कांग्रेस ने बजट पर उठाया सवाल, पूछा- ‘बेरोजगारी, गरीबी को दरकिनार कर बजट किसके लिए बनाया है’?

कांग्रेस नेता और प्रवक्ता गौरव वल्लभ ने वित्त वर्ष 2023-24 के लिए पेश हुए बजट पर कई सवाल उठाये हैं। उन्होंने सरकार से पूछा है कि बजट भाषण में वित्त मंत्री ने बेरोजगारी, गरीबी, आर्थिक असमानता जैसे शब्द का ना के बराबर प्रयोग कर क्या बताने की कोशिश की है? गौरव वल्लभ ने कहा कि इस बजट में भारत की आर्थिक समस्याओं और उन समस्याओं के निवारण का जिक्र तक नहीं किया गया है। कांग्रेस नेता ने बताया कि वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में सिर्फ दो बार गरीब शब्द का प्रयोग किया। इससे साफ़ जाहिर होता है कि सरकार का ये बजट किसके लिए बनाया गया है और इसका फोकस किस तरफ है।

कांग्रेस नेता गौरव बल्लभ ने जीडीपी के आंकड़ों के बारे में बात करते हुए कहा कि, ‘वर्ष 2021-22 में देश की जीडीपी 2,32,14,703 करोड़ रुपए थी और नॉमिनल ग्रोथ 11.1 प्रतिशत रहने की उम्मीद जताई गई थी। कांग्रेस नेता ने कहा कि वित्त मंत्री के मुताबिक़ वर्ष 2022-23 की जीडीपी 258 लाख करोड़ रुपए होनी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने उस आंकड़े को रिवाइज किया और फिर नया आंकड़ा 236.64 लाख करोड़ रुपए का बताया। वित्त मंत्री ने इस बार के बजट भाषण में वर्ष 2022-23 की जीडीपी 273 लाख करोड़ बताई है। इस हिसाब से अगर हम देखें तो नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ जो 15.4 प्रतिशत होता है, उसके मुताबिक रियल जीडीपी कम से कम डबल डिजिट में होनी चाहिए। लेकिन वित्त मंत्री ने जीडीपी ग्रोथ 7 प्रतिशत तक ही बताया है। मेरा सरकार से सवाल है कि ये 7 प्रतिशत ही क्यों है, क्योंकि बजट के रियल नॉमिनल जीडीपी के नंबर के अनुसार ये ज्यादा होना चाहिए था’।

कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर पर भी सवाल उठाया और कहा कि, ‘मौजूदा वित्तीय वर्ष में 10,67,889 करोड़ का जो एस्टिमेट किया गया था वो रिवाइजड होकर 10,53,862 करोड़ हुआ। इसका मतलब ये है कि जो पूंजीगत खर्चा सरकार करना चाहती थी, वो पूरा नहीं हो सका’। गौरव बल्लभ ने पूछा कि, ‘सवाल ये है कि जब प्राइवेट इन्वेस्टमेंट गिर रहा है, एक्सपोर्ट गिर रहे हैं, प्राइवेट कंजम्पशन स्थिर बना हुआ है, जो कैपिटल एक्सपेंडिचर है, वो गिर रहा है, तो 7 प्रतिशत की जीडीपी आपने कैसे अचीव की? इसका स्पष्टीकरण देना चाहिए।

कांग्रेस नेता गौरव बल्लभ ने जीडीपी ग्रोथ को लेकर बताया कि, ‘मौजूदा वित्त वर्ष के 2 पहले क्वार्टर में साढ़े तेरह प्रतिशत और 6.3 प्रतिशत की ग्रोथ थी तो इस हिसाब से तो पहली छमाही में देश की जीडीपी ग्रोथ रेट हुई 9.9 प्रतिशत। अब बात करते हैं क्वार्टर थ्री और क्वार्टर फोर की। अगर 7 प्रतिशत की जीडीपी ग्रोथ के अनुसार ही आगे बढ़ते हैं तो तो आने वाले जो क्वार्टर थ्री और क्वार्टर फोर में ग्रोथ 4 से साढ़े चार प्रतिशत होगी। इसका मतलब यह हुआ कि मौजूदा वित्त वर्ष में क्वार्टर दर क्वार्टर देश की जीडीपी ग्रोथ रेट गिरी है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले क्वार्टर में 13.5 प्रतिशत, दूसरे क्वार्टर में 6.3 प्रतिशत, तीसरे क्वार्टर में 4 से साढ़े चार प्रतिशत के बीच और चौथ में भी यही है’।

कांग्रेस नेता ने सरकार द्वारा देश की प्रमुख स्कीम में किए जा रहे खर्च पर भी सवाल उठाया और बताया कि सरकार देश की प्रमुख स्कीम में जितना खर्चा करने का सोचती है, उतना खर्च भी नहीं कर पाती है। इसका उदाहरण पेश करते हुए गौरव बल्लभ ने कहा कि कृषि पर सरकार ने 83 हजार 521 करोड़ रुपए खर्च करने का सोचा था लेकिन इसको रिवाइज कर 76,279 करोड़ कर दिया गया। पीएम किसान पर 68 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का बजटरी एस्टिमेट था, जबकि वास्तविक खर्च हुआ 60 हजार करोड़। एजुकेशन पर, 1,04,278 हजार करोड़ रुपए खर्च करने का एस्टिमेट था, खर्च किया मात्र 99,881 करोड़। हेल्थ पर 86,606 करोड़ की जगह 76,351 करोड़ ही खर्च हुआ। इसी तरह सामाजिक वेलफेयर पर 51,780 की जगह 46,502 करोड़, शहरी विकास पर 76,550 करोड़ की जगह 74,546 करोड़, डेवलपमेंट फॉर दी एससी कम्युनिटी में 8,710 करोड़ की जगह मात्र 7,722 करोड़ खर्च किए गए। सरकार ने शेड्यूल ट्राईब के विकास पर 4,111 करोड़ रुपए खर्च करने का सोचा था लेकिन खर्च किया मात्र 3,874 करोड़। माइन्योरिटी के डेवलपमेंट पर बजटरी एलोकेशन 1,810 करोड़ का था लेकिन खर्च किया मात्र 530 करोड़ रुपए। वलनेरेबल ग्रुप पर 1,929 करोड रुपए खर्च करने का बजटरी एस्टिमेट था, लेकिन इसे रिवाइज करके 1,821 करोड़ कर दिया गया।

कांग्रेस नेता ने बताया कि सरकार ने राज्यों को केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले डेवोल्यूशन की रकम जो 3,34,339 करोड़ थी उसे भी काम करके 2,70,936 करोड़ कर दिया। इस तरह 64000 करोड़ रुपए जिस पर राज्यों का जो हक था, वो उनसे छीन लिया गया।

टैक्स को लेकर कांग्रेस नेता ने कहा कि, ‘इस बार के बजट में टैक्स में कोई कोई बड़ी कटौती नहीं की गई। उन्होंने कहा कि सरकार ने सिर्फ न्यू टैक्स रिजीम में छोटा सा मार्जिनल फेरबदल कर दिया है। जो इनडायरेक्ट टैक्स हैं, उसमे भी कटौती नहीं की गई’। उन्होंने कहा कि पेट्रोल, डीजल, सीमेंट, फर्टिलाइजर के दामों को लेकर कुछ नहीं बताया गया है।

कांग्रेस नेता ने कहा कि देश के अधिकांश लोगों के लिए ये बजट उनकी आकांक्षाओं, इच्छाओं और उनकी उम्मीदों पर बिल्कुल भी खरा नहीं उतरा है क्योंकि विश्व में आने वाली संभावित मंदी को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण या बजट स्पीच में कोई योजना नहीं हैं। आम आदमी को इस बजट से सिर्फ और सिर्फ निराशा और हताशा हाथ लगी है। देश के गरीब, युवा, माताएं, बहनें, गृहणियां- किसी को भी इस बजट से कोई फायदा नहीं हुआ है।

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