प्रत्येक का नाम और पद बताते हुए कहा, “इन नेताओं का कृत्य पार्टी अनुशासन के साथ-साथ पार्टी की नीति के भी खिलाफ है। इसलिए, उन्हें तुरंत पार्टी की सदस्यता और उनके संबंधित पदों से बर्खास्त किया जाता है।”
इसके अलावा, पार्टी प्रमुख शरद पवार ने लोकसभा सदस्य सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल को अपनी पार्टी से अयोग्य घोषित कर दिया। ट्विटर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण अब एनसीपी का हिस्सा नहीं रहेंगे।
एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत एनसीपी के लोकसभा सांसद सुनील तटकरे और राज्यसभा सांसद प्रफुल्ल पटेल को संसद की सदस्यता से अयोग्य घोषित करने के लिए पत्र लिखा है। पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए अजित पवार समेत नौ एनसीपी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जाएगी।
एनसीपी से निष्कासित किए जाने के बाद प्रफुल्ल पटेल ने कहा, “हम अजित पवार के नेतृत्व में सरकार में शामिल हुए थे। हमने एनसीपी के तौर पर कुछ फैसले लिए हैं , जिनके बारे में हम महाराष्ट्र के लोगों को बताना चाहते हैं। हमने पार्टी के लिए बड़े स्तर पर फैसले लिए हैं।आधिकारिक तौर पर एनसीपी ने मुझे कार्यकारी अध्यक्ष का पद दिया था। कार्यकारी अध्यक्ष से पहले मुझे उपाध्यक्ष चुना गया था। शरद पवार के फैसले NCP के फैसले नहीं है। उन पर गौर नहीं किया जाएगा। अजित पवार एनसीपी के विधिमंडल के नेता रहेंगे। उन्हें आधिकारिक तौर पर चुना गया है। अनिल पाटिल अपने पद पर बने रहेंगे। किसी भी विधायक को अयोग्य ठहराने का फैसला पार्टी या फिर चुनाव आयोग नहीं कर सकता। यह काम सिर्फ विधानसभा स्पीकर कर सकता है।“ उन्होंने सुनील तटकरे को पार्टी अध्यक्ष बनाने का ऐलान किया। सुनील तटकरे ही अब महाराष्ट्र में नियुक्ति करेंगे।
इसके साथ ही अजित पवार ने शिवसेना और बीजेपी के साथ मिलकर महायुति गठबंधन का ऐलान किया। अजित पवार ने कहा कि हम किसी को भी पार्टी से बाहर नहीं निकाल रहे हैं। विधायक हमारे साथ हैं। हम पार्टी का विस्तार कर रहे हैं और इसे आगे लेकर जाएंगे। महायुति सरकार महाराष्ट्र के विकास के लिए काम करेगी। शरद पवार हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।
सीनियर पवार का यह कदम एनसीपी की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले द्वारा एनसीपी प्रमुख शरद पवार को संबोधित एक आधिकारिक पत्र में उन्हें (सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल) अयोग्य ठहराने का अनुरोध करने के कुछ घंटों बाद आया।
सुले ने शरद पवार को संबोधित पत्र में लिखा, “सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल ने 2 जुलाई 2023 को पार्टी संविधान और नियमों का सीधा उल्लंघन किया जो पार्टी की सदस्यता से परित्याग और अयोग्यता के समान था। मैं माननीय पवार साहब से अनुरोध करती हूं कि वे तत्काल कार्रवाई करें और पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए उनके खिलाफ सक्षम प्राधिकारी के समक्ष भारत के संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अयोग्यता याचिका दायर करें।”
पार्टी की राज्य अनुशासन समिति ने पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के लिए कई एनसीपी विधायकों को अयोग्य घोषित करने का प्रस्ताव भी पारित किया। एनसीपी की राज्य समिति द्वारा जारी पत्र में कहा गया है, “यह दर्ज किया गया है कि ये दलबदल पार्टी अध्यक्ष की जानकारी या सहमति के बिना इतने गुप्त तरीके से किए गए थे, जो पार्टी छोड़ने के समान है, और यह बदले में अयोग्यता को आमंत्रित करता है।”
इससे पहले सोमवार को सतारा पहुंचने के बाद लोगों को संबोधित करते हुए शरद पवार ने कहा है कि महाराष्ट्र और देश में कुछ समूहों द्वारा जाति और धर्म के नाम पर समाज के बीच दरार पैदा की जा रही है। पवार ने आगे कहा कि हम उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में महाराष्ट्र की सेवा कर रहे हैं, लेकिन कुछ लोगों ने हमारी सरकार गिरा दी। देश के कुछ अन्य हिस्सों में भी ऐसा ही हुआ। उन्होंने 5 जुलाई को सभी नेताओं और पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है। खास बात यह है कि इस बैठक में शामिल नेताओं और पदाधिकारियों को अपने साथ एफिडेविट लेकर आना होगा।
