सुप्रीम कोर्ट ने जाति जनगणना पर पटना HC के आदेश पर रोक लगाने से किया इनकार

उच्चतम न्यायालय ने बिहार में जाति आधारित सर्वेक्षण पर अंतरिम रोक लगाने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से गुरुवार को इनकार कर दिया है। पीठ ने बिहार सरकार के इस तर्क पर गौर किया कि मामला उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित है। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया- “डेटा की मेजबानी कौन कर रहा है? हम अभ्यास की प्रकृति को देखेंगे, चाहे वह सर्वेक्षण हो या जनगणना।” सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर पटना हाई कोर्ट तय समय पर सुनवाई नही करता है तो याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट आ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले पर 14 जुलाई को सुनवाई करेगा।

11 मई को बिहार सरकार ने बिहार में जाति-आधारित सर्वेक्षण पर पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया था। उच्च न्यायालय के चार मई के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में दायर अपील में राज्य सरकार ने कहा कि रोक लगाने से पूरी प्रक्रिया पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

इससे पहले पटना उच्च न्यायालय ने 9 मई को बिहार सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें राज्य में जाति आधारित सर्वेक्षण पर अंतरिम रोक की जल्द सुनवाई की मांग की गई थी। उच्च न्यायालय ने सुनवाई के लिए तीन जुलाई की तारीख तय की थी और स्पष्ट किया था कि तब तक यह रोक प्रभावी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार के वकील से पूछा कि क्या आप आज ही बहस पूरी करना चाहते हैं? बिहार सरकार का पक्ष रहे वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा – हां।सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमें यह देखना है कि यह सर्वे है या फिर जनगणना।

सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी विशेष अनुमति याचिका में बिहार सरकार ने कहा, “जाति सर्वेक्षण पर रोक, जो पूरा होने के कगार पर है, राज्य को अपूरणीय क्षति पहुंचाएगा और पूरी कवायद पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा।”

बिहार सरकार ने अपनी याचिका में कहा गया है- “राज्य पहले ही सर्वेक्षण कार्य का 80 प्रतिशत से अधिक पूरा कर चुका है। कुछ जिलों में 10 प्रतिशत से कम काम लंबित है। पूरी मशीनरी जमीनी स्तर पर है। जाति आधारित डेटा का संग्रह अन्य प्रावधानों के अलावा अनुच्छेद 15 और 16 के तहत एक संवैधानिक आदेश है।”

राज्य सरकार ने आगे कहा कि सर्वेक्षण पूरा करने के लिए समय अंतराल अभ्यास पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा क्योंकि यह समसामयिक डेटा नहीं होगा।

मालूम हो कि बिहार में जाति सर्वेक्षण का पहला दौर 7 से 21 जनवरी के बीच आयोजित किया गया था। दूसरा दौर 15 अप्रैल को शुरू हुआ था और 15 मई तक जारी रहने वाला था।

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