बलिया में भी किसानों ने नई कृषि कानून की प्रितियों को किया आग के हवाले किया और विरोध जताया

बलिया, संतोष सिंह : बलिया कलेक्ट्रेट परिसर मे, संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में, किसान विरोधी, तीनो काले कृषि कानूनो की प्रतियां जलाई गई।विविध किसान संगठनों से आये नेताओं ने कहा महीनों से देश के कोने कोने से पहुँचे किसान लाखों की तादाद में दिल्ली की सीमाओं पर, कड़ी ठंड में महीनों से डटे हुए हैं और तीनों कानूनो के खात्मे की मांग कर रहे हैं लेकिन कारपोरेट घरानों से पोषित जो भ्रष्टाचार मे आकंठ डूबी सरकार दर्जनों संसोधनों का प्रस्ताव लाकर किसानों को ग़ुमराह कर रही है।

बलिया में कृषि कानूनों को जलाते किसान संगठन

सरकार कॉरपोरेट्स के पक्ष में, किसानों से लुक छिप का खेल, खेल रही है वह किसान आंदोलन को तोड़ने का षडयंत्र कर रही है। किसानों को थकाने के लिये वार्ता दर वार्ता करती हुई समय काट रही है। लोगों ने कहा कि इस कानून में कृषि उत्पाद के रेट तय करने का अधिकार कम्पनियों को देता है तथा सरकार को ,किसानों के प्रति संवैधानिक जिम्मेदारियों से मुक्त करता है।इतना ही नहीं, यह जमाखोरों को पैदा करने की नर्सरी है।

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यह राशन की दुकानों को खतम करने का सरकारी षड्यंत्र है,क्योंकि जब सरकार अनाज नही खरीदेगी तो एफ सी आई भी समाप्त हो जायेगी।इतना ही नहीं, यह कानून किसी भी बैंक से कम्पनियों को कर्ज लेने की छूट देता है जिससे देश मे विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकशी जैसे भगोड़े पैदा होंगे जिससे अस्सी प्रतिशत किसान भूखों मरने को विवश होंगे।

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जनार्दन सिंह,लक्ष्मण पाण्डेय,रामकृष्ण यादव,तेजनारायण, परमात्मा नन्द राय,सत्यप्रकाश सिंह,संतोष सिंह, बलवन्त यादव,सूर्यप्रकाश सिंह,ओ पी सिन्हा, रणजीत सिंह,राजकुमार मौर्य,अरविंद गोंडवाना,सुशांत राज,अनिल यादव,अवधेश सिंह आदि दर्जनों लोग मौजूद थे।

 

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