भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) पटना की स्थापना 6 अगस्त 2008 को इस उम्मीद के साथ की गई थी की, वो भविष्य में विज्ञान के साथ सेकेंड जनरेशन की जरूरतों को पूरा कर सकें। लेकिन पिछले 5 सालों से पटना IIT में भविष्य के आविष्कार की जगह कीचड़ की भरमार हो गई है। इनके बीच वैसे तो कई ऐसे शख्स है जो एकदम देशी कमलकुमुदिनी के रूप में खिल रहे है। भ्रस्टाचार की जड़े इतनी गहरी हो चली है कि TN Singh जैसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्रालय आंख मूंद कर डायरेक्टर के पद पर बहाल किये बैठा है। एक तरफ देशभक्ति की बाते करनी वाली NDA की सरकार 2014 से सत्ता में काबिज है। जिसे देशद्रोह जैसे अपराध में संगलिप्त रहने वाले त्रिलोकीनाथ सिंह से परहेज नहीं है।
इसका खुलासा भी तक्षकपोस्ट ने पांच साल पहले बड़ी जिम्मेदारी के साथ किया था। लेकिन हरे नोटों की गड्डियां आजकल वाशिंग मशीन बन गये है भ्रस्टाचार धोने की।
Takshaka Post Exposed Mastermind of IACCS-IAF-Scam-7900,cr is NDA/RSS’ Man V K Saraswat
राष्ट्रीय स्तर पर एक महत्वपूर्ण संस्थान में आजकल ऐसा क्या हो गया जिसकी चर्चा होनी चाहिए ??
पक्की बात है, कि संस्थान का बेड़ा डुबाने में TN Singh और उसकी टीम के अवलेन्द्र ठाकुर , डॉ प्रवीण कुमार, अनूप केशरी, नूतन कुमार तोमर, अमित कुमार जैसों लोगों को सर्वेसर्वा बना कर सरकारी तंत्र को भी कायदे से लूटा जा रहा है। तक्षकपोस्ट की एक्सक्लूसिव सीरीज में परत दर परत खुलासे होंगे।
आज पहली सीरीज की शुरुआत NIRF (National Institutional Ranking Framework) की सूची में आने के लिए किया गया फर्जीवाड़ा करना है।
NIRF क्या है ??
2015 में तत्कालीन (MHRD) शिक्षा मंत्रालय के द्वारा शुरू किया गया एक फ्रेम वर्क था। जिसने उच्च शिक्षा के कार्यक्षमता और प्रोडक्टिविटी के आधार पर रैंकिंग मिलती है। यू कह ले ये भी अपनी तरह का अलग ही फर्जीवाड़ा है। जिसमें कॉलेज अपनी योग्यता को सबसे बेहतर बताने की जुगत में रहते हैं। NIRF में अलग- अलग कैटेगरी है।
पटना IIT ने ऐसा क्या किया जिसके कारण फर्ज़ीवाड़े का आरोप लगा और सबूत हमारे हाथ लगा विस्तार से –
पटना IIT ने (NIRF) रैंकिंग में वर्ष 2024 के डाटा के मुताबिक 73वें स्थान से सीधा 36वां स्थान हासिल करने की बात कही। लेकिन जिस तरह से ये आंकड़ा कम हुआ वो किसी हेर-फेर के संभव ही नहीं है। क्योंकि जिस तरह टीचिंग और आउटरीच को आधार बना कर रैंकिंग होती है उसमें पटना IIT कही फिट ही नहीं बैठता। कैसे एक साल के भीतर फैकल्टी के परसेंट में 109 प्रतिशत की विद्धि दिखाई गई है। जो असामान्य है।
IIT पटना में 2024 में फैकल्टी की संख्या -166
IIT पटना में 2025 में फैकल्टी की संख्या – 275
इसका खुलासा एक RTI में हुआ जब जानकारी मांगी गई कि 2023-24 और 2024-25 में कितने रिक्रूटमेंट हुये ?
जबाव में बताया गया 2023-24 से 2024-25 में मात्र 24 फैकल्टी मेंबर को नियुक्ति मिली है। जबकि रैंकिंग के लिए 109 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई थी।
बड़ा सवाल फिर ये 85 नाम किन लोगों के है, जिन्हें IIT पटना ने अपना फैकल्टी बता कर फॉर्ज़री की है।
सूत्रों से पता लगाते हुये तक्षकपोस्ट जब रैंकिंग की लिस्ट की चेकिंग करते हुऐ 201 नम्बर पर पहुंचा तो चौकने वाले खुलासे हुए।
इस रैंकिंग पर डॉ प्रवीण कुमार नाम के शख्स का नाम दर्ज है। जिसकी नियुक्ति अप्रैल 2022 में FIST-TBI पटना IIT के तहत हुई थी। ये नियुक्ति संविदा (Contractual) थी। बड़ा सवाल ये है कि संविदा का व्यक्ति सीधा रेगुलर फैकल्टी कैसे बन गया।
औपचारिक रूप से ऐसी किसी भर्ती प्रक्रिया के विज्ञापन का कही कोई जिक्र नहीं मिल रहा । जिसके आने के बाद डॉ प्रवीण कुमार की नियुक्ति रेगुलर फैकल्टी के तौर पर हुई हो। ऐसे में NIRF रैंकिंग में प्रवीण कुमार का नाम कैसे शामिल किया गया।
ऐसी खबरों की पुष्टि भी हुई है, इस रैंकिंग के लिए सफाई कर्मचारी तक को फैकल्टी दिखाया गया है। ये NIRF रैंकिंग की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
रैंकिंग की विश्वसनीयता पर सवाल ?
डेटा की पारदर्शिता सवालों के मुहाने पर ?
संस्थान की साख पर प्रश्नचिन्ह ?
मतलब सरकारी तंत्र में पैठ बनाने के लिए जबरदस्त भ्रस्टाचार। क्या बिना डायरेक्टर के और अन्य मातहतों के शामिल हुए बिना संभव है क्या ???
TN Singh का खुद का इतिहास बड़ा दागदार रहा है । सेना के लिए बनने वाले एक प्रोजेक्ट IACCS Scam में शामिल रहा हो। महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के कुलपति रहते हुए तमाम फर्ज़ीवाड़े में शामिल हो। इतना ही नहीं फर्ज़ीवाड़े के कारण हुए भ्रस्टाचार में हुई एक हत्या में भी पर्दे के पीछे से शामिल है। इसका जिक्र CBCID के पन्नो में दर्ज बयानों में है।
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अवलेंद्र ठाकुर और TN Singh के संयुक्त उपक्रम में पटना IIT में भ्रष्टाचार अपने उच्चतम सोपान पर है। जिसका खुलासा NRIF की रैंकिंग में हुआ। इसके अलावा ठेका- टेंडर से लेकर फ़र्ज़ी संस्थाओं को IIT बेचने की गतिविधियों को भी देखा जा सकता है।
12 मार्च वर्ष 2025 में होली के एक दिन पहले पटना IIT के डायरेक्टर TN Singh के सरकारी आवास और दफ्तर पर (CBI ) क्राइम के अधिकारियों का छापा हुआ था। जिसमें नियुक्ति और तमाम विसंगतियों को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय को शिकायत दर्ज करवाई गई थी। और प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्देश के बाद मामला आगे बढ़ाया गया। कंप्यूटर के साथ दस्तावेज जब्त किए गये थे। जिन्हें दबाने की कोशिश हुई थी। आरोप तो ये भी है कि नियुक्ति के नाम पर लोगों से 40-50 लाख रुपये वसूले गये थे। लेकिन पटना IIT की तरफ से ऐसी किसी खबर नकार दिया गया था।
देखा जाये तो देशभक्ति के कीचड़ में अवलेंद्र ठाकुर और TN Singh गोते लगाते हुये अपनी जेब भरने में लगे हुये है। आम जनता के पैसों का ऐसा दुरुपयोग कभी देखा नहीं गया। अन्य IIT संस्थानों में भी भ्रष्टाचार है लेकिन पटना IIT के जैसा कही कोई मामला अभी तक दर्ज नहीं हुआ है।
सूत्रों के हवाले से TN Singh अपने अगले कार्यकाल के लिए जुगाड़ लगाने में लगा हुआ है। इसलिए NIRF की रैंकिंग में बढ़-चढ़ कर हेराफेरी हुई। ताकि मंत्रालय में गुड बुक में जगह बनाई जा सके। देखना ये लाज़मी है कि मंत्रालय क्या कोई जांच समिति बनाता है ?



