आप सांसद राघव चड्ढा के निलंबन पर राज्यसभा सचिवालय को सुप्रीम कोर्ट ने भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट आप नेता राघव चड्ढा की राज्यसभा से अनिश्चितकालीन निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गया और इस मुद्दे पर निर्णय लेने में अटॉर्नी जनरल से सहायता मांगी। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने चड्ढा का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी और वकील शादान फरासत की दलीलों पर ध्यान दिया कि निलंबन उस विशेष सत्र से आगे नहीं बढ़ाया जा सकता जिसके दौरान सदस्य को निलंबित करने का निर्णय लिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने चड्ढा की राज्यसभा से निलंबन को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्यसभा सचिवालय को नोटिस जारी किया। अदालत ने मामले की सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है और मामले में भारत के अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी की सहायता मांगी है। चड्ढा ने अपनी याचिका में राज्यसभा सचिवालय के अलावा सदन के अध्यक्ष और विशेषाधिकार समिति को भी पक्षकार बनाया है।

https://x.com/ANI/status/1713845083483848753?s=20

द्विवेदी ने कहा कि वह फिलहाल याचिका में कोई अंतरिम राहत नहीं मांग रहे हैं।

राघव चड्ढा को 11 अगस्त को पांच राज्यसभा सांसदों का नाम चयन समिति में शामिल करने से पहले उनकी सहमति नहीं लेने के आरोप में निलंबित कर दिया गया था। उन पर दिल्ली सेवा विधेयक से संबंधित एक प्रस्ताव में पांच सांसदों के फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप लगाया गया था। आप सांसद को तब तक के लिए निलंबित कर दिया गया, जब तक उनके खिलाफ मामले की जांच कर रही विशेषाधिकार समिति अपनी रिपोर्ट नहीं सौंप देती। उनके निलंबन का प्रस्ताव भाजपा सांसद पीयूष गोयल ने पेश किया था जिन्होंने चड्ढा की कार्रवाई को अनैतिक बताया था। इसी को लेकर राघव चड्ढा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर अनिश्चित काल तक निलंबन को चुनौती दी है।

चड्ढा को विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट लंबित रहने तक “नियमों के घोर उल्लंघन, कदाचार, उद्दंड रवैया और अवमाननापूर्ण आचरण” के लिए मानसून सत्र के आखिरी दिन निलंबित कर दिया गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *