दिल्ली: पिछले साल कोरोना की त्रासदी से उपजी मार्मिक दृश्यों को अपने कैमरे में कैद करने वाले दानिश सिद्दीकी को सोमवार देर रात साल 2022 के लिए पुलित्जर पुरस्कार के लिए विजेता घोषित किया गया। दानिश को उनके सहयोगियों अदनान आबिदी, सना इरशाद मट्टू, अमित दवे के साथ संयुक्त रूप से इस पुरस्कार के विजेता घोषित किया गया है।
मरहूम दानिश को दूसरी बार पुलित्जर अवार्ड मिला है। पिछले साल उनकी असामायिक मृत्यु हो गई थी।
अफगानिस्तान में युद्ध को कवर करने के दौरान दानिश की मौत हुई थीं। लेकिन अमेरिकन मैगज़ीन के हवाले से ये बात निकल कर आई की अफगानिस्तान में भारतीय होने की वजह से बेरहम तरीके से कत्ल कर दिया गया था।
पत्रकारिता के क्षेत्र में ये पुलित्ज़र सबसे ज्यादा प्रतिष्ठित माना जाता है। इस पुरस्कार को देने वाला देश अमेरिका है।
अमित दवे को भारत में कोरोना के कारण हुई मौतों की तस्वीरें खींचने के लिए सम्मानित किया गया है। दानिश और दवे जैसे लोग कोरोना के हाहाकार में लोगों तक इससे मचे आतंक और अपनों को खोने के मार्मिक दृश्यों को पहुंचा रहे थें।
दानिश सिद्दीकी भारत में स्थित रॉयटर्स के मुख्य फोटोग्राफर थे। उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से अर्थशास्त्र में डिग्री के मॉस कम्युनिकेशन में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की। दानिश को 2018 में रोहिंग्या शरणार्थियों के दस्तावेजों के संकट पर स्टोरी के लिए पुलित्जर पुरस्कार मिला था।
पुलित्ज़र का क्या है इतिहास-
साल 1912 में कोलंबिया विश्वविद्यालय ने अलग-अलग श्रेणियों में पुलित्ज़र पुरस्कार देने की योजना को मंजूरी दी। इसकी स्थापना हंगरी मूल के अमेरिकी फोटो पत्रकार जोसेफ पुलित्ज़र ने की थी। 1917 में पहली बार पुलित्ज़र पुरस्कार दिए गए थे।

