किसान आंदोलन: समर्थन में आगे आया संत समाज, सरकार के तानाशाही रवैये के खिलाफ विरोध

गाजियाबाद: कल्कि धाम की ओर से सोमवार को किसान आंदोलन को समर्थन पत्र सौंपा गया। समर्थन पत्र में कहा गया है सोमवार को कल्कि धाम में काशी सुमेरू पीठ के जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती के पावन सानिध्य और कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम की अध्यक्षता में हुई बैठक में किसान आंदोलन को समर्थन का निर्णय लिया गया। भारत के संतो को राष्ट हित किसान और जवान की समपीड़ा के साथ खड़ा होना चाहिए। संतों के प्रतिनिधिमंडल ने सोमवार दोपहर गाजीपुर बार्डर पहुंचकर किसान नेता राकेश टिकैत को समर्थन पत्र सौंपा।
गाजीपुर बार्डर पहुंचने वाले संतों में जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज, काशी सुमेरु पीठ, श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम, स्वामी आर्यवेश जी महाराज, स्वामी नविनानंद जी महाराज, महामंडलेश्वर भूपेंद्र गिरी जी महाराज, स्वामी विष्णु विनोदम जी महाराज, स्वामी ब्रजभूषण दास जी महाराज, योगी राकेश नाथ जी महाराज, स्वामी कैलाशानंद जी महाराज, स्वामी भजनाराम जी महाराज और आचार्य केशव देव जी महाराज शामिल रहे।
मंच से अपने संबोधन में योगी राकेश नाथ जी महाराज ने कहा कि सरकार यदि जल्द ही किसानों की मांगे नहीं मानती तो संत समाज की ओर संतों की टोलियां गाजीपुर बार्डर पहुंचनी शुरू हो जाएंगी, जो यहां आमरण अनशन करेंगी। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि हर मामले में लोगों को धर्म, जाति और छोटे बड़े के नाम पर लड़ाने की साजिश अब नहीं चलेगी। सरकार को यह सब छोड़ना होगा। इसे संत समाज बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि हमसे धरती पुत्र की पीड़ा देखी नहीं जा रही, इसलिए आंदोलन स्थल पहुंचने का निर्णय लिया। योगी ने कहा कि पहले हम किसान हैं, बाद में संत। इसलिए किसानों के आंदोलन को समर्थन देना हमारा नैतिक दायित्व है।

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