व्यापारिक विवादों और नीतिगत मतभेदों के कारण द्विपक्षीय संबंधों में तनाव जारी रहने के बावजूद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर बधाई देते हुए भारत और अमेरिका को “ऐतिहासिक बंधन” से जुड़े साझेदार बताया। नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास द्वारा साझा किया गया ट्रंप का यह संदेश ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच टैरिफ, आव्रजन और रणनीतिक मतभेदों को लेकर संबंध अस्थिर हैं।
ट्रंप ने कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका की जनता की ओर से, मैं भारत सरकार और जनता को उनके 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर हार्दिक बधाई देता हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका और भारत दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते एक ऐतिहासिक बंधन साझा करते हैं।”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी शुभकामनाएं देते हुए प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात कही।
रुबियो ने कहा, “रक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और उभरती प्रौद्योगिकियों में हमारे घनिष्ठ सहयोग से लेकर क्वाड के माध्यम से हमारी बहुआयामी भागीदारी तक, अमेरिका-भारत संबंध हमारे दोनों देशों और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए वास्तविक परिणाम दे रहे हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “आगामी वर्ष में हमारे साझा उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर काम करने की मुझे आशा है।”
रूबियो की टिप्पणियों ने मौजूदा मतभेदों के बावजूद नई दिल्ली के साथ सुरक्षा और आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर वाशिंगटन के फोकस को रेखांकित किया।
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में भाग लिया और इस अनुभव को द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती का प्रतीक बताया।
गोर ने कहा, “भारत को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं! भारत के संविधान और लोकतांत्रिक भावना का उत्सव मनाने वाली गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार शामिल होकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।”
उन्होंने आगे कहा, “भारतीय आकाश में अमेरिकी निर्मित विमानों को उड़ते हुए देखना रोमांचित है, जो अमेरिका-भारत रणनीतिक साझेदारी की मजबूती का एक सशक्त प्रतीक है।”
परेड के दौरान हवाई प्रदर्शन में अमेरिकी मूल के परिवहन विमान सी-130जे और अपाचे हेलीकॉप्टर शामिल थे।
मालूम हो कि गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएँ ऐसे समय में दी गईं जब ट्रंप प्रशासन द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत तक का शुल्क लगाने के बाद दोनों देशों के संबंधों में भारी गिरावट आई थी। इस शुल्क में भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद से जुड़ा 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी शामिल था।
इन उपायों से नई दिल्ली में कड़ी प्रतिक्रिया हुई और दोनों देशों के बीच व्यापार बाधित हुआ।
दोनों पक्षों ने पिछले वर्ष प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कई दौर की बातचीत की। हालांकि, बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, जिसका मुख्य कारण भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों तक अधिक पहुंच की वाशिंगटन की मांग थी।
व्यापारिक विवादों के अलावा, कई अन्य मुद्दों पर भी संबंधों में तनाव रहा है, जिनमें पिछले साल मई में ट्रंप द्वारा भारत-पाकिस्तान संघर्ष को समाप्त करने का दावा और कुशल भारतीय कामगारों को प्रभावित करने वाली वाशिंगटन की संशोधित आव्रजन नीतियां शामिल हैं।
राजनयिक सूत्रों ने कहा कि रणनीतिक और रक्षा स्तर पर मजबूत सहयोग के बावजूद, इन मतभेदों ने संबंधों को फिर से स्थापित करने के प्रयासों को जटिल बना दिया है।
