बिहार के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत के दौरान गैंगस्टर से नेता बने अतीक अहमद को “अतीक जी” कहकर विवाद खड़ा कर दिया है। तेजस्वी यादव ने कहा, “यह अतीक जी की मौत नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में कानून की मौत हुई है।”
प्रयागराज में शनिवार को एक मेडिकल कॉलेज के पास तीन लोगों ने फायरिंग कर अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ की हत्या कर दी गई थी।
पटना हवाईअड्डे पर मीडिया को संबोधित करते हुए उन्होंने आगे कहा, “हाल के इतिहास में उत्तर प्रदेश में हिरासत में सबसे ज्यादा मौतें हो रही हैं और यह सब सस्ती लोकप्रियता हासिल करने के लिए किया जा रहा है।” तेजस्वी यादव ने यह भी दावा किया कि डॉन की हत्या पूरी तरह से स्क्रिप्टेड थी।
तेजस्वी ने आगे कहा, “उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा कस्टोडियल मौतें हुई है। यह सब कुछ सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए किया गया है। जानते हैं कि उत्तर प्रदेश में किस तरीके का शासन चल रहा है। अगर विपक्षी राज्य में अगर ऐसी हत्या हुई होती तो कोई खामोश नहीं रहता। अतीक अहमद की हत्या स्क्रिप्टेड है. अपराध और अपराधी को खत्म करने का तरीका है।”
तेजस्वी यादव के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी ने कहा कि यह मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने की कोशिश है।
बिहार बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद ने कहा कि आरजेडी हमेशा गुंडे- माफिया- बाहुबली सफेदपोशों को संरक्षित कर आगे बढ़ाने की राजनीति करती रही है। कांग्रेस जिस प्रकार ओसामा बिन लादेन, दाऊद इब्राहिम और शाहीन बाग के अपराधियों को सम्मान देती रही है। राजद भी तस्लीमुद्दीन- शहाबुद्दीन जैसे लोगों को प्रश्रय देती रही है। तो जाहिर सी बात है की अतीक अहमद और मुख्तार अंसारी जैसे लोग तेजस्वी के लिए पूज्यनीय हैं। इस तरह की भाषा से राजद- जदयू- कांग्रेस के लोग मुसलमानों को संदेश देकर वोट बैंक के लिए एकजुट रखना चाहते हैं।
आनंद ने कहा, ‘तेजस्वी यादव ने अतीक अहमद को ‘अतीक जी’ कहा, ठीक उसी तरह जैसे कांग्रेस नेता ओसामा बिन लादेन को ‘ओसामा जी’ कहते थे। यह मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसा हमेशा होता है कि मुख्तार अंसारी और अतीक अहमद जैसे अपराधी राजद के लिए पूजनीय हैं”।
वहीं जम्मू-कश्मीर की पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने भी अतीक की हत्या पर निशाना साधा है। मुफ्ती ने कहा- अतीक अहमद कोई फरिश्ता तो नहीं था लेकिन पुलिस कस्टडी में इस तरह से हत्या से लगता है कि उत्तर प्रदेश में जंगलराज है और कहीं न कहीं सत्यपाल मलिक ने पुलवामा हमले जिसमें 40 जवानों की शहादत हुई, उसमें क्या लापरवाही बरती गई और उसे किस तरह छुपाने की कोशिश की गई और भ्रष्ट्राचार को लेकर जो कहा है, इन बातों से ध्यान हटाने के लिए इसी कड़ी में अतीक और उसके भाई की हत्या हुई है।
