आलोचनाओं के बीच सैम पित्रोदा ने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से दिया इस्तीफा

कांग्रेस नेता सैम पित्रोदा ने इंडियन ओवरसीज कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है और उनका इस्तीफा पार्टी ने स्वीकार भी कर लिया है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि सैम पित्रोदा ने “अपनी मर्जी से” इंडियन ओवरसीज कांग्रेस प्रमुख पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है। पित्रोदा अपनी उस विवादास्पद टिप्पणी को लेकर आलोचनाओं का सामना कर रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि पूर्व में भारतीय चीनियों जैसे दिखते हैं जबकि दक्षिण में लोग अफ्रीकियों जैसे दिखते हैं।

द स्टेट्समैन के साथ एक साक्षात्कार के दौरान पित्रोदा ने कहा था, “हम भारत जैसे विविधता वाले देश को एक साथ रख सकते हैं – जहां पूर्व में लोग चीनी जैसे दिखते हैं, पश्चिम में लोग अरब जैसे दिखते हैं, उत्तर में लोग शायद गोरे दिखते हैं, और दक्षिण में लोग अफ्रीकियों की तरह दिखते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम सभी भाई-बहन हैं।”

उन्होनें कहा था, “भारत में अलग-अलग महजब के लोग रहते हैं, उनकी विभिन्न किस्म की पोषाकें हैं, उनका रहन-सहन अलग अलग है, यही भारत है। यही भारत की दुनिया में पहचान है। यहां हर किसी के लिए रहने की जगह है। हर कोई समझौता करते चलता है। मैं तमिलनाडु जाता हूं तो वहां मुझे लोकल भाषा का सामना करना पड़ता है लेकिन हमें कोई परेशानी नहीं होती। हम होटल, बाजार में आसानी से अपना काम करते हैं।”

कांग्रेस ने तुरंत पित्रोदा की टिप्पणियों से दूरी बना ली और उन्हें “अस्वीकार्य” करार दिया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट कर कहा, “भारत की विविधता को दर्शाने के लिए की गई तुलना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और अस्वीकार्य हैं। कांग्रेस इनसे खुद को पूरी तरह से अलग करती है।”

भाजपा ने भी पित्रोदा की टिप्पणियों को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा और उन्हें ”नस्लवादी और विभाजनकारी” करार दिया।

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा, “यह कांग्रेस की सोची-समझी रणनीति होती है। सैम पित्रोदा ने देश को अपमानित किया, PM मोदी को अपमानित किया। जब देश आक्रोशित होता है तो वे(कांग्रेस) पद से हटाते हैं। राहुल गांधी और सोनिया गांधी को इस बयान के लिए माफी मांगनी चाहिए।”

वहीं केंद्रीय मंत्री व अमेठी से भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने कहा, “वे(सैम पित्रौदा) जीवन भर गांधी परिवार के सलाहकार रहे हैं। सलाह कोई पत्र देकर नहीं दी जाती है, जीवन भर साथ रह कर दी जाती है। वे(राहुल गांधी) स्वयं उन्हें(सैम पित्रौदा) अंकल कहते हैं ना। अंकल कहते हैं तो मतलब रिश्ता है। रिश्ता कहां तोड़ा गांधी परिवार ने?”

इससे पहले सैम पित्रोदा ने भारत में अमेरिकी शैली के विरासत कर की वकालत करते हुए एक विवाद खड़ा कर दिया था। कुछ अमेरिकी राज्यों में विरासत कर की अवधारणा पर विस्तार से बताते हुए पित्रोदा ने कहा था, “अगर किसी के पास 100 मिलियन डॉलर की संपत्ति है और जब वह मर जाता है तो वह केवल 45% अपने बच्चों को हस्तांतरित कर सकता है, 55% सरकार द्वारा ले लिया जाता है। यह एक दिलचस्प कानून है। यह कहता है कि आपने अपनी पीढ़ी में संपत्ति बनाई और अब आप जा रहे हैं, आपको अपनी संपत्ति जनता के लिए छोड़नी चाहिए, पूरी नहीं, आधी, जो मुझे अच्छी लगती है। ”

उन्होंने आगे कहा था, “भारत में, आपके पास ऐसा नहीं है। अगर किसी की संपत्ति 10 अरब है और वह मर जाता है, तो उसके बच्चों को 10 अरब मिलते हैं और जनता को कुछ नहीं मिलता… इसलिए ये ऐसे मुद्दे हैं जिन पर लोगों को बहस और चर्चा करनी होगी।”

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