राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक समाज में भेदभाव मौजूद है। उन्होंने कहा कि आरएसएस संगठन “संविधान में दिए गए आरक्षण का पूरी तरह से समर्थन करता है।”
महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा, हमने अपने ही साथी मनुष्यों को सामाजिक व्यवस्था में पीछे रखा। हमने उनकी परवाह नहीं की और ये सिलसिला 2000 साल तक चलता रहा। जब तक हम उन्हें समानता प्रदान नहीं करते, तब तक कुछ विशेष उपाय करने होंगे और आरक्षण उनमें से एक है। अत: आरक्षण तब तक जारी रहना चाहिए जब तक ऐसा भेदभाव हो। हम आरएसएस में संविधान में दिए गए आरक्षण को पूरा समर्थन देते हैं।”
भागवत ने बताया कि 2000 से अधिक वर्षों से समाज के कुछ वर्गों की उपेक्षा की गई और उन्हें सामाजिक व्यवस्था में पीछे छोड़ दिया गया।
उन्होंने कहा, “अगर समाज के कुछ वर्गों को 2000 वर्षों तक भेदभाव का सामना करना पड़ा, तो हम (जिन्हें भेदभाव का सामना नहीं करना पड़ा) अगले 200 वर्षों तक कुछ परेशानी क्यों स्वीकार नहीं कर सकते?”
उन्होंने तर्क दिया कि जब तक इन समुदायों को समान अवसर प्रदान नहीं किए जाते, तब तक आरक्षण जैसे विशेष उपाय आवश्यक हैं।
संयोग से आरक्षण पर भागवत का बयान ऐसे समय आया है जब आरक्षण के लिए मराठा समुदाय का आंदोलन एक बार फिर तेज हो गया है।
कार्यक्रम में, भागवत ने उन दावों के बारे में एक सवाल का भी जवाब दिया कि आरएसएस ने 1950 से 2002 तक नागपुर के महल में अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया था। भागवत ने कहा, “हर साल 15 अगस्त और 26 जनवरी को हम जहां भी हों, राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं। नागपुर में महल और रेशिमबाग में हमारे दोनों परिसरों में ध्वजारोहण होता है। लोगों को हमसे यह सवाल नहीं पूछना चाहिए।”
