कर्नाटक चुनाव में हार के बाद बीजेपी हार की वजह को समझने के लिए समीक्षा कर रही है। लेकिन इस बीच राज्य में बदलाव की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। प्रदेश अध्यक्ष बदले जाने की संभावना है वही किसी नए चेहरे को पार्टी के विधायक दल का नेता बनाए जाने की खबर है ।
बीजेपी कर्नाटक में बुरी तरह चुनाव हारी है और अब समीक्षा का समय हैं। पार्टी हार को लेकर मंथन कर रही है। लेकिन सबसे बड़ी वजह जो समझ में आई है वो ये है कि पार्टी क्षेत्रीय क्षत्रपो को नकार नही सकती है। लिहाजा अब बीजेपी अपनी रणनीति बदल सकती है।
सूत्रो से मिली जानकारी के मुताबिक बीजेपी अब इन राज्यों में, क्षेत्रीय क्षत्रपो को ज्यादा तवज्जो देने की सोच रही है। जिस राज्य में बीजेपी के स्थानीय नेता मजबूत नही है, उन राज्यों में सामूहिक लीडरशिप में पार्टी जाएगी।लेकिन बीजेपी का मनाना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सभाओं में केन्द्र सरकार की उपलब्धियो और राष्ट्रीय मुद्दोंको उठाते रहेंगे।
चुनाव परिणामों ने केंद्रीय नेतृत्व को परेशानी में डाल दिया है। लेकिन इस बीच कर्नाटक में क्षेत्रीय स्तर पर बदलाव की खबर आ रही है। सूत्रों के हवाले से खबर है कि हार की जिम्मेदारी लेते हुए कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष नलिन कुमार कतील ने पद से इस्तीफे की पेशकश की है। सूत्रों के मुताबिक केंद्रीय मंत्री शोभा करंदलाजे अगले प्रदेश अध्यक्ष बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। वही विपक्ष का नेता कौन होगा,इसको लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
खबर ये भी है कि 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए कर्नाटक में बीजेपी और जेडीएस के बीच गठबंधन हो सकता है। जेडीएस ने चार लोकसभा सीटो की मांग की है। जेडीएस के साथ गठबंधन पर बीजेपी जल्द फैसला ले सकती है।
दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन महासचिव बीएल संतोष, महासचिव सुनील बंसल और उपाध्यक्ष सौदान सिंह ने एक बैठक में संगठन में ख़ाली पदों को भरने, सरकार के 9 साल के चल रहे कार्यक्रमों की समीक्षा और पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव की तैयारियों पर चर्चा की है। कुछ महत्वपूर्ण राज्यों के प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जा सकते हैं।
कर्नाटक के बाद बीजेपी का फोकस पांच राज्यों में शिफ्ट होने जा रहा है। कर्नाटक के बाद बीजेपी का हिंदी पट्टी के अहम राज्य मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांगेस के साथ सीधा मुकाबला है। इन तीनों राज्यों में एकमात्र मध्यप्रदेश में बीजेपी की सरकार है। बाकी दोनों जगह पार्टी विपक्ष की भूमिका है। बीजेपी की कोशिश है कि 2023 में वह तीनों राज्यों में फिर से सत्ता पर काबिज हो सके ताकि कर्नाटक के हार का गम कम हो सके।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि भाजपा को अगला चुनाव जीतने के लिए क्षेत्रीय मुद्दों को अपना प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाते हुए अपने क्षेत्रीय नेतृत्व को मजबूत करने की जरूरत है।
