राजस्थान में महिलाओं के खिलाफ अपराध पर बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने घोषणा की है कि राज्य में बलात्कार के आरोपियों और हिस्ट्रीशीटरों को कोई सरकारी नौकरी नहीं दी जाएगी। अशोक गहलोत ने ट्वीट कर कहा, “राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि उत्पीड़न, यौन दुराचार के प्रयासों में शामिल व्यक्तियों और यौन अपराधों के आरोपियों के साथ-साथ हिस्ट्रीशीटरों को सरकारी नौकरियों से प्रतिबंधित किया जाएगा।”
इसके लिए पुलिस स्टेशनों में बदमाशों का रिकॉर्ड रखा जाएगा और राज्य सरकार या पुलिस द्वारा जारी किए गए उनके चरित्र प्रमाण पत्र में इस बात का संकेत दिया जाएगा।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध को लेकर कांग्रेस के नेतृत्व वाली राजस्थान सरकार पर बार-बार निशाना साध रही है।
राजस्थान महिलाओं के खिलाफ घृणा अपराधों की एक श्रृंखला से जूझ रहा है। सबसे ताजा मामला 2 अगस्त को भीलवाड़ा जिले में कोयला भट्ठी में 4 साल की बच्ची के साथ कथित सामूहिक बलात्कार और हत्या का है। इसमें एक महिला सहित सात लोग शामिल थे जिन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस जघन्य कृत्य की निंदा करते हुए मुख्यहमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उनकी सरकार ने भीलवाड़ा और जोधपुर जैसी घटनाओं को बहुत गंभीरता से लिया है और राज्य पुलिस को महिलाओं के खिलाफ अपराध में शामिल लोगों से सख्ती से निपटने का निर्देश दिया है।
गहलोत ने ट्वीट कर कहा, ”भीलवाड़ा की जघन्य घटना में पुलिस ने अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है… फास्ट ट्रैक कोर्ट में कम से कम समय में आरोप पत्र पेश कर इन आरोपियों को जल्द से जल्द कड़ी सजा दी जाएगी।”
राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री और टोंक विधायक सचिन पायलट ने मंगलवार को पीड़िता के परिजनों से भी मुलाकात की और मामले की जांच के बारे में जानकारी लेने के लिए भीलवाड़ा पुलिस से बात की।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने यह जघन्य अपराध किया है, उन्होंने मानवता की हदें पार कर दी हैं। सचिन पायलट ने कहा, “मैं पीड़िता के परिजनों से मिला और पता चला कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और पुलिस दो नाबालिगों को भी हिरासत में लेने जा रही है। प्रशासन ने मुझे सूचित किया है कि अदालत रोजाना सुनवाई करेगी और POCSO मामले में चार्ज लगाएगी और उनके खिलाफ सख्त कदम उठाएगी।”
