ज्ञानवापी मामला: हिंदू पक्ष ने वज़ुखाना क्षेत्र के विस्तृत एएसआई सर्वेक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट का किया रुख

ज्ञानवापी मस्जिद पर एएसआई की सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक होने के कुछ दिनों बाद हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में एक अर्जी दायर कर ज्ञानवापी परिसर में ‘वजुखाना’ क्षेत्र को डी-सील करने की मांग की है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वाराणसी में मस्जिद का निर्माण एक भव्य मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2022 में ‘वज़ुखाना’ को सील कर दिया गया था।

अपनी याचिका में हिंदू पक्ष ने शीर्ष अदालत से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ‘शिवलिंग’ को नुकसान पहुंचाए बिना ‘वज़ुखाना’ क्षेत्र में एक और व्यापक सर्वेक्षण करने की अनुमति देने का अनुरोध किया है।

याचिका में कहा गया है, “सील क्षेत्र के भीतर स्थित शिवलिंगम को कोई नुकसान पहुंचाए बिना शिवलिंगम की प्रकृति और संबंधित विशेषताओं का निर्धारण करने के लिए शिवलिंगम की आवश्यक जांच/सर्वेक्षण करने के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के महानिदेशक को निर्देश दें।”

इसमें आगे कहा गया, “एएसआई को खुदाई और अन्य वैज्ञानिक तरीकों का उपयोग करके पूरे सील क्षेत्र का सर्वेक्षण करना चाहिए और अपनी रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी चाहिए। एएसआई प्रमुख प्राधिकरण है जो मामले में सच्चाई स्थापित करने के लिए शिवलिंगम सहित पूरे सील क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण कर सकता है।”

याचिका में यह भी कहा गया है, “एएसआई को पूरे सील क्षेत्र और शिवलिंगम का सर्वेक्षण करने का भी निर्देश दिया जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह एक फव्वारा है या नहीं।”

याचिका में कहा गया, “शिवलिंगम के क्षेत्र को कृत्रिम दीवारें खड़ी करके घेर दिया गया है, जो मूल इमारत से असंबद्ध आधुनिक निर्माण है। इस क्षेत्र का मुसलमानों के लिए कोई धार्मिक महत्व नहीं है क्योंकि उनके अनुसार यहां एक कथित फव्वारा है। आधुनिक निर्माण जानबूझकर शिवलिंगम से जुड़ी मूल विशेषताओं जैसे पीठ, पीठिका आदि को छिपाने के लिए किया गया है।”

हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा, “हमने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दो अंतरिम आवेदन दायर किए हैं और स्थगन आदेश (एएसआई द्वारा ‘वजुखाना’ क्षेत्र का सर्वेक्षण करने पर) को हटाने के लिए कहा है। हमने यह भी मांग की है कि एएसआई को सील किए गए क्षेत्र का फीचर अध्ययन करने की स्वतंत्रता दी जाए, खुदाई की अनुमति दी जाए और शिवलिंग को नुकसान पहुंचाए बिना वैज्ञानिक अध्ययन की अनुमति दी जाए। मुझे उम्मीद है कि इस पर जल्द ही सुनवाई होगी। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि वहां 10 ‘तहखाने’ हैं, इनमें से केवल दो ही खोले गए हैं। हमने एक आवेदन भी दायर किया है कि बाकी ‘तहखाने’ भी खोले जाएं।”

बता दें कि वाराणसी में ज्ञानवापी मस्जिद स्थल का इतिहास 800 वर्षों से अधिक पुराना है, जो युद्धों, आक्रमणों और इसके आध्यात्मिक महत्व को बहाल करने के प्रयासों से चिह्नित है। विश्वेश्वर मंदिर, जिसे अतीत में सिद्धेश्वर मंदिर के नाम से जाना जाता था, के अभिलेखित साक्ष्य महाराजा जयचंद्र गहरवार के शासनकाल के दौरान सामने आते हैं। दक्षिण एशियाई अध्ययन में विशेषज्ञता वाले पीएचडी विद्वान युगेश्वर कौशल के अनुसार, महाराजा जयचंद्र ने लगभग 1170-89 ईस्वी में अपने राज्याभिषेक के बाद इस स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया था।

ज्ञानवापी मस्जिद परिसर पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वेक्षण रिपोर्ट दो दिन पहले सार्वजनिक की गई थी, जिसमें हिंदू पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने दावा किया था कि मस्जिद का निर्माण पहले से मौजूद मंदिर को ध्वस्त करने के बाद किया गया था।

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