नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की सड़क हादसे में मौत, पिता ने बताया- ‘वह ‘हेल्प, हेल्प’ चिल्ला रहा था, लोग वीडियो बना रहे थे’

नोएडा के सेक्‍टर-150 में शुक्रवार की रात एक 27 साल के सॉफ्टवेयर इंजीनियर की दर्दनाक मौत हो गई। युवराज गुरुग्राम की एक कंपनी में जॉब करते थे। शुक्रवार की रात वह ऑफिस से घर नोएडा आ रहे थे। घने कोहरे के कारण एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की कार अनियंत्रित होकर निर्माणाधीन मॉल के बेसमेंट में गिर गई, जिससे उनकी जान चली गई।

जान गंवाने वाले 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता के पिता ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा लगभग दो घंटे तक जिंदा रहा और मदद के लिए गुहार लगाता रहा, जबकि मौके पर मौजूद ज्यादातर लोग “सिर्फ देखते रहे और वीडियो बनाते रहे”।

उन भयावह पलों को याद करते हुए राजकुमार मेहता ने बताया कि उनके बेटे ने गड्ढे के अंदर से बार-बार उन्हें पुकारा और मदद की गुहार लगाई।

उन्होंने बताया, “मेरा बेटा खुद को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा था। फोन पर बात करते समय वह बार-बार ‘पापा बचाओ, पापा बचाओ’ दोहरा रहा था। वह ‘मदद करो, मदद करो’ भी चिल्ला रहा था ताकि आम जनता उसकी मदद की गुहार सुन सके, लेकिन ज्यादातर लोग बस देख रहे थे। कुछ लोग वीडियो बना रहे थे।”

मेहता के अनुसार, यह हादसा आधी रात के आसपास हुआ। उन्होंने बताया, “घटना रात करीब 12 बजे हुई और लगभग 2:30 बजे मेरे बेटे के फोन से सिग्नल आना बंद हो गया।” उन्होंने आगे बताया कि उनके बेटे ने करीब दो घंटे तक जिंदगी और मौत से जूझते हुए संघर्ष किया। “मेरे बेटे ने अपनी जान बचाने के लिए दो घंटे तक संघर्ष किया। अगर उसे थोड़ी सी भी मदद मिल जाती, तो शायद वह बच जाता।”

मेहता ने बताया कि उनके बेटे ने उन्हें सूचना दी थी कि वह नाले में गिर गया है और उसने अपनी लोकेशन भी शेयर की थी। उन्होंने कहा, “मैं तुरंत मौके पर पहुंचा। वहां दृश्यता बहुत कम थी। मैंने अपने बेटे से उसकी सही लोकेशन पूछी और उसने अपने फोन की टॉर्च जला ली। कम दृश्यता में भी हल्की रोशनी दिखाई दे रही थी। वह काफी दूर बह गया था।”

उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण समय में बचाव के लिए कोई उचित प्रयास नहीं किया गया। मेहता ने कहा, “अगर किसी गोताखोर ने रस्सी का इस्तेमाल करके उन्हें बचाने की कोशिश की होती, तो शायद वे बच जाते।” उन्होंने दावा किया कि वहां मौजूद लोग पर्याप्त उपकरणों से लैस नहीं थे।

उन्होंने आगे कहा, “वहां मौजूद अधिकारी और कर्मचारी उन्हें बचाने में सक्षम नहीं थे। उनके पास कोई गोताखोर नहीं था। उनके पास कोई नाव नहीं थी। इस पूरे मामले में प्रशासन की लापरवाही है।”

पुलिस के अनुसार, गुरुग्राम के सेक्टर 150 स्थित टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के निवासी युवराज मेहता काम से घर लौट रहे थे, तभी घने कोहरे के कारण उनकी कार अनियंत्रित हो गई और निर्माणाधीन इमारत के तहखाने के लिए खोदे गए 20 फीट से अधिक गहरे गड्ढे में गिर गई। पुलिस को रात करीब 12:15 बजे सूचना मिली और तलाशी अभियान शुरू किया गया। अग्निशमन विभाग, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल और स्थानीय पुलिस की टीमों की मदद से शनिवार सुबह उनका शव बरामद किया गया।

पीड़ित परिवार की शिकायत के आधार पर दो रियल एस्टेट डेवलपर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में मेहता ने आरोप लगाया है कि निवासियों ने नोएडा प्रशासन से दुर्घटना संभावित स्थल पर बैरिकेडिंग और रिफ्लेक्टर लगाने के लिए बार-बार अनुरोध किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

एक डिलीवरी एजेंट समेत प्रत्यक्षदर्शियों ने आरोप लगाया है कि बचाव कार्य में देरी हुई और दावा किया है कि मेहता को अपनी कार की छत पर खड़े होकर मदद के लिए मोबाइल फोन की टॉर्च से संकेत देते हुए देखा गया था।

हालांकि, पुलिस ने कोहरे के कारण “शून्य दृश्यता” का हवाला देते हुए लापरवाही से इनकार किया है। अधिकारियों ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान क्रेन, सीढ़ी, अस्थायी नाव और सर्चलाइट का इस्तेमाल किया गया और आगे की जांच जारी है।

इस बीच, निवासियों ने मेहता के लिए न्याय की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च निकाला। विरोध प्रदर्शन के बाद, नोएडा प्रशासन ने घटनास्थल पर बैरिकेड लगा दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *