भारतीय वायु सेना ने सोमवार को औपचारिक रूप से भारत के पहले एयरबस सी-295 मध्यम सामरिक परिवहन विमान को अपने बेड़े में शामिल किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर C-295 MW परिवहन विमान को भारतीय वायु सेना में शामिल किया। विमान को सेना में शामिल करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह C-295 MW पर स्वास्तिक भी बनाया। इससे पहले 20 सितंबर को C-295 विमान गुजरात के वडोदरा में उतरा था।
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इस एयरक्राफ्ट की सबसे खास बात ये है कि एयरक्राफ्ट एक किलोमीटर से भी छोटे रनवे से उड़ान भर सकता है। जबकि लैंडिग के लिए तो इसे केवल 420 मीटर का रनवे ही चाहिए। इसका मतलब ये है कि अभी दुर्गम पहाड़ी इलाकों और आयलैंड पर भी एयरफोर्स सीधे सैनिकों को उतार पाएगी।
वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी को 13 सितंबर को 56 सी-295 परिवहन विमानों में से पहला विमान मिला था। सरकार ने दो साल पहले 21,935 करोड़ रुपए में 56 सी-295 एयरक्राफ्ट खरीदने का समझौता एयरबस स्पेस एंड डिफेंस कंपनी के साथ किया था। इनमें से 16 विमान स्पेन से आने हैं, जबकि 17वां विमान खुद देश में बनाया जाएगा। इस विमान को भारत में बनाने के लिए एयरबस और टाटा के बीच समझौता हो चुका है।
पिछले साल 31 अक्टूबर को अपने वडोदरा दौरे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया था। वडोदरा में एयरबस के साथ साझेदारी में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने जो सेटअप तैयार किया है, उसमें 40 विमान बनाए जाएंगे। जबकि एयरबस स्पेन में अपने सेटअप से 16 तैयार विमान भारत को सप्लाई करेगा।
इन विमानों के घटकों का उत्पादन हैदराबाद में मुख्य संविधान सभा (एमसीए) सुविधा में पहले ही शुरू हो चुका है। इन हिस्सों को वडोदरा में फाइनल असेंबली लाइन (एफएएल) में भेज दिया जाएगा, जिसके नवंबर 2024 तक चालू होने की उम्मीद है।
पिछले साल अक्टूबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वडोदरा में 295 विमानों की विनिर्माण सुविधा की आधारशिला रखी थी। यह किसी निजी कंसोर्टियम द्वारा भारत में निर्मित होने वाला पहला सैन्य विमान होगा।
भारतीय वायुसेना छह दशक पहले सेवा में आए पुराने एवरो-748 विमानों के अपने बेड़े को बदलने के लिए सी-295 विमान खरीद रही है।
सी-295 को एक बेहतर विमान माना जाता है जिसका उपयोग 71 सैनिकों या 50 पैराट्रूपर्स तक के सामरिक परिवहन के लिए और उन स्थानों पर रसद संचालन के लिए किया जाता है जो वर्तमान भारी विमानों के लिए पहुंच योग्य नहीं हैं। ये विमान पैराट्रूप और सामान गिरा सकता है, और इसका उपयोग केजुएल्टी या चिकित्सा निकासी के लिए भी किया जा सकता है। यह विशेष अभियानों के साथ-साथ आपदा प्रतिक्रिया और समुद्री गश्ती कर्तव्यों को पूरा करने में सक्षम है।
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने केंद्रीय मंत्री जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह और भारतीय वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी के साथ गाजियाबाद में हिंडन एयरबेस पर भारत ड्रोन शक्ति-2023 प्रदर्शनी भी देखी। सिंह ने भारत ड्रोन शक्ति-2023 प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
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