गुरुवार को झारखंड में सियासी पारा अपने चरम पर दिखा। दरअसल मामला ये था कि राज्य के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को आज सुबह 11.30 बजे ED के रांची स्थित दफ्तर में पेश होना था। उन्हें अवैध खनन और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ED ने पूछताछ के लिए समन भेजा था। लेकिन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जांच एजेंसी के सामने पेश नहीं हुए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर बाद मीडिया के सामने आए और रांची में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने ED को खुली चुनौती दी और कहा, ‘आओ और अगर मैंने अपराध किया है तो मुझे गिरफ्तार करो’। सोरेन ने कहा, ‘मुझे ईडी की ओर से आज के लिए समन जारी किया गया, जब छत्तीसगढ़ में मेरा आज आयोजन था। यदि मैंने कोई अपराध किया है तो फिर आकर मुझे गिरफ्तार कर लो। इसके लिए पूछताछ की क्या जरूरत है? ईडी ऑफिस के बाहर सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई है। आप झारखंडियों से डरे हुए क्यों हैं?’
मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद गुरुवार शाम को उनकी पार्टी की तरफ से मुख्यमंत्री के आज ED दफ्तर में पेश ना होने की वजह बताई गई। पार्टी की ओर से कहा गया कि मुख्यमंत्री ने ईडी से पेशी के लिए समय मांगा है और वो 23 नवंबर तक प्रवर्तन निदेशालय के सामने पेश नहीं हो सकेंगे।
JMM नेता एस भट्टाचार्य ने हेमंत सोरेन को भेजे गए ईडी के समन पर कहा कि, ‘सीएम का हमेशा पूर्व नियोजित कार्यक्रम होता है। हमने ईडी को पूरे कार्यक्रम के बारे में सूचित किया है। 22-23 नवंबर को हमारी राज्य विधानसभा की वर्षगांठ और 15 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस है। सरकारी कार्यक्रम जारी रहेंगे। हमने उन्हें 23 नवंबर तक का शिड्यूल बता दिया है।’ उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा हम इस पर कानूनी राय ले रहे हैं। हां, निश्चित रूप से हमने 23 नवंबर तक का समय मांगा है क्योंकि वह अभी ईडी के सामने पेश नहीं हो सकते हैं।’ अपने इस संबोधन के बाद मुख्यमंत्री सोरेन आदिवासी समुदाय के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए छत्तीसगढ़ रवाना हो गए।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने आज अपने घर के बाहर करीब 30 मिनट तक कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। सोरेन ने कहा कि हमारी सरकार को गिराने की साजिश केंद्र से की जा रही है। बीजेपी के लोग हमें डराने के लिए CBI, ED, और न्यायालय का सहारा लेते हैं। इन लोगों को लगता है कि ये जेल भेजेंगे तो हम डर जाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को दबाने के लिये ईडी और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का सहारा लिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम जेल भरने का अभियान शुरू कर देंगे तो इतने लोग पहुँच जाएंगे कि जेल में जगह नहीं मिलेगी। उन्होंने कहा कि ‘मुझे पता चला है कि ईडी दफ्तर और बीजेपी दफ्तर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षा क्यों बढ़ाई गई है? अभी तक तो उन्होंने कुछ किया ही नहीं है। जब झारखंड के लोग अपने पर उतर आएंगे तो वो दिन दूर नहीं जब आप लोगों को यहां पर सिर छुपाने की जगह नहीं मिलेगी। उसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने ईडी मुर्दाबाद और मोदी सरकार मुर्दाबाद के नारे लगाए।
हेमंत सोरेन ने अपने भाषण में आदिवासी कार्ड खेलते हुए बीजेपी और केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि आदिवासियों को उनके अधिकारों से वंचित करने का प्रयास किया जा रहा है। सोरेन ने पार्टी कार्यकर्ताओं से राजनीतिक रूप से एक बड़े आंदोलन के लिए तैयार रहने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी झामुमो, कानूनी और राजनीतिक दोनों तरह से आदिवासी भाई-बहनों की की लड़ाई लड़ेगी। हेमंत सोरेन ने गुजरात के आदिवासी वोटर्स से अपील की कि वो राज्य में होने वाले चुनाव में बीजेपी को वोट ना दें क्योंकि बीजेपी को आदिवासियों की चिंता नहीं है। सोरेन ने कहा कि हमने अपने राज्य में कुछ एक्टिव बाहरी गैंग की पहचान की है, जो यहाँ के आदिवासी लोगों को उनके पैरों पर खड़ा नहीं होने देना चाहते हैं। इस राज्य में झारखंडियों का शासन चलेगा ना कि बाहरी ताकतों का नहीं। उन्होंने कहा कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में बीजेपी का सूपड़ा साफ हो जाएगा।
झारखंड में कई जगहों पर JMM कार्यकर्ताओं ने गुरुवार को ईडी के खिलाफ प्रदर्शन किया। पार्टी नेता और प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा कि झामुमो संघर्ष की पार्टी है और ये प्रदर्शन कार्यकर्ताओं की स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। हम सड़क से सदन तक सामंतवादी मानसिकता के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। अभी तो ये शुरुआत है।
पूरा मामला क्या है?
अवैध खनन के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ईडी के रडार पर हैं। मुख्यमंत्री सोरेन पर आरोप है कि उन्होंने सीएम रहते हुए जून 2021 में उन्होंने अपने नाम पर खदान का पट्टा आवंटित कर लिया था। उसके बाद बीजेपी नेता रघुवर दास और बाबूलाल मरांडी ने इस मामले की शिकायत राज्यपाल से की थी और कहा कि ये ऑफिस ऑफ प्रॉफिट का मामला है। बीजेपी ने मांग की थी कि मुख्यमंत्री को अयोग्य घोषित किया जाए । बाद में बीजेपी की शिकायत पर राज्यपाल ने इस मामले को चुनाव आयोग भेज दिया था। चुनाव आयोग ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राज्य सरकार से इस मामले से संबंधित दस्तावेजों के प्रमाणीकरण, लीज के नियमों और शर्तों का विवरण मांगा था।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर विधानसभा की सदस्यता जाने का भी खतरा मंडरा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि सूत्रों से खबर है कि चुनाव आयोग ने खनन मामले में सीएम सोरेन को दोषी ठहराते हुए विधानसभा से उनकी अयोग्यता की सिफारिश की है। हालांकि अभी तक राज्यपाल ने चुनाव आयोग के द्वारा भेजी गई रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया है, जिसकी वजह से राज्य में असमंजस के हालात बने हुए हैं।
बता दें कि इसी साल जुलाई महीने में ईडी ने हेमंत सोरेन के विधायक प्रतिनिधि पंकज मिश्रा को गिरफ्तार किया था और करीब 12 करोड़ की संपत्ति जब्त की थी। अवैध खनन के मामले में ईडी ने अगस्त में प्रेम प्रकाश को गिरफ्तार किया था। प्रेम प्रकाश को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का करीबी बताया जाता है। ईडी ने प्रेम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का भी मुकदमा दर्ज किया था।
जांच एजेंसी ईडी ने अवैध खनन के मामले में झारखंड, बिहार, तमिलनाडु और दिल्ली-एनसीआर में 16 जगहों पर छापेमारी की थी।
