कर्नाटक के बीजेपी विधायक केएस ईश्वरप्पा ने मस्जिदों से दिन में पांच बार नमाज अदा करने के आह्वान ‘अजान’ पर अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया है। ईश्वरप्पा कर्नाटक के मंगलुरु में एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। कर्नाटक के बीजेपी विधायक और पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा- “मैं जहां भी जाता हूं, यह (अजान) मेरे लिए सिरदर्द होता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि यह जल्द ही खत्म हो जाएगा क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला है।
ईश्वरप्पा ने आगे कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हमें सभी धर्मों का सम्मान करने के लिए कहा, लेकिन मुझे पूछना चाहिए कि क्या अल्लाह केवल तभी सुन सकता है जब आप माइक्रोफोन पर चिल्लाते हैं?”
बीजेपी विधायक ईश्वरप्पा ने कहा- “हिंदू भी मंदिरों में प्रार्थना करते हैं। हमें उनसे ज्यादा आस्था है और यह भारत माता है जो धर्मों की रक्षा करती है। लेकिन अगर आप कहते हैं कि अल्लाह तभी सुनता है जब आप माइक्रोफोन का उपयोग करके प्रार्थना करते हैं, तो मुझे सवाल करना चाहिए कि क्या वह बहरा है। इस मुद्दे को हल किया जाना चाहिए।”
बीजेपी विधायक ईश्वरप्पा ने कहा कि, ‘कर्नाटक में अभी परीक्षाएं चल रही हैं। छात्र और अभिभावक शिकायत कर रहे हैं कि अजान और लाउडस्पीकर के कारण छात्र ठीक से पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। यह एक अच्छी चीज नहीं है।’
ईश्वरप्पा की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब कर्नाटक में सभी पार्टियां चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है।
इससे पहले पिछले हफ्ते, कर्नाटक के चिक्कमगलुरु में मुस्लिम संगठनों ने जिला आयुक्त और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सीटी रवि को एक ज्ञापन सौंपा था, जिसमें उन्हें रमजान के दौरान सुबह-सुबह अजान के लिए लाउडस्पीकर का उपयोग करने की अनुमति दी गई थी। मुस्लिम संगठनों ने मांग की थी कि 22 मार्च से रमजान के त्योहार की शुरुआत की पृष्ठभूमि में उन्हें सुबह 5 बजे से 5.30 बजे के बीच लाउडस्पीकर के इस्तेमाल की अनुमति दी जानी चाहिए। मालूम हो कि राज्य में पिछले साल हुए आंदोलन के बाद से सुबह-सुबह अजान के लिए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक है।
कर्नाटक के पूर्व उप मुख्यमंत्री ईश्वरप्पा अजान पर टिप्पणी के पहले भी विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं। इससे पहले उन्होंने 18वीं शताब्दी के मैसूर के शासक टीपू सुल्तान पर भी विवादित बयान दिया था। ईश्वरप्पा पर भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप भी लग चुके हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2005 में सार्वजनिक स्थानों पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच (सार्वजनिक आपात स्थिति को छोड़कर) लाउडस्पीकर और म्यूजिक सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया था, और कहा था कि ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर ध्वनि प्रदूषण का गंभीर प्रभाव पड़ता है। हाल ही में उच्च न्यायालयों (गुजरात और झारखंड) में मस्जिदों में लाउडस्पीकरों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए विभिन्न जनहित याचिकाएं (पीआईएल) दायर की गई हैं।
