जम्मू/दिल्ली: लंबे समय से अंधकार में डूबे जम्मू एंड कश्मीर को लेकर आज कुछ हलचल हुई, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के साथ सर्वदलीय पार्टीयों की हुई बैठक में कश्मीर पर आगे के लिए चर्चा हुई । इस बैठक के बाद कांग्रेस की तरफ से रखी गई पांच मांगो पर गुलाम नबी आजाद ने मीडिया को जानकरी देते हुये कहा पूर्व डिप्टी सीएम ताराचंद, गुलाम अहमद मीर और मैंने कांग्रेस की तरफ से अपनी बात रखी है।
आज जो मीटिंग हुई और हम तीनों ने कांग्रेस की तरफ से जो बात की है, बहुत सारी चीजें हमने बताई कि किस तरह से एक स्टेट डिजॉल्व हुई हैं, वो नहीं होनी चाहिए थीं, इलेक्टेड रिप्रेजेंटेटिव थे, उनसे पूछे बगैर किया गया, लेकिन अंत में वो तमाम चीजों को कहने के बाद हमने पांच बड़ी मांगे सरकार के सामने रखी हैं।
हम लोगों ने ये बताया कि सदन के अंदर गृहमंत्री जी ने भी और प्राइम मिनिस्टर ने भी ये आश्वासन दिया था हम स्टेटहुड बहाल करेंगे एक समय पर। अभी शांति भी है, सीज फायर भी है, बॉर्डर भी शांत है, तो इससे ज्यादा कोई अनुकूल समय नहीं हो सकता स्टेटहुड ग्रांट करने के लिए।
हम लोगों ने ये भी मांग की कि आप लोग कहते हैं कि लोकतंत्र को मजबूत करना है। अब आपने पंचायत के इलेक्शन किए, जिला परिषद के इलेक्शन किए तो ऐसा कैसे हो सकता है कि विधानसभा न हो, तो इसलिए विधानसभा का इलेक्शन भी तुरंत करना चाहिए, डेमोक्रेसी को बहाल करने के लिए।
तीसरी चीज हमने बताई कि बहुत बड़े जमाने से हमारे डोमिसाइल, हिस्टोरिकली डोमिसाइल के विशेषाधिकार को, जमीन का तो हमारे महाराजा के जमाने से था, 1925 के जमाने से और बाद में नौकरी का भी था, तो केन्द्र सरकार को ये गारंटी देनी चाहिए कि वो भी जब बिल लाएगी, तो उसके साथ हमारी जमीन की गारंटी और जो लोकल मुलाजिम है, आईएएस और आईपीएस, वो तो आते रहेंगे वो तो हर स्टेट में हैं, वहाँ भी आते रहेंगे, लेकिन जो एम्प्लॉयमेंट की अभी तक हमारे साथ जो एक सुविधा थी, वो सुविधा की गारंटी अब देनी चाहिए।
फिर हमने कहा कि कश्मीरी पंडित जो हैं, पिछले 30 साल से बाहर हैं। बहुत सारे, जम्मू में भी हैं, कश्मीर में भी हैं कुछ लेकिन अधिकतर बहुत बड़ी संख्या जो है, वो बाहर हैं। ये हमारी मौलिक ड्यूटी है, सरकार की तो बनती ही बनती है, लेकिन जम्मू और कश्मीर के हर एक राजनीतिक दल और नेता की ये मौलिक जिम्मेदारी है, कि वो कश्मीर के पंडितों को वापस लाएं और उनके रिहेबिलिटेशन में जो भी हमसे हो सकेगी, सरकार की सहायता करेंगे, मदद करेंगे कि वो कश्मीरी पंडित वापस कश्मीर आ जाएं।
पांचवा प्वाइंट था कि जिस वक्त 5 अगस्त को स्टेट के दो हिस्से किए गए और डाउनग्रेड किया गया, उससे पहले और उसके बाद भी हजारों की तादाद में पॉलीटिकल प्रिजनर्स थे, वर्कर्स थे, सोशल ऑर्गनाइजेशन के लोग थे, तो उनमें से हम मिलिटेन्ट्स की बात नहीं करते हैं, छोड़ने की, लेकिन इस तरह से जो राजनीति से जुड़े हुए लोग हैं, पॉलीटिकल लोग हैं, अपने एक डर के, भय से अगर इनको छोड़ेंगे तो कुछ होगा, उन सबको रिहा कर देना चाहिए, उनको छोड़ देना चाहिए। तो ये पांच बड़े मुद्दे हमारे थे।
