देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम की जयंती के मौके पर भाजपा की शिक्षा नीति के खिलाफ NSUI ने ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की शुरुआत की

पूर्व शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की जयंती के मौके पर NSUI ने पोस्टर लांच के द्वारा राष्ट्रव्यापी ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की शुरुआत की। इस मौके पर डॉ विनीत पुनिया ने कहा आज एक खास दिन है। आज देश के पहले शिक्षामंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती भी है और आज का दिन राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रुप में भी मनाया जाता है, तो इससे बेहतर कोई दिन नहीं हो सकता था इस अभियान की शुरुआत के लिए।

 

(एनएसयूआई द्वारा ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ अभियान की शुरुआत की गई)

 

नीरज कुंदन ने इस मौके पर कहा, आज के दिन को हम राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के रूप में भी मनाते हैं, तो आज ही के दिन हमारा ये राष्ट्रीय कार्यक्रम, जिसे एनएसयूआई ने आज यहाँ पर दिल्ली से लॉन्च किया है, पूरे देशभर में हम इस कार्यक्रम के तहत अभियान चलाएंगे। इसमें हम छात्रों के बीच में जाएंगे। डिफ्फरेंट तरीके के कार्यक्रम रहेंगे। वो चाहे स्टूडेंट इंट्रैक्शन प्रोग्राम्स रहेंगे। उसमें हमारा सिग्नेचर कैंपेन इंक्लूडिड है और लास्ट में हम हर एक प्रदेश में, भाजपा की सरकार जहाँ पर है, वहाँ पर घेराव करेंगे, सरकार का और अंत में इस कार्यक्रम का समापन, जो दिल्ली में गूँगी-बहरी सरकार यहाँ पर सोई हुई है, प्रधानमंत्री जी जिसको यहाँ पर लीड कर रहे हैं, उनके खिलाफ यहाँ पर प्रदर्शन करेंगे।

 

हमारे इस कार्यक्रम का नाम ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ है, जो आप लोगों ने पोस्टर में बड़े अच्छे तरीके से देखा भी होगा और इसमें पांच मुख्य मुद्दे, वो हमने इस कार्यक्रम में रखे हैं। जो मुद्दे छात्रों के मुद्दे हैं, आज के इस दौर में, तो सबसे पहला है, वो जिस तरीके से शिक्षा और सरकारी उपक्रम हैं, उनका निजीकरण जो ये सरकार कर रही है। आप लोग देख रहे हैं कि निजीकरण करने से आज जिस तरीके से कांग्रेस पार्टी ने 60 सालों में जिन संसाधनों को बड़ी मेहनत से बनाया था और न केवल कांग्रेस पार्टी ने, इस देश के एक-एक व्यक्ति ने बनाया था, उसमें हर एक व्यक्ति का योगदान था, उन सरकारी संसाधनों को बनाने में, आज भाजपा की सरकार उन्हें बेचने का काम कर रही है और उनके बिकते ही, सबसे पहला अगर असर किसी पर पड़ेगा, तो वो छात्रों पर पड़ेगा। आज रेलवे को आप प्राइवेटाइज कर रहे हैं, जिस तरीके से एयर इंडिया को प्राइवेटाइज कर रहे हैं, तो आप छात्रों से उनका सरकारी उपक्रमों में जो नौकरी करने का एक अवसर था, आप उनको छीन रहे हैं। आप नौकरियों को अस्थाई कर रहे हैं और दूसरी बड़ी बात, तीर कहीं और है, निशाना कहीं और है। इनका प्रहार जो है, वो एससी, एसटी, ओबीसी के जो छात्र हैं, हमारे, जिनको संविधान ने हक दिया, आरक्षण का, ये कहीं न कहीं, हमारे उन छात्रों के आरक्षण पर प्रहार है।

 

दूसरा मुख्य मुद्दा है, नई शिक्षा नीति, (NEP) नेशनल एजुकेशन पॉलिसी। ये न्यू एजुकेशन पॉलिसी सबसे पहले लाई कब गई? ये हम और आप, सब जानते हैं। ये तब लाई गई, जब मैं और आप, हम लोग मूल सुविधाओं के लिए दर-बदर हो रहे थे। वो मूल सुविधाएं चाहे ऑक्सीजन सिलेंडर हो। वो मूल सुविधाएं चाहे कहीं पर दवाई हो, कहीं पर हॉस्पीटल में हमको एडमिशन मिल जाए। जब पूरा देश कोरोना से लड़ रहा था, जब सारी यूनिवर्सिटी और कॉलेजेज बंद थे, सारे हमारे एजुकेशन इंस्टीट्यूट बंद पड़े थे, बिना किसी चर्चा से, आप छोड़िए, न छात्रों से चर्चा की गई, न कहीं पर राज्य सभा में, न लोक सभा में चर्चा की गई और मैं कहूँगा कि चोरों की तरह, जिस तरीके से चोर रात के अंधेरे में आकर चोरी करता है, उस तरीके से चोरों की तरह पिछले दरवाजे से इस नई शिक्षा नीति को लाया गया। इस नई शिक्षा नीति का हम विरोध करते हैं, क्योंकि अब आहिस्ता-आहिस्ता हम लोग देख रहे हैं कि कॉलेज खुलने लगे हैं। जिस समय ये लोग नई शिक्षा नीति लाए, एनएसयूआई तो उस दिन से इसका विरोध कर रही है, परंतु अब कॉलेज खुलने लगे हैं, तो हम छात्रों के बीच में ये नई शिक्षा नीति भी लेकर जाएंगे, क्योंकि ये जो नई शिक्षा नीति ये लोग लाए हैं, उससे सीधा-सीधा निजीकरण को इन्होंने फिर से बढ़ावा दिया है और इस नई शिक्षा नीति के तहत, मैं कहूँगा कि जो किसान और गरीब घर का बेटा है, उसके लिए शिक्षा लेना असंभव हो जाएगा।

 

 

भाजपा की सरकार ने घोटालों में पीएचडी कर रखी है। जब से भाजपा की सरकार आई है, वो चाहे एसएससी का एग्जाम हो, वो चाहे नीट का एग्जाम हो, हम लोगों ने देखा है कि किस तरीके से घोटाले इनकी सरकारों में बढ़े हैं।

 

जब दो साल हम लोग कोरोना से लड़ते रहे, हमारे कॉलेज और हमारे कैंपेसेज बंद रहे, सब कुछ बंद रहा तो बहुत सी नौकरियों के लिए एग्जाम्स छात्रों के हुए ही नहीं और कहीं अगर हुए भी, तो क्योंकि उस छात्र के घर पर कोई बीमार था, या वो खुद बीमार था, तो वो परीक्षा अगर नहीं दे पाया, तो कम से कम दो साल का जो एज क्राइटेरिया में छात्रों को छूट मिलनी चाहिए, वो चाहे यूपीएससी के एग्जाम हो, या अन्य एग्जाम हों, उनमें छात्रों को छूट मिलनी चाहिए, क्योंकि उसमें हम छात्रों की या किसी भी युवा साथी की कोई गलती नहीं थी कि कोरोना आ गया। आज जो यूपीएससी उस समय नहीं दे पाया, क्योंकि कोरोना था, दो सालों में, उनकी एज लिमिट जो है, क्रॉस कर चुकी है, तो सरकार को इसके ऊपर सोचना चाहिए और इसमें मिनिमम दो साल का जो एज रिलेक्सेशन है, वो हर एक कॉम्पटीटिव एग्जाम मे देना चाहिए।

 

 

दो करोड़ रोजगार देने का वादा इस सरकार ने किया था, क्योंकि हम छात्र संगठन है, हम सब पढ़ते हैं और पढ़ने के बाद हमारी ये अपेक्षा रहती है कि हमें कहीं न कहीं रोजगार मिलेगा और जिस तरीके से, जबसे ये सरकार आई है, दो-दो करोड़ रोजगार देना बड़ी दूर की बात रही, अनप्लांड तरीके से इनका जीएसटी, बिना सोचे-समझे इनकी डिमोनेटाइजेशन जैसी जो स्कीम आई हैं, करोड़ों रोजगार छीनने का काम इस वर्तमान की सरकार ने किया है। ये कोई मेरे घर की रिपोर्ट नहीं है, ये इन्हीं की सरकारी रिपोर्ट है कि आजाद भारत में सबसे ज्यादा बेरोजगारी अगर है, तो वो आज है।

 

 

भाजपा की सरकार केन्द्र में आई है, तब से फैलोशिप और स्कॉलरशिप में भारी गिरावट इस सरकार के समय में आई है। निजीकरण को इन्होंने बढ़ावा दिया है और मैं कहूंगा कि 2014 से ही चाहे आईआईटी हों, एमटैक हो, जो हमारे सरकारी संसाधन थे, जो सरकारों ने इस इरादे से बनाए थे कि वहाँ किसान का बेटा पढ़ पाए, वहाँ गरीब का बेटा पढ़ पाए, ऐसे इंस्टीट्यूशन की फीस चार गुना बढ़ाई गई और एक आम इंसान के लिए शिक्षा लेना, वो असंभव सा इस सरकार ने कर दिया है।

 

इन्हीं सब मुद्दों को लेकर आने वाले समय में एनएसयूआई पूरे देश में मुहीम खड़ी करेगी और हमारा ये प्रयास रहेगा कि ये जो गूंगी-बहरी सरकार है, जो सत्ता के नशे में बिल्कुल चूर हो गई है, जो हमारे मुद्दों को मुद्दा समझकर एक चर्चा तक नहीं करती, इनकी नींद को तोड़ने का काम एनएसयूआई करेगी। इसी को देखते हुए आज की हमारी ये प्रेस कांफ्रेंस थी और ‘शिक्षा बचाओ, देश बचाओ’ ये हमारे कार्यक्रम का नाम भी जो आप सोच रहे हैं, बड़े सार्थक दृष्टिकोण के साथ रखा गया है, क्योंकि शिक्षा बचेगी, तो ही हमारे छात्र बचेंगे, युवा बचेंगे, तो ही हमारा देश बच पाएगा। तो हमारा ये प्रण है कि हम अहंकारी सरकार से लड़ेंगे और इस देश में शिक्षा बचाने का काम करेंगे।

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