बिहार के भागलपुर में निर्माणाधीन पुल गिरा, मुख्यमंत्री ने दिए जांच के आदेश; विपक्ष हमलावर

बिहार के भागलपुर में एक निर्माणाधीन पुल गिर गया। पल गिरने के दृश्य कैमरे में कैद हो गए और इसके दो हिस्से एक के बाद एक गिरते हुए दिखाई दिए। अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। 1,717 करोड़ रुपये की लागत से अगुवानी सुल्तानगंज गंगा पुल का निर्माण किया जा रहा था।

यह हादसा रविवार शाम करीब छह बजे हुआ। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने को कहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पुल निर्माण निगम से रिपोर्ट भी मांगी है। सीएम नीतीश कुमार ने कहा कि कल जो पुल गिरा था वह पिछले साल भी टूटा था। मैंने अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। इसका निर्माण सही ढंग से नहीं हो रहा है, जिससे यह बार-बार गिर रहा है। विभाग इस पर गौर करेगा और कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट के मुताबिक पुल का कम से कम 3 फीट का हिस्सा नीचे गंगा नदी में गिर गया। अप्रैल में आए तूफान के कारण पुल को कुछ नुकसान भी हुआ था। इस पुल का मध्य भाग खगड़िया, अगुवानी और सुल्तानगंज के बीच गंगा नदी पर बनाया जा रहा था। पुल का एक हिस्सा दो साल पहले भी गिर गया था।

बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने कहा कि जब इससे पहले भी पुल गिरने की घटना हुई थी, तब भी हम आशंका में थे कि हमें सभी सेगमेंट की जांच करानी चाहिए। रिव्यू मीटिंग भी की गई। IIT रुड़की ने 30 अप्रैल 2022 में पुल गिरने का कारण आंधी तूफान बताया। हमें इसके डिजाइन में पहले से ही फॉल्ट था, इसे पूरे तरीके से ध्वस्त करके फिर से कार्य प्रारंभ करने का हमारा निर्णय था।

एसीएस सड़क निर्माण विभाग प्रत्यय अमृत ने बताया है कि, ‘हम पहले क्लीयर थे कि इस ब्रिज को नए सिरे बनाने में किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा, IIT रुड़की की एक रिपोर्ट आ गई है इस मामले में पूरी रिपोर्ट आ जाएगी। इस कार्य के लिए संवेदक के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।’

पुल गिरने को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने बिहार के सीएम नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा है। बिहार के नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि नीयत में जब खोट होगा तो नीति कैसे सफल होगी। एक बार सुलतानगंज के तरफ पुल गिरा था और आज खगड़िया की ओर गिरा है। कई पुल पुर्णिया में भी गिरे हैं, बिहार के अंदर यह कमीशनखोरी की प्रथा गुणवत्ता विहीन काम चरम पर है। जिसकी छवि दिखाई दे रही है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा कि पुल गिरने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पुल भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया, इसकी जांच होनी चाहिए। बिहार सरकार धृतराष्ट्र की तरह आंख बंद न कर सभी पुल की सुरक्षा जांच कराएं।

उपेंद्र कुशवाहा ने ट्वीट कर कहा- ’23 फ़रवरी 2014 को आदरणीय मुख्यमंत्री श्जी के कर कमलों से शिलान्यास किया गया 1710 करोड़ रूपए की योजना वाले इस निर्माणाधीन पुल का दूसरी बार धड़ाम से गिरना घोर अनियमितता और भ्रष्टाचार की बानगी एवं जद (यू.) – राजद गठबंधन/विलय का परिणाम है। 2024 – 25 में बिहार से इनका सफ़ाया भी ठीक ऐसे ही धड़ाम से होना निश्चित है। आखिर बिहार के लोग कब तक इनको झेलते रहेंगे?’

वहीं सुल्तानगंज के जदयू विधायक ललित नारायण मंडल ने इसे एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना बताया। उन्होंने कहा कि हमें तो उम्मीद थी कि पुल का उद्घाटन इस साल के अंत में नवंबर-दिसंबर तक हो जाएगा। मामले की जांच होगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

भाजपा नेता अमित मालवीय ने पूछा कि क्या नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव क्रमशः सीएम और डिप्टी सीएम के पद से इस्तीफा देंगे? उन्होंने ट्वीट कर कहा- “2015 में नीतीश कुमार ने इस पुल का उद्घाटन किया, जो 2020 तक पूरा होना था। यह पुल दूसरी बार गिर गया है। क्या इस घटना का संज्ञान लेते हुए नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव तुरंत इस्तीफा दे देंगे? ऐसा करने से चाचा और दोनों भतीजा देश के सामने एक मिसाल कायम कर सकता है।”

इससे पहले दिसंबर 2022 में बिहार के बेगूसराय में बूढ़ी गंडक नदी पर बने पुल का एक हिस्सा गिर गया था। पुल में कथित तौर पर दरारें आ गई थीं और पुल के खंभे 2 और 3 गिर गए थे। इससे एक महीने पहले नवंबर में सीएम नीतीश कुमार के नालंदा जिले में एक निर्माणाधीन पुल गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी और एक अन्य घायल हो गया था। किशनगंज और सहरसा जिले में भी निर्माणाधीन पुल उद्घाटन से पहले ही धराशायी हो गया था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *