बांग्लादेश छोड़ने के बाद शेख हसीना ने जारी किया पहला बयान, हिंसा करने वालों के लिए की सजा की मांग

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने देश छोड़ने के बाद पहली बार बयान जारी किया है। शेख हसीना ने उन हत्याओं और बर्बरता पर प्रतिक्रिया व्यक्त की है, जिसने पिछले महीने उनके देश में कहर बरपाया था और जिसके कारण उन्हें पिछले सप्ताह इस्तीफा देना पड़ा और भागना पड़ा।देश छोड़ने के बाद पहले बयान में, हसीना ने अपने बेटे सजीब वाजेद जॉय के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स के माध्यम से, जुलाई में हुई हत्याओं और बर्बरता में शामिल लोगों की पहचान करने और उन्हें दंडित करने की मांग की।

उन्होंने कहा, जिन बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में देश ने आजादी हासिल की थी, उनका अपमान किया गया है। उन्होंने (प्रदर्शनकारियों) मेरे पिता का अपमान किया है, मैं देश वासियों से न्याय की मांग करती हूं।

हसीना की ओर से एक्स पर लिखी गई पोस्ट में उनके परिवार के इतिहास, उनकी शहादत और बांग्लादेश के लिए 15 अगस्त के महत्व का वर्णन किया गया है।

उन्होंने अपने देशवासियों से “बंगबंधु भवन में पुष्पांजलि अर्पित करके” 15 अगस्त को राष्ट्रीय शोक दिवस के रूप में मनाने की अपील की।

पूर्व प्रधानमंत्री ने “छात्रों, शिक्षकों, पुलिस, गर्भवती महिलाओं, पत्रकारों, सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं, आवामी लीग और उसके सहयोगी निकायों के नेताओं और कार्यकर्ताओं, पैदल यात्रियों और विभिन्न संस्थानों में काम करने वाले लोगों” और “आंदोलन के नाम पर आतंकवाद और हिंसा भड़काने” के प्रति संवेदना व्यक्त की।

हसीना ने कहा, “मेरी संवेदनाएं मेरे जैसे उन लोगों के साथ हैं जो अपने प्रियजन को खोने के दर्द से जूझ रहे हैं। मैं मांग करती हूं कि इन हत्याओं और बर्बरता में शामिल लोगों की उचित जांच की जाए और दोषियों की पहचान करके उन्हें सजा दी जाए।”

पूर्व पीएम ने कहा, “15 अगस्त 1975 को धानमंडी बंगबंधु भवन में जो जघन्य हत्याकांड हुआ था। उसकी याद को संजोए हुए घर को हम दो बहनों ने बंगाल की जनता को समर्पित किया। एक स्मारक म्यूजियम बनाया गया। देश के आम लोगों से लेकर देश-विदेश के नामचीन लोग इस घर में आ चुके हैं। यह म्यूजियम आजादी का स्मारक है।”

शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं लेकिन यह अभी तय नहीं है कि भविष्य में भी वह भारत में ही रहेंगी। बताया जा रहा है कि वह किसी अन्य देशों में शरण की मांग कर रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन ने उन्हें शरण देने से इनकार कर दिया है। इसके अलावा वह फिनलैंड और यूनाइटेड अरब अमीरात को ऑप्शन के रूप देख रही है।

इससे पहले मंगलवार को बांग्लादेश की एक अदालत ने पिछले महीने छात्रों के विरोध प्रदर्शन के दौरान ढाका में एक किराने की दुकान के मालिक की मौत में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भूमिका की जांच का आदेश दिया। मामला अमीर हमज़ा और छह अन्य द्वारा दायर किया गया, और ढाका के मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत ने सुनवाई के बाद इसे स्वीकार कर लिया।

देश में घातक छात्र विरोध प्रदर्शन के बाद हसीना के खिलाफ दायर किया जाने वाला यह पहला मामला था।

ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच, हसीना के सलाहकार सलमान एफ रहमान और पूर्व कानून मंत्री अनीसुल हक को गिरफ्तार कर लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने उन्हें न्यू मार्केट थाने के एक मामले के सिलसिले में हिरासत में ले लिया, जब वे मंगलवार को राजधानी के सदरघाट इलाके से जलमार्ग से भागने की कोशिश कर रहे थे।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, कोटा सुधार की मांग को लेकर भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के दौरान 16 जुलाई को ढाका कॉलेज के सामने हुई झड़प में दो लोग मारे गए थे। इस संबंध में थाने में दो मामले दर्ज कराये गये थे। हत्याओं के सिलसिले में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

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