कांग्रेस और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने बुधवार को मणिपुर मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के खिलाफ लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग करते हुए नोटिस सौंपा। विपक्ष मांग कर रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर सदन में बयान देना चाहिए। दूसरी ओर, सरकार ने जोर देकर कहा है कि वह केवल चर्चा करेगी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर बोलेंगे। विपक्ष ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है।
लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने लोकसभा महासचिव के कार्यालय को एक नोटिस सौंपा। अविश्वास प्रस्ताव के लिए एक अलग नोटिस भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के फ्लोर लीडर नागेश्वर राव ने स्पीकर को सौंपा था। बीआरएस का नेतृत्व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव कर रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष को सदन में सरकार के बहुमत को चुनौती देने की अनुमति देता है, और यदि प्रस्ताव पारित हो जाता है, तो सरकार को इस्तीफा देना पड़ता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सरकार के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है।
कांग्रेस का कहना है कि सरकार के ऊपर से लोगों का भरोसा टूट रहा है। हम चाहते हैं कि पीएम मोदी मणिपुर पर बोले, लेकिन वे बात नहीं सुनते, ऐसे में हमने अविश्वास प्रस्ताव लाने का फैसला किया है। मोदी सरकार बहुमत में है. ऐसे में ये साफ है कि विपक्ष का अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा।
विपक्षी पार्टियों का यह मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर के मामले पर सदन में कोई जवाब नहीं दे रहे हंन लेकिन जब अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, तब प्रधानमंत्री को इस पर सदन के अंदर जवाब देना होगा। यही वजह है कि सभी विपक्षी पार्टियां यह जानते हुए कि उनके पास आंकड़ा नहीं है, बावजूद इसके यह प्रस्ताव लोकसभा में लाया गया है।
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा, “इंडिया गठबंधन को लोकसभा में अपनी संख्या के बारे में पता है लेकिन यह सिर्फ संख्या के बारे में नहीं है। यह न्याय के लिए मणिपुर की लड़ाई के बारे में है। मणिपुर के भाइयों और बहनों को एक संदेश जाना चाहिए कि पीएम मोदी शायद मणिपुर को भूल गए हैं लेकिन दुख की इस घड़ी में इंडिया गठबंधन उनके साथ खड़ा है और हम संसद के अंदर उनके अधिकारों के लिए लड़ रहे हैं। हम पीएम मोदी से कहना चाहते हैं कि वह संसद में आएं और राष्ट्र को संबोधित करें क्योंकि यह मामला अब केवल मणिपुर का नहीं है लेकिन यह अन्य राज्यों में भी फैल गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा और देश की अखंडता के हित में, प्रधानमंत्री को संसद के अंदर से देश को संबोधित करना चाहिए…”
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद में मणिपुर हिंसा के बारे में बोलते तो विपक्ष सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाता।
केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि केंद्र हर स्थिति के लिए तैयार है और दोहराया कि वह मणिपुर हिंसा मुद्दे पर चर्चा के लिए उत्सुक है। उन्होंने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “अविश्वास प्रस्ताव आने दीजिए, सरकार हर स्थिति के लिए तैयार है। हम मणिपुर पर चर्चा चाहते हैं…सत्र शुरू होने से पहले, वे चर्चा चाहते थे। जब हम सहमत हुए, तो उन्होंने नियमों का मुद्दा उठाया जब हम नियमों पर एक समझौते पर पहुंचे, तो उन्होंने नया मुद्दा लाया कि पीएम आएं और चर्चा शुरू करें। मुझे लगता है कि ये सभी बहाने हैं।”
असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) ने सरकार के खिलाफ लोकसभा में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करने का फैसला किया है।
उधर, पूर्वोत्तर के राज्यसभा सदस्यों ने आज संसद में सदन के सभापति से मुलाकात की और मणिपुर के मुद्दों पर नियम 176 के तहत अल्पकालिक चर्चा का अनुरोध किया। उन्होंने सभी दलों के सदस्यों से चर्चा में भाग लेने का आग्रह किया।
मणिपुर मुद्दे पर चर्चा की मांग पर सरकार के रुख के विरोध में विपक्षी सदस्यों ने बुधवार को राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया। जब संसद का ऊपरी सदन दोपहर के भोजन के बाद फिर से शुरू हुआ, तो उपसभापति हरिवंश ने विपक्षी सदस्यों की चर्चा की मांग के बीच केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा को संविधान (अनुसूचित जनजाति) आदेश (तीसरा संशोधन) विधेयक, 2022 को आगे बढ़ाने के लिए बुलाया। इसके बाद उन्होंने विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को मंच दिया, जिन्होंने उपसभापति से मजाक में अपना माइक बंद नहीं करने को कहा। इसके बाद हरिवंश ने खड़गे से कहा कि वह बोलने के बाद उनकी बात भी सुनें। खड़गे ने कहा कि विपक्ष मणिपुर मुद्दे पर चर्चा के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बयान भी चाहता है और कहा कि वे अभी भी इसका इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पांच दिन बाद भी पीएम मोदी सदन में नहीं आए हैं और यहां तक कि वह अपने कार्यालय से ही कार्यवाही देख रहे हैं। सरकार के रुख के विरोध में खड़गे ने कहा, ”हम वाकआउट कर रहे हैं।”
राज्यसभा में एक सत्र के दौरान विपक्ष के नेता (एलओपी) मल्लिकार्जुन खड़गे ने केंद्र पर सदन में बोलने के अधिक अवसर देने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि मंगलवार को जब वह सदन को संबोधित कर रहे थे तो उनका माइक्रोफोन बंद कर दिया गया था। खड़गे ने इसे अपना अपमान बताते हुए नाराजगी व्यक्त की और इस तरह की हरकतें जारी रहने पर भारत में लोकतंत्र की स्थिति पर सवाल उठाया। हालांकि, राज्यसभा अध्यक्ष और उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा कि खड़गे की टिप्पणियां दर्ज नहीं की जाएंगी।
खड़गे ने मणिपुर मुद्दे पर संसद में गतिरोध पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक पत्र लिखा है। अपने पत्र में खड़गे कहते हैं, ”हम प्रधानमंत्री से संसद में आकर बोलने का आग्रह कर रहे हैं लेकिन ऐसा लगता है कि इससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचेगी। हम इस देश के लोगों के लिए प्रतिबद्ध हैं और हम इसके लिए हर कीमत चुकाएंगे।’ हम जानते हैं कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के आचरण के रिकॉर्ड इतिहास के पन्नों में दर्ज हैं।”
कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज संसद पहुंचते ही आप सांसद संजय सिंह से मुलाकात की। संजय सिंह और कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल को संसद के शेष मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है।
सत्र शुरू होने से पहले बुधवार सुबह कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने संसद भवन में अपने चेंबर में I.N.D.I.A गठबंधन नेताओं के साथ बैठक की।
आज राजस्थान के बीजेपी सांसदों ने संसद भवन के बाहर विरोध प्रदर्शन किया और लाल डायरी दिखाई, जिसमें लिखा था, ‘अशोक गहलोत की लाल डायरी’।
तथाकथित ‘लाल डायरी’ तब सुर्खियों में आई जब राज्य में महिला सुरक्षा पर अपनी ही सरकार पर सवाल उठाने के लिए गहलोत द्वारा बर्खास्त किए गए मंत्री राजेंद्र गुहा ने राजस्थान विधानसभा के वेल में लाल रंग की नोटबुक लहराई। जिस पर उन्हें मार्शल से बाहर कर दिया गया। गुढ़ा ने दावा किया कि डायरी में गहलोत और अन्य से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं का विवरण है।
बता दें कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन से ही विपक्षी दल मांग कर रहे हैं कि पीएम मोदी मणिपुर में हुई हिंसा पर बोलें। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को उन विपक्षी नेताओं की आलोचना की थी जो मांग कर रहे थे कि पीएम मोदी मणिपुर में जारी हिंसा पर सदन में बोलें।
