अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से एक अजीबोगरीब खबर सामने आई है। दरअसल, एक लड़की को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश करने से इसलिए रोक दिया गया, क्योंकि उसने चेहरे पर झंडा बनाया हुआ था। इस घटना का एक वीडियो सोमवार को वायरल हो गया। वीडियो में स्वर्ण मंदिर के कर्मचारी को यह कहते सुना जा सकता है, “यह भारत नहीं है, यह पंजाब है”। इसी कर्मचारी ने लड़की को प्रवेश देने से मना कर दिया था।
शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के महासचिव गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने किसी भी दुर्व्यवहार के लिए माफी मांगी और कहा कि महिला के चेहरे पर चित्रित झंडा तिरंगा नहीं था।
ग्रेवाल ने कहा कि, “यह एक सिख तीर्थस्थल है। प्रत्येक धार्मिक स्थल की अपनी मर्यादा होती है … हम सभी का स्वागत करते हैं … यदि कोई अधिकारी दुर्व्यवहार करता है तो हम क्षमा चाहते हैं…उसके चेहरे पर लगा झंडा हमारा राष्ट्रीय ध्वज नहीं था क्योंकि उसमें अशोक चक्र नहीं था।”
गुरचरण सिंह ग्रेवाल ने कहा कि यह बहुत शर्म की बात है कि लोग इसके बारे में ट्वीट कर रहे हैं। देश-विदेश से श्री हरमंदिर साहिब में आने वाले सभी भक्त उनका सम्मान करते हैं।
उन्होंने कहा, “सिखों ने देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन हर बार सिखों को निशाना बनाया जाता है।” उनकी प्रतिक्रिया एक वीडियो वायरल होने के बाद आई है जिसमें एक लड़की को स्वर्ण मंदिर में प्रवेश से मना करते हुए दिखाया गया है।
मालूम हो कि बीटिंग रिट्रीट समारोह के लिए अटारी-वाघा सीमा पर जाने वाले बहुत से लोग अपने चेहरे तिरंगे में रंगवाते हैं और फिर स्वर्ण मंदिर जाते हैं। यह एक ऐसा मामला हो सकता है।
