राहुल गांधी रायबरेली सीट से बने रहेंगे सांसद, बहन प्रियंका गांधी वायनाड से लड़ेंगी उपचुनाव

कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने वायनाड लोकसभा सीट छोड़ने का फैसला किया है और अपने पारिवारिक गढ़ रायबरेली को बरकरार रखेंगे, जिसे उन्होंने हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव में जीता था। खड़गे ने कहा कि उनकी बहन और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वायनाड सीट से चुनावी शुरुआत करेंगी। दरअसल राहुल गांधी ने आम चुनावों में दोनों लोकसभा सीटों – केरल में वायनाड और उत्तर प्रदेश में रायबरेली – पर प्रभावशाली अंतर से जीत हासिल की थी।

नई दिल्ली में पार्टी प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की चर्चा के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की घोषणा की गई।

नियमों के अनुसार, राहुल गांधी को 4 जून को आए लोकसभा नतीजों के 14 दिनों के भीतर एक सीट खाली करनी थी। अब जब राहुल गांधी ने रायबरेली में रहने का विकल्प चुना है, तो उनकी बहन प्रियंका वायनाड की खाली सीट से उपचुनाव लड़ेंगी।

खड़गे ने घोषणा करते हुए कहा, “राहुल गांधी दो लोकसभा सीटों से जीते हैं, लेकिन कानून के अनुसार, उन्हें एक सीट खाली करनी होगी। राहुल गांधी रायबरेली बरकरार रखेंगे और हमने फैसला किया है कि प्रियंका जी वायनाड से लड़ेंगी।”

इस दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी अपनी बात रखी। राहुल गांधी ने कहा कि रायबरेली और वायनाड दोनों को दो-दो सांसद मिलेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि गांधी भाई-बहन अक्सर दोनों निर्वाचन क्षेत्रों का दौरा करेंगे।

राहुल ने कहा, “वायनाड और रायबरेली से मेरा भावनात्मक रिश्ता है। मैं पिछले 5 साल से वायनाड से सांसद था। मैं लोगों को उनके प्यार और समर्थन के लिए धन्यवाद देता हूं। प्रियंका गांधी चुनाव लड़ने जा रही हैं और मुझे पूरा विश्वास है कि वह चुनाव जीतने जा रही हैं। वायनाड के लोग सोच सकते हैं कि उनके पास संसद के 2 सदस्य हैं- एक मेरी बहन और दूसरा मैं। वायनाड के लोगों के लिए मेरे दरवाजे हमेशा खुले हैं। मैं वायनाड के हर एक व्यक्ति से प्यार करता हूं।”

इस बीच प्रियंका गांधी ने कहा कि वह वायनाड के लोगों को राहुल की कमी महसूस नहीं होने देंगी। प्रियंका ने कहा, “मैं बहुत खुश हूं कि मैं वायनाड के लोगों का प्रतिनिधित्व करने जा रही हूं। मैं वायनाड को इनकी(राहुल गांधी) कमी महसूस नहीं होने दूंगी। हम दोनों रायबरेली में भी मौजूद होंगे और वायनाड में भी।”

इस दौरान राहुल गांधी ने प्रियंका गांधी का एक पुराना नारा ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ का प्रयोग करते हुए कहा कि वह वायनाड से चुनावी मैदान में उतरेंगी।

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राहुल गांधी ने कहा, “मैं समय-समय पर वायनाड का दौरा भी करूंगा। मेरा रायबरेली से पुराना रिश्ता है, मुझे खुशी है कि मुझे फिर से उनका प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलेगा, लेकिन यह एक कठिन निर्णय था।”

प्रियंका गांधी ने कहा, “वायनाड का प्रतिनिधित्व करने को लेकर मुझे काबिल समझने के लिए मैं खुश हूं। मैं वायनाड को राहुल गांधी की अनुपस्थिति महसूस नहीं होने दूंगी। मैं कड़ी मेहनत करूंगी। सभी को खुश करने और अच्छा प्रतिनिधि बनने की पूरी कोशिश करूंगी। मेरा भी रायबरेली और अमेठी से बहुत पुराना रिश्ता है। इस रिश्ते को तोड़ा नहीं जा सकता। मैं भी रायबरेली में अपने भाई की मदद करूंगी। हम दोनों रायबरेली और वायनाड के लिए खड़े रहेंगे।”

इस घोषणा के तुरंत बाद, वायनाड में कई कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए और दक्षिणी राज्य में प्रियंका गांधी का स्वागत करते हुए नारे लगाए।

पार्टी के इस फैसले पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने ख़ुशी जताई। पार्टी महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने कहा, “यह एक बेहतरीन फैसला है। हर कोई इस फैसले से खुश है। राहुल गांधी रायबरेली से सांसद रहेंगे और प्रियंका गांधी वायनाड से चुनाव लड़ेंगी।”

कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “उत्तर प्रदेश की जनता की और हम सभी लोगों की मांग थी कि राहुल गांधी रायबरेली से सांसद रहें। सोनिया गांधी ने रायबरेली के लोगों से कहा था कि मैं अपना बेटा आपको सौंप रही हूं और जनता ने उस बेटे का सम्मान किया। मैं राहुल गांधी को बहुत धन्यवाद और बधाई देता हूं। प्रियंका गांधी निश्चित तौर पर समाज को जोड़ने में कामयाब रहेंगी और कांग्रेस को मजबूत करेंगी।”

कांग्रेस के राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “मैं कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व और राहुल गांधी का धन्यवाद करना चाहता हूं। उन्होंने(राहुल गांधी) ये सही राजनीतिक निर्णय लिया है। इससे दोनों परिवारों का प्रतिनिधित्व होगा। इसके आलावा उन्होंने उत्तर प्रदेश के उस जनादेश का सम्मान भी कर दिया जिसने 80 में से 43 सीटें INDIA गठबंधन को दी थी। प्रियंका गांधी वायनाड से 5 लाख वोटों से जीतकर आएंगी।”

वायनाड के बजाय राहुल ने क्यों चुनी रायबरेली सीट?

इसके पीछे कई कारण हैं। रायबरेली लोकसभा सीट गांधी परिवार का गढ़ है। सोनिया गांधी यहां से लंबे समय कर जीतकर संसद पहुंचती रही हैं। राहुल गांधी के पिता राजीव गांधी अमेठी और परदादा जवाहरलाल नेहरू इलाहाबाद से चुनाव लड़ते रहे हैं। रायबरेली सीट से सोनिया गांधी, दादी इंदिरा और दादा फिरोज गांधी सांसद रह चुके हैं। राजनीति के लिहाज से यूपी बहुत अहम राज्य है। इस बार रायबरेली के साथ-साथ कांग्रेस ने अमेठी भी वापस ले ली है। लिहाजा पार्टी संगठन को मजबूत करने और यूपी की राजनीति में वापसी करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व चाहता था कि राहुल रायबरेली से सांसद बने रहे। लिहाजा उन्होंने वायनाड के बजाय रायबरेली को चुना।

कांग्रेस के इस फैसले के बाद भाजपा ने सबसे पुरानी पार्टी पर ”वंशवादी राजनीति” में शामिल होने का आरोप लगाया। भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “कांग्रेस कोई पार्टी नहीं बल्कि एक पारिवारिक कंपनी है ये आज सिद्ध हो गया। राहुल गांधी इस बात को समझ गए हैं कि समाजवादी पार्टी के बल पर उत्तर प्रदेश की जो कुछ सीटों पर उन्हें(कांग्रेस) जीत मिल गई है, उन सीटों पर उपचुनाव करवाने से उनकी सीट पर खतरा आ सकता है। वहां पर भाजपा तुरंत चुनाव के बाद मजबूत हो चुकी है। वायनाड की जनता के साथ ये बहुत बड़ा धोखा है। ये बात भी स्पष्ट हो गई है कि परिवार की राजनीतिक विरासत बेटे के हाथ में रहेगी।”

भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने कहा, “जिस वायनाड ने उन्हें अमेठी से हारने के बाद बचाया, जिस वायनाड ने उन्हें सदन भेजा, उस वायनाड को वे छोड़ रहे हैं। वायनाड सीट के बाद रायबरेली की घोषणा तब तक नहीं की गई जब तक रायबरेली का चुनाव नहीं हो गया। उनके(राहुल गांधी) मन में यदि अपनी बहन के प्रति इतना ही प्यार था तो वे रायबरेली की सीट उन्हें(प्रियंका गांधी) दे देते, वायनाड से खुद सांसद रहते।”

भाजपा राज्यसभा सांसद दिनेश शर्मा ने कहा, “वे (राहुल गांधी) जानते हैं कि यदि उन्होंने रायबरेली से इस्तीफा दिया तो दोबारा जीतने की स्थिति नहीं है। इसलिए उत्तर प्रदेश से डर गए। प्रियंका गांधी कहती थीं कि ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’, अगर लड़ सकती हैं तो वो आएं, उत्तर प्रदेश से चुनाव लड़ें। ये दोनों भाई-बहन केवल अपनत्व का झांसा देते हैं। वायनाड की जनता भी जाग्रत होगी और प्रियंका गांधी के जीवन का जो पहला चुनाव होगा वो हार के साथ शुरू होगा।”

मालूम हो कि 52 वर्षीय प्रियंका गांधी के नाम की अटकलें अमेठी, रायबरेली और वाराणसी सहित कई संसदीय सीटों के लिए कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में लगाई गई थीं। हालाँकि, अब वह अंततः केरल के वायनाड के सुरक्षित वातावरण से चुनावी राजनीति में पदार्पण करेंगी। गौरतलब है कि अगर प्रियंका लोकसभा उपचुनाव जीतती हैं तो यह पहली बार होगा कि गांधी परिवार के तीन सदस्य संसद में होंगे।

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