राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली है। जूनियर पवार बीजेपी के देवेन्द्र फड़णवीस के साथ पोस्ट साझा करेंगे। वरिष्ठ नेता छगन भुजबल, धनंजय मुंडे और दिलीप वलसे पाटिल सहित आठ अन्य एनसीपी विधायकों ने भी राजभवन में एक समारोह में अजित पवार के साथ मंत्री पद की शपथ ली।
अजित पवार का यह कदम महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में पद छोड़ने की इच्छा व्यक्त करने के कुछ ही दिनों बाद सामने आया है। राज्य के 53 एनसीपी विधायकों में से अजित पवार का दावा है कि उन्हें 40 का समर्थन प्राप्त है, जो दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों से बचने के लिए आवश्यक संख्या से चार अधिक है।
पवार ने कहा, “हमारे पास पूरी संख्या हैं, सभी विधायक मेरे साथ हैं। हम यहां एक पार्टी के रूप में हैं। हमने सभी वरिष्ठों को भी सूचित कर दिया है। लोकतंत्र में बहुमत को महत्व दिया जाता है। हमारी पार्टी 24 साल पुरानी है और युवा नेतृत्व को आगे आना चाहिए।”
जूनियर पवार ने आगे कहा, “हमने शपथ ले ली है और अगले (कैबिनेट) विस्तार में कुछ और मंत्री जोड़े जाएंगे। हम महाराष्ट्र की प्रगति के लिए काम करते रहेंगे और इसीलिए हमने यह फैसला लिया है। हमारे अधिकांश विधायक इससे संतुष्ट हैं। पार्टी के नाते हमने ये फैसला लिया है। पूरे विधायक हमारे साथ हैं। पार्टी के सांसद हमारे साथ हैं। पार्टी के कार्यकर्ता हमारे साथ हैं।”
पार्टी पर अपना नियंत्रण जताते हुए अजित पवार ने कहा कि वह और अन्य विधायक असली एनसीपी के रूप में भाजपा-शिवसेना गठबंधन में शामिल हुए हैं।महाराष्ट्र के नए उपमुख्यमंत्री ने कहा, “मैं पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न के लिए लड़ूंगा।”
अजित पवार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की और कहा, “देश पीएम मोदी के नेतृत्व में प्रगति कर रहा है। वह अन्य देशों में भी लोकप्रिय हैं। हर कोई उनका समर्थन करता है और उनके नेतृत्व की सराहना करता है। हम आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव उनके (भाजपा) साथ लड़ेंगे और इसीलिए हमने यह कदम उठाया है।”
अजित पवार ने ‘देश को आगे ले जाने में कोई दिलचस्पी नहीं होने के लिए विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा।
वहीं जब इस विषय पर NCP प्रमुख शरद पवार से पूछा गया तो उन्होंने कहा, “दो दिन पहले प्रधानमंत्री मोदी ने NCP के बारे कहा था कि एनसीपी खत्म हो चुकी पार्टी है। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों का जिक्र किया। मुझे खुशी है कि मेरे कुछ साथियों ने शपथ ली है। उनका सरकार(महाराष्ट्र) में शामिल होने से यह स्पष्ट है कि वे सभी आरोप मुक्त हो गए हैं। मैंने 6 जुलाई को सभी नेताओं की एक बैठक बुलाई थी जहां कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होनी थी और पार्टी के भीतर कुछ बदलाव किए जाने थे लेकिन उससे पहले ही कुछ नेताओं ने अलग रुख अपनाया है।”
सीनियर पवार ने कहा- “ये गुगली नहीं है, ये रॉबरी है। ये छोटी बात नहीं है और यह कोई नई बात नहीं है। 1980 में मैं जिस पार्टी का नेतृत्व कर रहा था, उसके 58 विधायक थे, बाद में सभी चले गए और केवल 6 विधायक बचे, लेकिन मैंने संख्या को मजबूत किया और जिन्होंने मुझे छोड़ा वे अपने निर्वाचन क्षेत्रों में हार गए।”
उन्होंने आगे कहा कि मुझे बहुत से लोगों से फोन आ रहे हैं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य लोगों ने मुझे फोन किया है। आज जो कुछ भी हुआ मुझे उसकी चिंता नहीं है। मैं वाई.बी. चव्हाण (महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री) का आशीर्वाद लूंगा और एक सार्वजनिक बैठक करूंगा।
शरद पवार की टिपण्णी पर NCP के कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल पटेल ने कहा कि हमारे नेता शरद पवार ने जो भी कहा है मैं उसपर कोई भी टिप्पणी नहीं करूंगा। वे हमारे लिए सम्माननीय हैं और हमेशा रहेंगे। जैसा अजित पवार ने कहा कि हमने जो भी फैसला लिया है वो पार्टी के तौर पर लिया है, सामूहिक निर्णय लिया है। किसी पर कोई दबाव नहीं है।
भाजपा के सूत्रों ने कहा है कि भाजपा-शिवसेना गठबंधन को समर्थन देने और राज्य सरकार में शामिल होने का एनसीपी का निर्णय 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी एकता के लिए एक झटका है। सूत्रों ने कहा, “यह निर्णय शरद पवार की मंजूरी के बिना नहीं लिया जा सकता था और यह कांग्रेस द्वारा राहुल गांधी को विपक्ष के नेता और 2024 के लिए पीएम उम्मीदवार के रूप में पेश करने की कोशिश का परिणाम है। राहुल गांधी और कांग्रेस की मनमानी के वजह से ऐसा हुआ है।”
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा, “अब हमारे पास एक मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्री हैं। डबल इंजन सरकार अब ट्रिपल इंजन बन गई है। महाराष्ट्र के विकास के लिए, मैं अजीत पवार और उनके नेताओं का स्वागत करता हूं। अजीत पवार का अनुभव मदद करेगा।”
उन्होंने कहा, जब किसी कर्मठ नेता-कार्यकर्ता को दबाया जाता है तब ऐसी घटना होती है। अजीत पवार एक काम करने वाले नेता है, विकास के ऊपर विश्वास रखने वाले नेता हैं इसलिए सबने उनका साथ दिया है। हमारा उद्देश्य सत्ता नहीं है, जैसे 2019 में सत्ता की लालच में लोगों की जनमत को ठुकराया और बाला साहेब ठाकरे के विचार को तोड़ मरोड़ दिया और कुर्सी पर बैठ गए। ऐसी सत्ता की लालच हमें नहीं है। हमारा एजेंडा है कि महाराष्ट्र की जनता को न्याय मिले।”
संजय राउत ने एनसीपी प्रमुख के हवाले से कहा, “हम मजबूत हूं। हमें लोगों का समर्थन प्राप्त है। हम उद्धव ठाकरे के साथ फिर से सब कुछ पुनर्निर्माण करेंगे।” राउत ने कहा, “कुछ लोगों ने महाराष्ट्र की राजनीति को साफ़ करने का बीड़ा उठाया है। उन्हें अपने तरीके से चलने दो। मेरी अभी शरद पवार से बात हुई। उन्होंने कहा, “हम मजबूत हूं। हमें लोगों का समर्थन प्राप्त है। हम उद्धव ठाकरे के साथ फिर से सब कुछ पुनर्निर्माण करेंगे। हां, लोग इस खेल को लंबे समय तक बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
राउत ने दावा किया कि उन्हें इस घना के संबंध में पहले से ही पता था। उन्होंने कहा, “यह प्रक्रिया चल रही थी हमें पहले से पता था। इस बारे में मैंने पहले भी कहा था कि यह हो सकता है। एकनाथ शिंदे के उपर जो डिस्क्वालिफिकेशन की तलवार लटक रही थी वो जल्द ही गिरने वाली है। उनके साथ 16 विधायक जो गए थे वे डिस्क्वालिफाई हो जाएंगे। अभी कुछ दिनों में महाराष्ट्र को एक और मुख्यमंत्री मिलेगा।”
एनसीपी में आए संकट पर शिवसेना (यूबीटी) नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में जिन विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा रही है, वे ”भ्रष्ट हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि भाजपा “किसी भी कीमत पर सत्ता चाहने वाले राजनीतिक अवसरवादियों” से बनी है और उन्हें वैचारिक गठबंधन के बारे में बात नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “सिद्धांतों को धिक्कार है, बीजेपी को देश में वैचारिक गठबंधन के बारे में बात करने वाली आखिरी पार्टी होनी चाहिए। वे सिर्फ राजनीतिक अवसरवादी हैं जो किसी भी कीमत पर सत्ता चाहते हैं। महाराष्ट्र में नवीनतम विकास के साथ, वे विधायक जो भ्रष्ट थे और जेल गए थे मंत्री पद की शपथ ली जा रही है!”
महाराष्ट्र NCP अध्यक्ष जयंत पाटिल ने कहा, हमारी पार्टी के कुछ नेता MLA अब वहां जाकर शपथ लिया और अब वे मंत्री हो गए हैं। यह हमारी नीति नहीं थी। महाराष्ट्र में कांग्रेस, शिवसेना और NCP का जो गठबंधन है हमारी नीति उसमें रहने की है। जो लोग गए हैं उन्होंने पार्टी के खिलाफ निर्णय लिया है। 5 जुलाई को शरद पवार के नेतृत्व में महाराष्ट्र जिले के सभी कार्यकर्ता और नेती की बैठक होगी। हमारे जो मुख्य सचेतक थे वे भी वहां जाकर मंत्री हो गए हैं। उनकी जगह हमने जितेंद्र आव्हाड को मुख्य सचेतक नियुक्त करने का निर्णय लिया है।”
पाटिल ने आगे कहा कि शरद पवार ने अपनी भूमिका स्पष्ट की है, उनकी भूमिका पर कोई शक नहीं है। कानूनी रूप से जो भी आवश्यक कदम हैं वो उठाए जाएंगे। हमारा उनपर(अजीत पवार) विश्वास था कि वे ऐसा नहीं करेंगे। इसमें किसी तरह की पूछताछ या भनक लगने की बात नहीं थी। सुप्रीम कोर्ट ने जो निर्णय दिया है उसमें लिखा है कि पार्टी अपने स्थान पर रहती है लेकिन विधायक आते जाते रहते हैं।
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, “भाजपा केंद्र में बैठकर शक्ति का इस्तेमाल कैसे करती है, ये स्पष्ट हो चुका है। महाराष्ट्र में जो तमाशा भाजपा ने बनाया है, भाजपा सत्ता के लिए कुछ भी कर सकती है, किसी का भी घर तोड़ सकती है।”
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा, “महाराष्ट्र में पहले शिवसेना को तोड़ा गया और अब NCP को। पहले डबल इंजन की सरकार थी अब ट्रिपल इंजन हो गई। यह सरकार नहीं ऑटो रिक्शा हो गई है, तीन चक्के वाली। मैंने देखा की शपथ ग्रहण में फडणवीस और पवार दोनों एक तरफ बैठे मुस्कुरा रहे हैं और दूसरी तरफ शिंदे बैठे हैं जिनका चेहरा उतरा हुआ है। आज की घटना आने वाले समय में होने वाले घटनाक्रम का संकेत दे रही है। शरद पवार ने अपने पत्ते अभी नहीं खोले हैं।”
कांग्रेस नेता सचिन सावंत ने कहा, “ये तो होना ही था। महाराष्ट्र में आज भी अगर चुनाव हो जाए तो महा विकास अघाडी को कर्नाटक से भी ज्यादा बहुमत मिलने की उम्मीद है। भाजपा लगातार पार्टी तोड़ने की कोशिश करते आ रही थी।”
JD(U)अध्यक्ष ललन सिंह ने कहा, “भाजपा जनता की ताकत में विश्वास नहीं करती है, जोड़-तोड़ पर विश्वास करती है। उन्हें झटका लगेगा। वे (बिहार में महाराष्ट्र सरकार जैसी स्थिति बनने पर) बहुत कोशिश कर चुके हैं।”
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भगवा पार्टी पर तंज कसते हुए कहा, “भाजपा समय-समय पर प्रयोग करती है, प्रयोगशाला बनाई गई हैं। पहले मध्य प्रदेश था फिर महाराष्ट्र और यह पूरा देश देख रहा है।”
महाराष्ट्र मंत्रिमंडल में अब मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों सहित भाजपा के नौ, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के नौ और एनसीपी के नौ मंत्री होंगे। इसमें अधिकतम 43 सदस्य हो सकते हैं।
मालूम हो कि अजित पवार के विद्रोह के बाद एनसीपी में विभाजन का खतरा मंडरा रहा है। एकनाथ शिंदे के 40 शिवसेना विधायकों के साथ बाहर निकलने और भाजपा के समर्थन से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने के ठीक एक साल बाद एनसीपी में संकट ने महाराष्ट्र में एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के महा विकास अघाड़ी (एमवीए) गठबंधन को भी कमजोर कर दिया है। इससे पहले, ऐसी खबरें थीं कि जूनियर पवार पिछले महीने पटना में विपक्षी एकता बैठक में मंच साझा करने और कांग्रेस के राहुल गांधी के साथ सहयोग करने के पार्टी प्रमुख शरद पवार के एकतरफा फैसले से नाराज थे।
महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव लोकसभा चुनाव के कुछ महीने बाद अगले साल अक्टूबर के आसपास होने की संभावना है।
