जनता पार्टी (भाजपा) के लिए देश का रक्षा मंत्री और गोआ के मुख्यमंत्री रहे मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद उनके इस गृह राज्य में पहला विधानसभा चुनाव फरवरी 2022 में निर्धारित है। दिवंगत पर्रिकर के बिनया भाजपा और अन्य सही सियासी दलों ने भी अपनी पतली कमर कस ली है। विश्व इतिहास में आदि औपनिवेशिक साम्राज्य पुर्तगाल का 500 बरस गुलाम रहे गोवा को विदेशी दासता से मुक्ति बड़ी जद्दोजदह के बाद 1960 में मिली। तब भारत ने ‘ ऑपरेशन विजय ‘ सैन्य अभियान से गोआ पर अपने शासन का ऐलान कर दिया जिसे गोआ मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत को ब्रिटिश हुक्मरानी से 15 अगस्त 1947 को राजनीतिक स्वतंत्रता मिल जाने के 10 बरस तक गोवा को दासता से मुक्ति के लिए इंतजार करना पड़ा जिसके कारण इतिहास के पन्नों में वर्णित हैं। गोवा अब भारत का सबसे छोटा राज्य बन गया है। बेशक उसकी कुल 40 विधान सभा सीटे ही हैं मगर देश ही नहीं दुनिया भर में इसकी बात ही कुछ और है।
महान फिल्मकार गुरुदत्त की सदाबहार देवानंद अभिनीत फिल्म बाजी (1957) की शूटिंग जब गोवा में हुई वह भारत का हिस्सा नहीं बना था। लेकिन वह हिन्दुस्तानी समाज का अंग शुरू से रहा है जो फिल्मों में बखूबी दिखा है।यह इंगित करना बेहतर होगा कि ये देव साहब की एकलौती फिल्म है जिसमें वे विलेन बने थे और अनगिनत हिन्दुस्तानी फिल्मों में खलनायक के किरदार में दिखे केएन सिंह सिर्फ बाजी में ‘ अच्छे आदमी ‘ के किरदार में थे। ये फिल्म गुरुदत्त ही नहीं गोआ से लगे अरब सागर के ‘ गुआनी ‘ तट का भी कमाल है।
खैर , फिल्मों की दुनिया से बाहर की बात ये है कि गोवा में भाजपा की सरकार 2017 के पिछले विधान सभा चुनाव में किसी दल को बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में जोड़-तोड़ से बनी थी। कांग्रेस 17 सीटें जीत सबसे बड़ी पार्टी बनी थी और भाजपा को 13 सीटें ही मिली थी। लेकिन भाजपा तो भाजपा है, मोदी जी की है और 2014 के लोकसभा चुनाव के उपरांत कारूँ का खजाना उसके हाथ लग चुका है। इसलिए उसने अपनी सरकार बनाने के लिए आवश्यक अतिरिक्त विधायक कांग्रेस से अपने पाले में लाने में कामयाबी हासिल कर ली। अभी कुल 40 सीटों की निवर्तमान विधान सभा में भाजपा के 27, कांग्रेस के 5 , गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफडी) के 3 महाराष्ट्रवादी गोमांतक पार्ट (एमजीपी) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के एक–एक विधायक हैं जबकि तीन विधायक निर्दलीय हैं। भाजपा के सत्ता पक्ष में एक निर्दलीय मिलाकर 28 विधायक है। विपक्ष में 11 विधायक हैं जिनमें कांग्रेस के 5, जीएफडी के 3 , एमजीपी और एनसीपी के एक–एक के अलावा दो निर्दलीय हैं। एक और विधायक अन्य दल के हैं।
2019 के लोकसभा चुनावों के साथ गोवा में विधान सभा की पणजी समेत चार सीटों पर उपचुनाव हुए जिनमें तीन पर भाजपा और एक पर कांग्रेस जीती थी। पणजी सीट विधायक एवं मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन से रिक्त हुई थी। भाजपा की मौजूदा प्रमोद सावंत सरकार को जीएफपी, एमजीपी और निर्दलियों का समर्थन हासिल है। भाजपा गठबंधन में जीएफपी के तीन और एमजीपी एक विधायक है।
चुनावी समंदर-
गोवा के चुनावी समंदर में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप) ही नहीं बल्कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छलांग लगा चुकी है। इसलिए भाजपा के लिए ‘ कुछ आराम का मामला ‘ बन जाए तो गोवा की अवाम को अचरज नहीं होगा, दिल्ली और बंगाल के लोग बेशक हैरान रहें। भाजपा,कांग्रेस, आप और टीएमसी के अलावा इस चुनाव में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे की शिव सेना, पूर्व रक्षा मंत्री शरद पवार की नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (एनसीपी), कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (सीपीआई), गोवा फॉरवर्ड पार्टी (जीएफडी), महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) और निर्दलीय भी हैं।
कांग्रेस-
कांग्रेस के मुताबिक गोवा की जनता ने 2017 के चुनाव में भाजपा को नहीं बल्कि उसे चुना था। विधायकों की खरीद-फरोख्त करने के कारण गोवा की जनता भाजपा से बहुत नाराज है और इसलिए वे अबकी कांग्रेस को भारी वोट देकर स्पष्ट जनादेश देंगे। उसे लगता है कि राज्य में रोजगार की कमी भ्रष्ट्राचार के कारण सत्ता विरोधी लहर है और कोरोना महामारी ने भाजपा के चुनावी हितों का नुकसान किया है। कांग्रेस का तालमेल अभी तक फायनल नहीं है। उसके राज्य प्रभारी ,दिनेश गुंडुराव और चुनाव प्रभारी एवं पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम को इसे प्रांतीय नेताओं से बात कर फायनल करना है। एनसीपी के राज्य प्रभारी एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने कांग्रेस को तालमेल जल्द फायनल करने कहा है। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक एनसीपी ज्यादा सीटें मांग रही है और उसके नेता चर्चिल अलेमाओ के टीएमसी के भी संपर्क में होने की चर्चा है। जीएफडी से कांग्रेस सतर्क हो चुकी है जिसके नेताओं ने 2017 का चुनाव साथ लड़ने के बावजूद परिणाम आने पर भाजपा को सरकार बनाने समर्थन दे दिया था। भाजपा ने अपनी सरकार स्थिर रखने जीएफडी के भी विधायक फोड़ लिए थे। वह अब जीएफडी को भाव नहीं दे रही है। इसलिए जीएफडी अब कांग्रेस के साथ तालमेल करना चाहती है। लेकिन कांग्रेस उसके बजाय एमजीपी को तरजीह दे रही है। वैसे , कांग्रेस ही नहीं बल्कि एनसीपी, जीएफडी और एमजीपी का भी भाजपा का साथ देने की संभावना नहीं लगती है।
भाजपा-
भाजपा अभी एमजीपी को अपने गठबंधन में लाने की कोशिश कर रही है। लेकिन इसके वरिस्ठ नेता सुदीन धवलीकर एमजीपी विधायकों को 2019 में भाजपा में शामिल कर लेने के बाद से नाराज हैं। एमजीपी का सात विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र में प्रभुत्व बताया जाता है।
टीएमसी-
टीएमसी ने पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता रहे लुइज़िन्हो फलेरियो ही नहीं टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ,अभिनेत्री नफीसा अली और मृणालिनी देशप्रभु को भी अपनी सियासी शतरंजी बिसात पर खड़ा कर दिया है। वह इस बात का बढ़-चढ़कर प्रचार कर रही है कि उसने बंगाल में भाजपा को राज्य की सत्ता में नहीं आने दिया। बंगाल की तरह गोआ के चुनाव में भी टीएमसी ने प्रशांत किशोर उर्फ पीके की सेवा लेकर चुनावी ब्यूह रचना की है।
आप-
आप ने गोवा के लोगों को कई चीज़ें फ्री में देने का वादा किया है। 2017 में आप को 6.3 फीसद मिले थे। इस कारण भाजपा और कांग्रेस का वोट शेयर दो– दो फीसद गिर गया था। तय है इस बार टीएमसी के भी चुनाव लड़ने से भाजपा और काँग्रेस, दोनों के वोट शेयर में और कमी आएगी।
प्रि-पोल सर्वे-
हालिया सर्वे के मुताबिक गोआ में भाजपा को 23.6 फीसद वोट शेयर की बदौलत स्पष्ट बहुमत मिल सकता है। कांग्रेस को 28.6 फीसद वोट शेयर से अधिकतम 6 सीट मिलने का अनुमान है। आप को 23.6 फीसद वोट शेयर के साथ 7 सीट तक मिलने का आँकलन है। हर सीट पर औसत 25000 मतदाता हैं।
इतिहास-
1961 में पुर्तगाली शासन समाप्ति के बाद गोवा के सैन्य प्रशासन के तहत लेफ्टिनेंट जनरल कुन्हीरामन पैलट कैंडेथ को उपराज्यपाल नियुक्त किया गया था। 8 जून 1962 को लेफ्टिनेंट-गवर्नर द्वारा मनोनीत 29 सदस्यों की सलाहकार परिषद को प्रशासन में सहायता देने के बाद नागरिक सरकार बनने की प्रक्रिया शुरू हो गई । विधान सभा का पहला सत्र 9 जनवरी 1964 को सचिवालय भवन (आदिल शाह का महल) में बुलाया गया था। गोवा में 9 जनवरी को विधायक दिवस के रूप में मनाया जाता है।1987 में गोवा भारत का पूर्ण राज्य बना तो विधान सभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई।
गोवा विधानसभा परिसर पोरवोरिम, बारदेज़ में है जिसके भवन का उद्घाटन 5 मार्च 2000 को तबके प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने किया था। अभी भाजपा के राजेश पाटनेकर विधानसभा अध्यक्ष हैं। भाजपा के प्रमोद सावंत 19 मार्च 2019 से मुख्यमंत्री और सदन के नेता है। विधानसभा में विपक्ष के नेता कांग्रेस के दिगंबर कामत हैं। गोआ में कुल करीब 11 लाख मतदाता हैं जिनमें करीब 26 फीसद क्रिश्चियन हैं। 2017 के पिछले विधानसभा चुनाव में दिवंगत पर्रिकर की लोकप्रियता से भाजपा 32 फीसद गुआनियों के वोट पाने में सफल रही थी जिनमें बड़ी संख्या में क्रिश्चियन भी थे। भाजपा को 1994 के विधानसभा चुनाव में 9 फीसद वोट ही मिले थे।
वैश्विक व्यापारिक हितों के लिए 16वीं सदी में गोआ को गुलाम बना लेने वाले पुर्तगाली साम्राज्य के यहाँ बसे लोगों की संस्कृति का बहुत असर पड़ा है। भारत ने 1960 में गोआ को अपने अधीन कर लिया। ईसा पूर्व तीसरी सदी में गोआ मगध सम्राट अशोक के मौर्य वंश के अधीन था। तब बौद्ध भिक्षुओं ने यहां बौद्ध धर्म का प्रचार प्रसार किया। वह 14 वीं सदी में कुछ अरसे तक दिल्ली सल्तनत के अधीन हो गया। पर जल्द ही उसे विजयनगर साम्राज्य और फिर बीजापुर के आदिल शाह ने अपने अधीन कर लिया। उसके बाद पुर्तगाली साम्राज्य का वर्चस्व हो गया जिसके शासन में ओल्ड गोआ में 1619 में निर्मित केथेड्रल एशिया के सबसे बड़े चर्च में से है।
भारतीय सेना ने 19 December 1961 को गोआ और हिन्द महासागर के दमन-दीव के द्वीपों पर कब्जा करने ऑपरेशन विजय की सैन्य कार्रवाई की। वहाँ 16 जनवरी 1967 को कराए गए रेफरेंडम के बाद भारत गणराज्य का संघ शासित प्रदेश बना दिया गया। गौरतलब है कि ये भारत में अबतक का एकमात्र रेफरेंडम है। रेफरेंडम इस सवाल पर था कि गोआ केंद्र शासित प्रदेश बने या उसका महाराष्ट्र में विलय कर दिया जाए। जनादेश इसे महाराष्ट्र से अलग रखने के पक्ष में था। 30 मई 1987 को इसका विभाजन कर दमन और दीव को केंद्र शासित प्रदेश बनाकर गोआ को भारत का पूर्ण राज्य का दर्जा का दर्जा दे दिया गया। इसके कुल 334 गाँव दो जिलों, नॉर्थ गोआ और दक्षिण गोआ में फैले हैं। दोनों जिलों से एक–एक लोक सभा सदस्य चुने जाते है। विधानसभा एक राज्यसभा सदस्य चुनती है। गोआ में शुरू से क्षेत्रीय दलों का दबदबा रहा है। इस वजह से 1990 से 2005 के 15 बरस में 14 सरकारें आईं और गई हैं।
भूगोल आदि-
गोआ अरब सागर तट पर पश्चिमी घाट के कोंकण क्षेत्र में उत्तर में महाराष्ट्र और पूरब–दक्षिण में कर्नाटक से घिरा और 3,702 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ भारत का सबसे छोटा राज्य है। पर दुनिया भर के लोग यहाँ सैर-सपाटा के लिए आते है। इसी कारण गोआ का प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी ) शेष भारत से ढाई गुना ज्यादा है। इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से 11वें वित्त आयोग ने इसे देश में अन्य से बेहतर माना था। राष्ट्रीय जनसंख्या आयोग के मुताबिक मानव विकास आदि सूचकांकों के आधार यहाँ का जनजीवन सबसे अछा है। वास्को डगामा इसका सबसे बड़ा नगर है और पणजी राजधानी है।
मार्च 2005 में राज्यपाल की अनुशंसा पर विधानसभा भंग कर राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया। जून 2005 में कांग्रेस पाँच विधान सभा सीट के उपचुनाव में तीन जीत कर सत्ता में लौट आई। 2007 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस गठबंधन ने जीत दर्ज की। लेकिन 2012 के चुनाव में भाजपा और एमजीपी गठबंधन जीत गया जिसके मुख्यमंत्री पर्रिकर बने। 2017 के चुनाव में भाजपा के कांग्रेस से पीछे रहने के बावजूद उसे राज्यपाल मृदुल गर्ग ने नई सरकार बनाने का मौका दे दिया। कांग्रेस ने इसमें विधायकों की खरीद बिक्री का आरोप लगा सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई। कोर्ट ने विधान सभा में शक्ति परीक्षण कराने के आदेश दिए जिसे जीतने में पर्रिकर सरकार सफल रही।
बहरहाल , अब भाजपा के पास पर्रिकर का चुनावी जादू नहीं रहा और ऐसे में वो राम भरोसे है। लेकिन विभिन्न जातीय समुदायों और धर्मों की गोअन आबादी में राम मंदिर का चुनावी कार्ड उत्तर प्रदेश की तरह से ज्यादा चलना मुश्किल लगता है। ऐसे में कांग्रेस नई सरकार बनाने के मौके से फिर वंचित हो गई तो केजरीवाल और दीदी के पौ बारह होने की स्थिति उभर सकती है।







