जिया खान सुसाइड केस में अभिनेता सूरज पंचोली बरी, 10 साल बाद आया फैसला; फैसले के खिलाफ जिया की मां जाएंगी HC

अभिनेता आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली को जिया खान आत्महत्या मामले में शुक्रवार को बरी कर दिया गया। मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने अभिनेता जिया खान की मौत के लगभग 10 साल बाद अपना फैसला सुनाया। विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश एएस सैय्यद ने कहा कि, सबूतों की कमी के कारण, यह अदालत आपको (सूरज पंचोली) दोषी नहीं ठहरा सकती, इसलिए बरी किया जाता है।

इस फैसले के बाद जिया खान की मां राबिया खान ने कहा, “आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप गया है। लेकिन मेरा बच्चा कैसे मरा? यह हत्या का मामला है… मैं उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाऊंगी”।

25 साल की जिया खान 2013 में अपने मुंबई स्थित घर में लटकी पाई गई थीं। जिया खान के एक पत्र के बाद उनके बॉयफ्रेंड सूरज पंचोली को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। सीबीआई ने कहा था कि नोट में सूरज के हाथों जिया खान के “निकट संबंध, शारीरिक शोषण और मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना” के बारे में बताया गया था, जिसके कारण उसने आत्महत्या कर ली थी।

हालांकि, सूरज पंचोली ने अदालत के समक्ष दायर अपने अंतिम बयान में दावा किया था कि जांच और चार्जशीट झूठी है, और कहा था कि अभियोजन पक्ष के गवाहों ने शिकायतकर्ता राबिया खान, पुलिस और सीबीआई के इशारे पर उनके खिलाफ गवाही दी थी।

इससे पहले, जिया खान की मां और मामले में एक प्रमुख अभियोजन गवाह राबिया खान ने अदालत से कहा था कि उनका मानना है कि यह हत्या का मामला है न कि आत्महत्या का। अब उनके मुंबई कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने की संभावना है।

सूरज पंचोली के वकील प्रशांत पाटिल ने कहा कि, ‘कोर्ट के बाहर मीडिया के सामने आरोप लगाना बहुत आसान है लेकिन सबूत से बड़ा कुछ नहीं है। कानून सबसे ऊपर है। न्यायलय ने सभी सबूतों के मद्देनजर सूरज पंचोली को बरी किया है…पुलिस और CBI ने जांच में यह पाया कि जिया खान की आत्मघाती प्रवृत्ति थी।’

बता दें कि जिया की मां राबिया खान ने जांच में खामियों का आरोप लगाया था और मामले को सीबीआई को स्थानांतरित करने की मांग की थी। राबिया की सुनवाई के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने केस सीबीआई को ट्रांसफर कर दिया था। हालाँकि, सीबीआई ने भी निष्कर्ष निकाला कि यह हत्या का मामला नहीं था, जैसा कि राबिया द्वारा आरोप लगाया जा रहा था, और कहा था कि यह आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला था।

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