बनारस से अब “क्योटो” में बढ़ता हत्या का नया कल्चर, नमो घाट पर 17 साल के बच्चें की पीट-पीट कर हत्या

प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में कुछ दिनों से नया कल्चर अस्तित्व में आ गया है। गुंडागर्दी और अराजकता नये सोपान पर जाकर हिलोरें मार रही है। प्रदेश की और देश की कमान आजकल भाजपा के हाथों में है। देश और प्रदेश की सरकार एन्टीइनकंबेंसी के कारण सत्ता से बेदखल हो गई। बड़ी उम्मीदों से लोगों ने सत्ता परिवर्तन का रास्ता चुना था। लेकिन क्या ये परिवर्तन लोगों के मासूम बच्चों की जान से भी ऊपर है !!! सोनभद्र के सब्ज़ी विक्रेता झुन्नू जायसवाल के बेटे को निर्मम तरीके से हमला करते हुऐ। मौत के घाट उतार दिया गया।

आस्था और मोक्ष के शहर बनारस में सुबह के तीन बजे अपने परिवार के सदस्य के लिए दवा लेने आये चिंटू ने कभी ये नहीं सोचा होगा कि बनारस उनके लिए आखिरी सफर बन सकता है। दोस्तों के साथ आये 17 वर्षीय मासूम राजेश उर्फ चिंटू जायसवाल को निजी कंपनी के बाउंसर और गार्ड के द्वारा मामूली सी कहासुनी पर घेर कर करीब 10-12 की संख्या में बेल्ट और डंडो से इतना मारा गया कि अस्पताल जाते-जाते उस मासूम ने दम तोड़ दिया। खून से लथपथ चिंटू को आदमपुर चौकी प्रभारी विमल मिश्रा और अन्य जवानों ने उठाकर भर्ती करवाया।

गाली गलौज से शुरू हुआ विवाद हिंसक और खूनी हो गया। चिंटू के दोस्तो को भी गंभीर चोटें आई है।

ये सारा वाक्या पहले (खिड़कियां घाट ) अब नमो घाट के नाम पर नौटंकी स्थल बने घाट पर हुआ। जहाँ प्राइवेट कंपनी के बाउंसर आये दिन अपनी मनमानी और गुण्डागर्दी के लिए मीडिया की सुर्खियों में छाए रहते है। सवाल ये है कि किसकी शह पर ये गुंडागर्दी खुलेआम सालों से चल रही है।

सूत्रों का कहना है की योगी सरकार के विधायक नीलकंठ तिवारी और योगी के हिन्दू युवा वाहिनी के अम्बरीष सिंह भोला का इनको संरक्षण है। जिसके कारण पहले भी इस तरह की घटना में कभी कोई कारवाई नहीं हुई। पुलिस बेचारी केवल तमाशा देखने के लिए है। पुलिस कमिश्नर से ये सवाल जरूर पूछा जाना चाहिए की बनारस में सब अधिकारी सिंघम के नौटंकी में व्यस्त रहते है। फिर सिंघम की तरह इन बदमाशों पर कभी कोई कारवाई क्यों नहीं हुई।

राजेश नाम के इस नाबालिक बच्चे को इतना मारा गया की वो दुनिया से रुखसत हो गया। उसकी चीख पुकार पर कोई मदद नहीं पहुंची। वो खून में लथपथ वहां पड़ा चीखता रहा लेकिन हत्यारों का मन नहीं पसीजा।

दरअसल बजड़ा संचालन काफी समय से विवादों में रहा है। नाव के लिए बदमाशी और मनमाना किराया यहाँ आने वाले पर्यटकों के लिए एक बड़ा सिरदर्द का रहा है। गोविंद साहनी नाम के व्यक्ति के पास नमो घाट का बजड़ा संचालन है और इसको राजनैतिक संरक्षण मिला हुआ है।

नमो घाट पर सिक्योरिटी का ठेका भी भाजपा के करीबी और माफिया चक्षु पंडित एवं पुनीत मित्तल की कंपनी आर के वैदिक के पास है। जो नगर में रुद्राक्ष सेन्टर समेत कई जगहों पर काम कर रही है। स्वाभाविक है मनमानी तो होगी। इस कंपनी के अधीन काम करने वाले एक व्यक्ति ने बताया ” मालिक का कहना है मारो पिटो लेकिन वसूली रुकनी नहीं चाहिए।

स्मार्ट सिटी के नाम पर बंदर बांट का एक हिस्सा ये नमो घाट भी है। लेकिन इसमें आम नागरिकों की सुरक्षा का स्वरूप गायब है। इसलिए तरीके की मनमानी हो रही है।

राजेश के साथी बृजेश गुप्ता के मुताबिक, नमो घाट पहुंचते ही वहां मौजूद गार्डों ने उन्हें रोक दिया। आरोप है कि गार्डों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। इसी बात पर राजेश उर्फ चिंटू ने विरोध जताया और पूछा कि गाली क्यों दी जा रही है। इसी दौरान बहस बढ़ गई। गार्डों ने कथित तौर पर धमकी दी कि “अभी हेकड़ी निकाल देंगे।” इसके बाद पांचों युवक वहां से लौटने लगे, लेकिन मामला यहीं खत्म नहीं हुआ। बृजेश के अनुसार, कुछ ही देर बाद 10 से 12 लोग लाठी-डंडे लेकर वहां पहुंचे और आते ही हमला बोल दिया।

प्रत्यक्षदर्शी साथी ने बताया कि गार्डों और बाउंसरों ने सबसे ज्यादा हमला पिंटू उर्फ चिंटू पर किया। उसे बेरहमी से पीटा गया। लाठी-डंडों की मार से वह खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़ा। बाकी लड़कों को भी दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। जान बचाने के लिए कुछ युवक भागे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। घाट पर मौजूद लोग जुटने लगे। घायल चिंटू को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन मंडलीय अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

“CCTV में कैद है सच-

घटना के बाद बृजेश गुप्ता ने कहा कि अगर नमो घाट और आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली जाए तो पूरी सच्चाई सामने आ जाएगी। उसने आरोप लगाया कि गार्डों ने सिर्फ मारपीट नहीं की, बल्कि जान लेने वाली बर्बरता दिखाई। अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जिस घाट पर हर समय सुरक्षा और निगरानी के दावे किए जाते हैं, वहां इतनी बड़ी वारदात कैसे हो गई? क्या वहां मौजूद सुरक्षा कर्मियों को किसी का डर नहीं था? और अगर CCTV कैमरे लगे थे, तो हिंसा रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने चार लोगों को हिरासत में लिया है। और CCTV फुटेज खंगालने की बात कही है। कोतवाली सर्किल के ACP विजय प्रताप सिंह ने बताया कि सोनभद्र से पांच युवक वाराणसी घूमने आए थे। सुबह तीन बजे गेट नंबर दो के पास बने रैंप पर उनकी प्राइवेट सिक्योरिटी गार्डों से कहासुनी हुई, जो बाद में हिंसक झगड़े में बदल गई। उन्होंने कहा कि चिंटू जायसवाल को गंभीर चोटें आई थीं और इस मामले में शामिल गार्डों को गिरफ्तार कर पूछताछ की जा रही है। अन्य की तलाश जारी है।

सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं

यह मामला सिर्फ एक किशोर की मौत का नहीं है। यह उस व्यवस्था पर सवाल है, जहां सुरक्षा के नाम पर तैनात लोग खुद कानून हाथ में लेकर किसी की जान लेने तक उतर आते हैं। नमो घाट जैसे प्रतिष्ठित स्थान पर अगर पर्यटक खुद को सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे, तो फिर शहर की छवि और प्रशासनिक दावों का क्या अर्थ रह जाएगा?

तक्षकपोस्ट की तरफ से बनारस के जिलाधिकारी का बयान लेने के लिए जब फ़ोन किया गया तो, ये बताया गया साहब व्यवस्त है। मुख्यमंत्री के किसी कार्यक्रम के लिए। शहर में इतनी बड़ी घटना हो जाये और जिलाधिकारी व्यस्त रहे तो फिर क्या ही कहना आम नागरिकों की सुरक्षा का। योगी मॉडल DM भी एक झुनझुना बन कर रह गए है। खबर लिखे जाने तक कोई बयान उपलब्ध नहीं हो सका है ।

 

 

 

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