वाराणसी.एक दिन पहले स्थानीय अखबार में कहा मानविकी संकाय डीन प्रोफेसर कौशल किशोर मिश्रा के बयान को प्रमुखता से लेते हुये बताया गया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष और रिलायंस फाउंडेशन की चैयरमैन नीता अंबानी की मौखिक सहमति के बाद 12 मार्च को विजिटिंग प्रोफेसर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। जिसमें ये कहा गया कि बीएचयू सहित पूर्वांचल की महिलाओं को वो आत्मनिर्भर बनने में मदद करें।
मामला सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर संज्ञान में आने के बाद लोगों की प्रतिक्रिया और हंगामे के बाद लगातार ट्विटर पर लोगों ने सवाल उठाना शुरू कर दिया, जिसमें सरकार को भी घेरा गया कि जियो यूनिवर्सिटी को रखकर कटाक्ष किया गया की अब काशी हिन्दू विश्विद्यालय को अंबानी यूनिवर्सिटी कर देना चाहिए।
सरकार की लगातार BHU में होने वाली नियुक्तियों को लेकर फ़ज़ीहत हो रही है , मौजूदा कुलपति के बाद नये कुलपति की दौर में लगे प्रोफेसर त्रिलोकी नाथ सिंह पर भारतीय वायु सेना सुरक्षा सौदों में भ्रष्टाचार में शामिल होने के पुख्ता सबूत है।
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मामला गरम होने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के प्रवक्ता के हवाले से न्यूज़ एजेंसी ANI के माध्यम से इस घटना को गलत बता दिया है।
पर सच्चाई ये हैं कि कल हुये छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद और लगातार सोशल मीडिया के द्वारा हंगामे के बाद सरकार बैक फुट पर आ गई है । विरोध प्रदर्शन में शामिल छात्रों में से एक शुभम तिवारी ने पीटीआई से कहा कि सुश्री अंबानी के बजाय, जिन्होंने महिला सशक्तीकरण का उदाहरण पेश किया है, उन्हें आमंत्रित किया जाना चाहिए।
आज BHU की तरफ से इस मामलें एक बयान जारी किया गया है और बताया गया है कि उनकी तरफ से ऐसी कोई पहल नहीं हुई, पर सवाल तो ये भी है यहाँ की बिना प्रशासन के कौशल किशोर मिश्रा ने ये कदम तो उठाया नहीं होगा , पर दांव उलटा पड़ जाने के बाद अब हंगामे से बचने के लिए अपना पल्ला झाड़ लिया है पर इस पूरे मामलें में विश्विद्यालय की छवि तो धूमिल हुई है उसकी भरपाई कौन करेगा।
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