TP Exclusive वाराणसी- फेक न्यूज़ सूंघने वाले ADM “प्रशासन” विपिन, राजस्व के फर्ज़ीवाड़े को नहीं पहचान पा रहे है ?

जब से योगी आदित्यनाथ की सरकार सत्ता में काबिज हुई है, सूबे के अधिकारी भी खुद को प्रदेश का मुखिया मान बैठे है। एक तरफ मुख्यमंत्री आदित्यनाथ का नेस्तनाबूद कर देंगे, सुधार देंगे, जैसी खूबसूरत पॉलिटिकल स्टंट वाले बयान और दूसरी तरफ गले से ऊपर और आंखों से नीचे तक आकंठ भ्रष्टाचार में डूबे अधिकारियों की जमात। जिन्हें सिर्फ इस बात से फर्क पड़ता है “बाप बड़ा ना भैया सबसे बड़ा रुपैय्या”

ऐसे ही अति विशिष्ट होने का दंभ रखने वाले बनारस जिले सरकारी दफ्तर के अधिकारियों का मोनोपॉज चल रहा है। क्योंकि मूड स्विंग और हार्मोन्स के बदलते क्रम में सच और झूठ का फैसला लेने में वो अक्षम साबित हो रहे हैं। ये वहीं लोग हैं जिन्हें कानून व्यवस्था और जनता की सेवा के लिए चुना जाता हैं। बकायदा इसके लिए आर्टिकल 315 के तहत शपथ दिलाई जाती है। खुलेआम क़ानून की धज्जियां उड़ाते इन निजी सेवकों की पोल- खोल आज तक्षकपोस्ट की इस खास रिपोर्ट में-

पिछली रिपोर्टTP Exposed- वाराणसी DM के नाक के नीचे धड़ल्ले से फ़र्ज़ी सरकारी कागज़ बना कर राजस्व विभाग को चूना लगाने का मामला आया है सामने

बनारस की गलियों में बहुचर्चित महादेव महाविद्यालय के राजस्व, फर्ज़ीवाड़े और फ़र्ज़ी दस्तावेजों के दुरूपयोग के साथ निजी लाभ प्रकरण में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट के पद पर कार्यरत (प्रोटोकॉल, लॉ एंड आर्डर) प्रकाश चंद्र और विपिन कुमार ने तक्षकपोट की पुरानी रिपोर्ट DM की नाक के नीचे फर्ज़ीवाड़े को सही साबित करते हुये। सरकारी रास्ता फर्ज़ीवाड़े को बचाने का निकाल कर 2025 में नया कीर्तिमान रचने का काम किया है। क्योंकि ये भी महादेव की राह पर चलते हुए अपने पद और पॉवर का दुरुपयोग करके फ़र्ज़ी रिपोर्ट तैयार करके शासन को गुमराह करने की तरकीबें लगा रहे हैं। कारण साफ है बिना जमीन के कॉलेज की झूठी इमारत को बचाना-

महादेव कॉलेज के प्रबंधक अजय सिंह के द्वारा राजस्व के इस बड़े फर्ज़ीवाड़े ने तो व्यापम को भी पीछे छोड़ दिया है। कायदे से अगर जांच हो जाये तो पता नहीं कितनी और हत्याओं की गुत्थी सुलझ सकती है। शिक्षा के नाम पर किये गए फर्ज़ीवाड़े को बचाने के लिए लटकी जांच की तलवार और जांच की आंच से अजय सिंह और उनके सहयोगियों को बचाने के लिए दोनों प्रशासनिक अधिकारियों ने अपनी पूरी ऊर्जा का प्रवाह अपने मालदार औए पानीदार मित्र को बचाने के लिए लगा रखा है। इतना ही नहीं इस फर्ज़ीवाड़े के प्रोटेक्शन में महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की रजिस्ट्रार सुनीता पांडेय की भूमिका भी काफी अहम है। क्योंकि उसकी नौकरी को बचाने और राजस्व के फर्ज़ीवाड़े को दबाने के लिए उसके शह पर ही विभूति भूषण सिंह की हत्या वर्ष 2022 में करवा दी गई थी। सूत्रों ने बताया आजकल छुट्टी पर रहने के बाद भी मैडम महादेव के नमक का कर्ज उतारने में लगी है। कैसे भी उसको फ़र्ज़ी तरीके से राहत दिलवा दे।

सवाल उठाने पर इस बार फिर भूमि सत्यापन के लिए बड़ी चालाकी से विश्विद्यालय के संबद्धता विभाग ने गलत जानकारी मांगी। ताकि चोरी से महादेव महाविद्यालय की संबद्धता की फ़ाइल को प्रॉसेस कर के सूबे की राज्यपाल समेत सभी विभागों को धोखे में रखा जा सकें। क्यूंकि शासन के नियम कहते है शिकायत और सत्यता मिलने पर विश्विद्यालय को कारवाई करनी पड़ेगी।

इसी क्रम में पिछले वर्ष कमिश्नर कौशल राज शर्मा ने इस महाविद्यालय का 2018 का एकतरफा CLU रद्द किया है। अब बड़ा सवाल ये है कि कॉलेज के पास जमीन नहीं है, अकृषित भूमि का सर्टिफिकेट नहीं है, तो कॉलेज चल कैसे रहा है ?? इसका जबाव है ..फर्ज़ीवाड़ा, पैसों और लड़कियों की सप्लाई जिसने अजय सिंह को अभी तक बचाया है।

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तक्षकपोस्ट को सूत्रों ने बताया कि ADM विपिन कुमार लड़कियों के शौकीन है। इतना ही नहीं विपिन कुमार को 5 लाख रुपये भी इस फर्ज़ीवाड़े को बचाने के लिए अदा किये गए है। 50 हजार के नोटों की 10 गड्डियां इसका सबूत है। इसकी मध्यस्थता भाजपा का जिला अध्यक्ष और वर्तमान MLC हंसराज विश्वकर्मा के जरिये हो रही है। हंसराज महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में मेंबर भी है। हंसराज ने विपिन कुमार को मीटिंग में अजय सिंह के साथ बैठकर ना सिर्फ फ़र्ज़ी रिपोर्ट लिखवाने को कहा बल्कि तक्षकपोस्ट की एडिटर को मामलें की तहकीकात करने पर झूठे मुकदमों में फ़साने की भूमिका पर भी मुस्तैद रहने को कहा। सरकारी अमले को मिलाकर किये जा रहे इस फर्ज़ीवाड़े को बचाने के लिए कई फ़र्ज़ी FIR लिखी भी जा चुकी है। इसके अगले ही दिन विपिन कुमार के सरकारी दफ्तर में 3 मार्च को दोपहर 12 बजे से 3.30 बजे तक अजय सिंह को मेहमाननवाजी करवाने के साथ फ़ाइल मंगवा कर दिखा कर चोरी का रास्ता भी बनाया गया। 6 मार्च को तहसीलदार समेत लेखपाल कानूनगों की पूरी फौज मिलकर जुगाड़ लगाने इसके कॉलेज पर प्रकाश चंद और विपिन कुमार के इशारे पर चाय नाश्ता करने और थैला लेने पहुंची थी।

बरेली से आये प्रकाश चंद और सुनीता पांडेय का पुराना रिश्ता और इतिहास रहा है। ADM प्रोटोकॉल और ADM प्रशासन को अजय सिंह के साथ उसके आवास और कॉलेज पर कई मौके पर देखा गया है। विपिन कुमार और प्रकाश चंद दोनों कचहरी और तहसील में तैनात कर्मचारियों पर दबाव डालने का काम कर रहे है, ताकि किसी भी तरह फ़र्ज़ी रिपोर्ट तैयार कर के विश्वविद्यालय को भेजी जा सकें और लिए गए पैसों का हक़ वफादारी से अदा किया जा सकें। क्यों ना इन अधिकारियों के ऊपर भी हत्या का मुकदमा क्यों नहीं दर्ज होना चाहिए।

बड़ा सवाल ये है कि क्यों आखिर इतने बड़े फर्ज़ीवाड़े को दबाने के लिए ये दोनों प्रयासरत है। दूसरी तरफ बाबा का बुलडोजर केवल मुसलमानों का नाम सुनकर चलता है। फ़र्ज़ी तरीके से हासिल की गई जमीन और उसके लिए किये गए खून पर, पूरा कुनबा चुप्पी साध कानों में रुई डाल कर बैठा है। इसकी साफ वजह कॉलेज की वो पीड़ित लड़कियों खुद बताती है। कैसे उन्हें पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों के पास जाने पर अजय सिंह और उसकी पत्नी सीमा सिंह के द्वारा मजबूर किया जाता रहा है। इस बात की पुष्टि पूर्व DG-CBCID भी तक्षकपोस्ट को कर चुके है। इस हत्या में अभी तक अजय सिंह समेत अन्य आरोपियों को क्लीन चिट नहीं मिली है कोर्ट से। कानूनी कारवाई और गवाही की प्रक्रिया चल रही है। 

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विपिन कुमार के मातहत भी भ्रष्टाचार और लड़कियों के साथ समय बिताने को दबी जुबान में दोहराते है। ये वहीं विपिन कुमार है जो चुनाव के दौरान पत्रकारों को फेक न्यूज़ की नसीहत देते देखे गए थे। इनका इतिहास है, फेक चीजों को सूंघने का तो क्यों आखिर उनको फेक दस्तावेज और राजस्व फर्ज़ीवाड़े की गंध नहीं लग रहीं। भ्रस्टाचार में डूबे नोट शायद बहुत अच्छी खुशबू वाले होते है।

बरहाल इस मामलें में न्याय के लिए पीड़ितों का शोषण और कानून का दोहन किया जा रहा है। जिलाधिकारी राजलिंगम का इतिहास चोरी का नहीं रहा है। उनसे ये उम्मीद की जाती है कि वो इस मामलें की संजीदगी को देखें और इन भ्रस्टाचारियों के खिलाफ उचित कारवाई करें। ताकि मुख्यमंत्री के द्वारा करोडों रूपए खर्च करके जो PR ब्रांडिंग की जारी है अपराध का उन्मूलन और अपराधियों के साथ सख्ती के उसको चरितार्थ किया जा सके।

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