पुलित्जर अवार्ड विजेता फोटो जर्नलिस्ट सना इरशाद मट्टू को फिर विदेश जाने से रोक दिया गया हैं। इस बात की जानकारी उन्होंने ट्वीट करके दी। सना ने ट्वीट में कहा कि “मैं न्यूयॉर्क में पुलित्जर पुरस्कार प्राप्त करने के लिए जा रही थी, लेकिन मुझे दिल्ली हवाई अड्डे पर इमिग्रेशन में अधिकारियों ने अपनी इस यात्रा पर जाने से रोक दिया जबकि मेरे पास यूएस का लीगल वीजा और टिकट था”. उन्होंने दूसरा ट्वीट करते हुए लिखा कि “‘मेरे साथ ऐसा दूसरी बार हो रहा है जब बिना कोई कारण या समस्या बताए बिना मुझे दिल्ली एयरपोर्ट पर रोक दिया गया है। इस घटना को लेकर मैंने कई अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन किसी से कोई जवाब नहीं मिला। मेरे लिए इस पुरस्कार समारोह में शामिल होना मेरे जिंदगी का एक सुनहरा अवसर था.’ वैसे इस मामले पर खबर लिखे जाने तक एयरपोर्ट प्रशासन या सरकार की तरफ से कोई जवाब नहीं आया है।
ज्ञात हो कि सना को इसी साल जुलाई में भी विदेश जाने से रोक दिया गया था। 2 जुलाई, 2022 को सना को दिल्ली एयरपोर्ट पर रोका गया था। सना उस समय पेरिस में एक पुस्तक के विमोचन और फोटो प्रदर्शनी में भाग लेने के लिए जा रही थी। मजेदार बात ये है कि उस समय भी सना ने आरोप यही लगाया था कि इमिग्रेशन सेंटर पर अधिकारियों ने उन्हें विदेश यात्रा पर नहीं जाने दिया और ये भी नहीं बताया गया की किन कारणों से वो विदेश की यात्रा नहीं कर सकती हैं। अधिकारियों ने सिर्फ इतना बताया था कि उन पर लगे प्रतिबंधों के चलते वो यात्रा नहीं कर सकती हैं।
उस समय जम्मू-कश्मीर पुलिस के अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की थी कि सना इरशाद मट्टू को ‘नो-फ्लाई लिस्ट’ में रखा गया है।
कौन हैं सना मट्टू और क्यों इन्हे मिला हैं पुलित्जर पुरस्कार?
28 साल की सना कश्मीर की रहने वाली हैं और अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के लिए फोटो जर्नलिस्ट का काम करती हैं। भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान उनके उम्दा कवरेज के लिए उन्हें फीचर फोटोग्राफी कैटेगरी में साल 2022 का पुलित्जर अवॉर्ड मिला है। पत्रकारिता जगत में पुलित्जर पुरस्कार को सबसे बड़ा पुरस्कार माना जाता है। सना के अलावा रॉयटर्स के तीन और पत्रकारों को फीचर फोटोग्राफी कैटेगरी में साल 2022 का पुलित्जर पुरस्कार मिला है, जिसमे फोटोजर्नलिस्ट अदनान अबीदी, अमित दवे और दिवंगत दानिश सिद्दीकि शामिल हैं।
पहले भी पत्रकारों को विदेश जाने से रोका गया है:-
26 जुलाई, 2022
द गार्जियन के पत्रकार आकाश हसन ने दावा किया था कि उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर कोलंबो के लिए उड़ान भरने से रोक दिया गया था। आकाश हसन कश्मीर के रहने वाले थे।
2019- पत्रकार गौहर गिलानी को दिल्ली एयरपोर्ट पर बिना किसी कोई स्पष्टीकरण के जर्मनी जाने से रोक दिया गया था। गिलानी को जर्मनी में एक पत्रकार सम्मेलन में भाग लेने जाना था। गिलानी कश्मीर के मुद्दे पर भारत सरकार के प्रति आलोचनात्मक रुख अपनाते रहे।
प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 150वें पायदान पर-मई 2022 में आई ग्लोबल मीडिया वॉचडॉग रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, सरकार की तीखी आलोचना के कारण, इस साल वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत की रैंकिंग 180 देशों में से पिछले साल के 142वें स्थान से गिरकर 150वें स्थान पर आ गई।
