कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर 7 फरवरी को की गई अपनी टिप्पणी को लेकर लोकसभा सचिवालय को विशेषाधिकार हनन नोटिस का जवाब भेज दिया है। इस मामले से परिचित कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी का जवाब व्यापक है और इन-हाउस कानूनी विशेषज्ञों द्वारा इसका पुनरीक्षण किया गया है।
लोकसभा अधिकारियों के अनुसार, जवाब की जांच सचिवालय के विशेषाधिकार अनुभाग द्वारा की जाएगी और उचित कार्रवाई के लिए लोकसभा अध्यक्ष के कार्यालय को भेजी जाएगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि बुधवार दोपहर तक राहुल का जवाब अध्यक्ष के कार्यालय में नहीं पहुंचा था।
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि राहुल गांधी द्वारा दिया गया जवाब पूरी तरह से गोपनीय है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी ने सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए तथ्यों और मिसाल के आधार पर जवाब दिया है। मालूम हो कि विशेषाधिकार नोटिस के जवाब की आखिरी तारीख 15 फरवरी थी।
बता दें कि राहुल गांधी के संसद में दिए गए भाषण के खिलाफ लोकसभा स्पीकर से शिकायत की गईं थी। 7 फरवरी को राहुल गांधी पर आरोप लगाया गया कि कि उन्होंने लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ गलत, असंसदीय और भ्रामक तथ्य पेश किए। इसे लेकर राहुल गांधी के खिलाफ निशिकांत दुबे ने विशेषाधिकार हनन नोटिस दिया था। निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा कि, ‘कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में बगैर किसी प्रूफ के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए। उनके आरोप गलत थे’। उसके बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर 15 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा था।
वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भी लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखा था और अनुरोध किया था कि नियम 380 के तहत राहुल गांधी के कुछ असंसदीय, असम्मानीय आरोपों को सदन की कार्यवाही से निकाल दिया जाए। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि राहुल गांधी ने सदन को आश्वासन दिया था कि वह अपने दावों के लिए दस्तावेजी साक्ष्य पेश करेंगे, लेकिन गांधी ने ऐसा कोई भी साक्ष्य सदन के पटल पर नहीं रखा।
वहीं निशिकांत दुबे ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र भी लिखा और लिखकर कहा कि, ‘कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में बगैर किसी प्रूफ के प्रधानमंत्री पर आरोप लगाए। उनके आरोप गलत थे’। उसके बाद लोकसभा सचिवालय ने राहुल गांधी को नोटिस जारी कर 15 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के लिए कहा था।
राहुल ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा में अपने भाषण के दौरान अडानी समूह पर हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया था। राहुल ने पीएम मोदी पर आरोप लगाया था कि उनके विदेश दौरों के बाद ही गौतम अडानी को बाहरी देशों में काम के कॉन्ट्रैक्ट मिले। राहुल ने पूछा था- ‘पीएम के विदेश दौरों के दौरान कितनी बार अडानी या उनकी कंपनी के लोग विदेश यात्राओं पर गए हैं’?
