कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर विपक्ष के नेता के पद का अपमान करने का आरोप लगाया है। यह आरोप तब लगाया गया जब लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान तीसरी पंक्ति में बैठाया गया।
ओडिशा कांग्रेस के प्रभारी अजय कुमार लल्लू ने बैठने की इस व्यवस्था की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्षी नेतृत्व को बार-बार कमजोर किया जा रहा है। लल्लू ने कहा, “सदन में भी, जब सदन के नेता और विपक्ष के नेता दोनों को किसी भी मुद्दे पर बोलने की स्वतंत्रता है, उन्हें बोलने नहीं दिया जाता और लगातार उनकी आलोचना की जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष के नेता को गणतंत्र दिवस पर आमंत्रित करना और फिर उन्हें उचित सम्मान न देना देश की जनता का अपमान है। उन्होंने कहा, “यदि विपक्ष के नेता को आमंत्रित किया गया था, तो उनके साथ गरिमापूर्ण व्यवहार किया जाना चाहिए था। गणतंत्र दिवस पर उनका अपमान करना उन करोड़ों लोगों का अपमान है जो विपक्ष के नेता का सम्मान करते हैं और उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं।”
कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्विटर पर लिखा, “क्या देश में विपक्ष के नेता के साथ ऐसा व्यवहार किसी शिष्टाचार, परंपरा और प्रोटोकॉल के मानकों को पूरा करता है? यह केवल एक ऐसी सरकार की हताशा को दर्शाता है जो हीन भावना से ग्रस्त है।”
कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने कहा, “विपक्षी नेताओं को तीसरी पंक्ति में बैठाना बहुत गलत तरीका है। ऐसी छोटी सोच के साथ राजनीति नहीं की जा सकती।”
वहीं भाजपा नेता शहजाद पूनावाला ने कहा, “कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी का ‘सेंस ऑफ एनटाइटलमेंट’ देखिए। उनके लिए लोकतंत्र और संविधान के ऊपर परिवारतंत्र है। उनको लगता है कि देश उनकी बपौती है। उनको लगता है कि उनका VVIP ट्रीटमेंट, देश से ज्यादा जरूरी है। गणतंत्र दिवस समारोह में जो सीटिंग होती है वो राष्ट्रपति का सचिवालय तय करता है। उस चित्र में आप देख सकते हैं कि राहुल गांधी से पीछे हमारे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल भी बैठे हैं लेकिन उन्होंने तो शिकायत नहीं की क्योंकि उनके लिए देश से बड़ा उनका VVIP ट्रीटमेंट नहीं है। परंतु राहुल गांधी को लगता है कि उन्हें पहली पंक्ति में ही बैठना चाहिए। ये तो जनता तय करेगी।”
भाजपा नेता आर.पी. सिंह ने कहा, “राहुल गांधी का विपक्ष के नेता के नाते से जो दर्जा है वो मंत्री के बराबर का है इसलिए उन्हें बाकी मंत्रियों के साथ बैठाया गया था। वे भूल रहे हैं कि जब उनकी सरकार थी तो अरुण जेटली और सुष्मा स्वराज को सातवीं व आठवीं पंक्ति में बैठाया गया था।”
इस बीच, रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि बैठने की व्यवस्था वरीयता क्रम के अनुसार ही की गई थी और प्रोटोकॉल का कोई उल्लंघन नहीं हुआ था।
सूत्रों ने यह भी बताया कि श्री खरगे के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, विशेष रूप से उन्हें एक निजी सहायक रखने की अनुमति दी गई थी और उनके अनुरोध पर बैठने की जगह के पास विशेष पार्किंग की व्यवस्था की गई थी।
