शिवसेना (यूबीटी) के नेता उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा एकनाथ शिंदे गुट को शिवसेना का नाम और ‘धनुष और तीर’ का निशान इस्तेमाल करने की इजाजत देना “भारत में लोकतंत्र की हत्या” है। उद्धव ने यह भी कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देंगे।
शुक्रवार रात एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए उद्धव ठाकरे ने एकनाथ शिंदे गुट को “चोर” कहा और कहा कि, “चोरों को एक दिन के लिए आनंद लेने दो।” उद्धव ने अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से हार नहीं मानने और संघर्ष करते रहने को कहा।
उन्होंने कहा कि 16 शिवसेना विधायकों को अयोग्य घोषित करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभी तक अपना फैसला नहीं सुनाया है, फिर भी पार्टी के नाम और प्रतीक पर चुनाव आयोग का आदेश आया है, जो “अनुचित है।”
उद्धव ने कहा- ‘मैंने चुनाव आयोग से कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक रुकना चाहिए. मगर ऐसा नहीं हुआ। आगे भविष्य में कोई भी विधायकों या सांसदों को खरीदकर मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री बन सकता है.’
उद्धव ने चुनाव आयोग पर केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत करने का आरोप लगाया और आयोग को “बीजेपी का गुलाम” बताया। उन्होंने चुनाव आयोग के प्रमुख के चुनाव के तरीके में बदलाव की भी मांग की।
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में लोकतंत्र जिंदा है और यह सुनिश्चित करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय हमारी आखिरी उम्मीद है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव आयोग का फैसला इस बात का भी संकेत है कि मुंबई और अन्य जगहों पर निकाय चुनाव जल्द ही होंगे।
उन्होंने दावा किया कि, “बीजेपी किसी भी कीमत पर बीएमसी चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है।”
बीजेपी पर तंज कसते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीजेपी ये जानती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम महाराष्ट्र में काम नहीं करता है, इसलिए उन्हें अपने फायदे के लिए बालासाहेब का मुखौटा अपने चेहरे पर लगाना होगा। उन्होंने कहा- “लेकिन अंत में, एक मुखौटा एक मुखौटा ही है”। मालूम हो कि इस साल बीएमसी चुनाव होने की उम्मीद है।
चुनाव आयोग से मिले इतने बड़े झटके के बावजूद, उद्धव ठाकरे ने कहा, “असली धनुष और तीर, जिसकी बालासाहेब ठाकरे पूजा करते थे, वह मेरे पास है”। ठाकरे ने कहा, “पार्टी और लोग मेरे साथ हैं। चुनाव आयोग ने जो कुछ भी मांगा, हमने उसका पालन किया और सदस्यता और संगठनात्मक ताकत के बारे में सभी कागजात जमा किए, और फिर भी चुनाव आयोग ने हमारे खिलाफ फैसला सुनाया।”
उद्धव ठाकरे ने कहा, “शिवसेना फिर उठेगी और खत्म नहीं होगी।”
वहीं एकनाथ शिंदे ने चुनाव आयोग के फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया और कहा- “यह हमारे कार्यकर्ताओं, सांसदों, विधायकों, जनप्रतिनिधियों और लाखों शिवसैनिकों सहित बालासाहेब और आनंद दीघे की विचारधाराओं की जीत है। यह लोकतंत्र की जीत है। यह देश बाबासाहेब अंबेडकर की ओर से तैयार किए गए संविधान पर चलता है। हमने उस संविधान के आधार पर अपनी सरकार बनाई। चुनाव आयोग का आज जो आदेश आया है, वह मेरिट के आधार पर है। मैं चुनाव आयोग का आभार व्यक्त करता हूं”।
शिवसेना सांसद संजय राउत ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए ट्वीट किया और लिखा कि, ‘इसकी स्क्रिप्ट पहले से ही तैयार थी। देश तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। कहा गया था कि नतीजा हमारे पक्ष में होगा, लेकिन अब एक चमत्कार हो गया है। लड़ते रहो। ऊपर से नीचे तक करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाया है। हमें फिक्र करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि जनता हमारे साथ है। हम जनता के दरबार में नया चिह्न लेकर जाएंगे और फिर से शिवसेना खड़ी करके दिखाएंगे, ये लोकतंत्र की हत्या है।’
बता दें कि शिवसेना के नियंत्रण को लेकर चली इस लंबी लड़ाई पर चुनाव आयोग ने 78 पन्नों के अपने आदेश में है कहा कि एकनाथ शिंदे, जो विद्रोह के बाद मुख्यमंत्री बने थे उन्हें 2019 में हुए महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में पार्टी के 76 प्रतिशत वोटों के साथ विधायकों का समर्थन प्राप्त था।
