दिल्ली पुलिस ने HC से कहा- Alt News के सह-संस्थापक जुबैर के खिलाफ कोई अपराध नहीं मिला

दिल्ली पुलिस ने गुरुवार को दिल्ली हाई कोर्ट को बताया कि साल 2020 में ऑल्ट न्यूज़ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर द्वारा पोस्ट किए गए ट्वीट में कोई अपराध नहीं पाया गया है। दिल्ली पुलिस के वकील ने अदालत को सूचित किया कि जांच एजेंसी को जुबैर के खिलाफ अपराध का कोई संकेत नहीं मिला है और उसका नाम आरोप-पत्र में शामिल नहीं किया गया है। जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने कहा, “सुनवाई की अगली तारीख से पहले चार्जशीट दाखिल की जाए”। कोर्ट ने पुलिस को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के.एम. नटराज को भी चार्जशीट की एक कॉपी देने के लिए कहा, जो इस मामले में शिकायतकर्ता राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उसके बाद कोर्ट ने मामले को 2 मार्च को सूचीबद्ध किया और दिल्ली पुलिस को चार्जशीट को रिकॉर्ड पर रखने के लिए कहा।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अधिवक्ता नंदिता राव ने हाई कोर्ट से कहा कि जहां तक जुबैर का संबंध है पुलिस ने कोई आपराध नहीं पाया है और इस तरह से चार्जशीट में उनका नाम शामिल नहीं किया है। एनसीपीसीआर की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने कहा कि वह इस मामले में और निर्देश लेंगे।

9 अगस्त, 2020 को जुबैर को दिल्ली पुलिस के साइबर सेल द्वारा यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम के तहत राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की शिकायत पर “ट्विटर के माध्यम से एक बच्ची को धमकाने और प्रताड़ित करने” के लिए बुक किया गया था। साल 2020 के जिस ट्वीट का जिक्र दिल्ली पुलिस ने हाईकोर्ट में किया है, उस मामले में जुबैर के खिलाफ पास्को एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था।

जुबैर ने एफ़आईआर को रद्द करने और एनसीपीसीआर के चेयरपर्सन और इस मामले में शिकायतकर्ता प्रियांक कानूनगो और उस ट्विटर यूज़र के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था।

बता दें कि इससे पहले दिल्ली पुलिस ने मई 2022 में कोर्ट को बताया था कि जुबैर के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता है। हालांकि, तब एनसीपीसीआर ने तर्क दिया था कि पुलिस द्वारा अपनी स्टेटस रिपोर्ट में दी गई जानकारी से पता चलता है कि जुबैर जांच से बचने की कोशिश कर रहा है और पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रहा है। जुबैर को कोर्ट से 9 सितंबर, 2020 को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया गया था। कोर्ट ने पुलिस उपायुक्त, साइबर सेल को इस मामले में की गई जांच पर एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था।

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