MGKVP- वाराणसी का सबसे बड़ा घोटाला महादेव महाविद्यालय का फर्ज़ीवाड़ा, कारवाई की जगह बचाने की जद्दोजहद

बुजुर्ग कहते थे, पढ़ोगे लिखोगे तो बनोगे नवाब, वरना होगी किस्मत खराब...

कहा जाता है, पढ़ाई-लिखाई और अच्छी परवरिश के लिए शिक्षा का होना जरूरी है बच्चें की पहली पाठशाला माँ की गोद और उनके बाद गुरुजनों का मार्गदर्शन होता है। गुरु और संस्थान व्यक्ति के सुनहरे भविष्य की नींव रखते है।

लेकिन विगत कई वर्षों से पढ़ाई लिखाई तो छोड़िए शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व पर ही सवाल है !! शिक्षा बड़ा कारोबार और फर्ज़ीवाड़े की सुलगती भट्टी बन चुका जहाँ लोगों की निजी लालसा और अपनी पेट की हवस के अलावा तिजोरी को भरने की होड़ लगी है। इसमें छोंका लगाया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकसित भारत की परिकल्पना दे कर। 2014 के बाद शिक्षा में रिफॉर्म करने के उद्देश्य से जस्टिस वर्मा कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया लेकिन ये भ्रष्टाचार का बड़ा मायाजाल आज की तारीख में बन गया है। क्योंकि निजी संस्थानों की पहली “मैया” तो किसी भी राज्य के विश्विद्यालय को माना जाता है। जो शिक्षण संस्थानों को पाल-पोस कर भ्रष्टाचार कैसे करें कैसे बचें की ABCD सिखाती है।

वाराणसी के फ़र्ज़ी दस्तावेजों के सहारे चल रहे बिना जमीन के (महाविद्यालय की जमीन की बात की जा रही है) जिस जमीन पर संचालित महाविद्यालय की मौजूदा इमारत दिखाई जाती है। दरअसल वो कब्ज़े की जमीन है। जमीन की कीमत आज की तारीख में कई सौ करोड़ रुपये है। महादेव महाविद्यालय सभी तरीके के असामाजिक तत्वों का अड्डा है। सूत्रों का कहना है कि यहाँ होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों (मंत्रियों और अधिकारियों) की रंगीन CD अजय सिंह ने बना कर रखी हुई है। जिसके सहारे लोगों को यहाँ तक कि मंत्री को भी ब्लैकमेल करके फ़र्ज़ी तरीके से कॉलेज चलाने में मदद ली जा रही है। इस लिस्ट में विश्विद्यालय के अधिकारी भी है। इसलिए अजय सिंह विश्विद्यालय के अधिकारियों की ट्रांसफर और पोस्टिंग के लिए पैसा खर्च करता है। जो इसके भ्रस्टाचार की फ़ाइल दबा कर बैठे रहे।

वर्तमान में जिस जमीन पर महादेव महाविद्यालय संचालित है, वो बरियासनपुर के जमींदार संतोष सिंह, कुंदन सिंह, संजीव सिंह, प्रवीण सिंह, पुष्कर नाथ सिंह, राजेश्वरी सिंह की पुश्तैनी जमीन है। फर्ज़ीवाड़े के कारण मुकदमा लड़ने वाले पैरवीकार की 10 फरवरी वर्ष 2022 में दुर्दांत हत्या करवा दी गई थीं पुलिस लाइन ग्राउंड के बाहर। परिवार ने अपने इकबालिया बयान में शहर के शिक्षा माफिया और विश्विद्यालय की तरफ इशारा किया था। जिनके साथ मिलकर इस फर्ज़ीवाड़े को छुपाने के लिए हत्या करवाई गई।तक्षकपोस्ट के पास सबूत के तौर पर ऑडियो क्लिप है।

इस हत्या की कहानी 2018 से ही बुनी जा रही थीं, क्योंकि महादेव के काले करतूतों पर सब रोटी सेंक रहे थे। तत्कालीन कुलपति और देशद्रोही त्रिलोकीनाथ सिंह IACCS घोटाले का पैसा भी महादेव महाविद्यालय में डंप कर रहा था। सारे घोटाले बाज एक साथ मिलकर भ्रष्टाचार कर रहे थें। तत्कालीन कुलसचिव साहेब लाल मौर्या ने अपने बयान में ये कहा था त्रिलोकीनाथ सिंह की अजय सिंह के बेडरूम तक पहुंच थी, और अजय सिंह की त्रिलोकीनाथ के बेडरूम तक पहुंच थी। त्रिलोकीनाथ की करतूतों को तक्षकपोस्ट पहले ही खुलासा कर चुका है। लिंक नीचे

Takshaka Post exposing NDA’s protection to IACCS – IAF Project scam of rs 7,900-cr by BEL management

असल मुद्दा ये है कि बिना जमीन वाले कॉलेज को संचालित करने से सम्बन्धित कोई भी शासनादेश तक्षकपोस्ट को ढूंढने पर भी नहीं मिला। राज्य भवन द्वारा इस बात की पुष्टि की गई है। कि किसी भी विवादित जमीन, या बिना जमीन के मात्र कब्ज़े के आधार पर कॉलेज नहीं संचालित हो सकता।

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शिक्षा के प्रमुख सचिव का बयान है किसी ऐसे (महादेव महाविद्यालय) मामलों की शिकायत पाये जाने पर रेकॉर्ड के मिलान और (रजिस्टर्ड लैंड डॉक्यूमेंट) के ना पाये जाने पर GO के हवाले से मान्यता स्वतः समाप्त हो जाएंगी। लेकिन यहाँ क्या हो रहा है.. जिलाधिकारी के नाम से मौजूदा कुलसचिव और अन्य विभाग खुद ही कूटरचित लेटर बना कर आख्या प्रस्तूत करके अपने आप को और महादेव को बचा रहे है। गज़ब की चोरी है !!!

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इतना ही नहीं संजीवनी बूटी कैसे दे रहे है ये भी मजेदार है देखना की परीक्षा विभाग और अन्य विभाग जानबूझ कर फ़र्ज़ी मान्यता जो 2000 में ली गई थी बिना जमीन और वैध कागजातों के, जिसके ऊपर वाराणसी न्यायालय में हत्या का मुकदमा लंबित है और फ़र्ज़ी दस्तावेजों को माननीय उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई है। बीएड की मान्यता फ़र्ज़ी दस्तावेजों पर ली गई है जिसे NCTE ने 2021 को फाइनल SCN इशू किया गया हैं। लेकिन विश्विद्यालय के भोले अधिकारी समझ नहीं पाते कि बोर्ड ऑफ़ रेवेन्यू DM का सुपीरियर होता है। खैर कुलपति बदला लेकिन चोरों की जमात वहीं पुरानी है।

निरमा वाशिंग पाउडर से धुलकर साफ़ हो गए है। दिन दूर नहीं जब सब जेल की सलाखों के पीछे होंगे।

पूरे मामलें पर स्पस्टीकरण के लिए कुलपति आनंद कुमार त्यागी जो संपर्क किया गया तो उनका कहना था मेरी सहमति से कोई भी दायित्व महादेव को नहीं दिया गया। कुलसचिव सुनीता पांडेय फ़ाइल की जिम्मेदार है। परीक्षा नियंत्रक और इंचार्ज को स्पष्टीकरण के लिए संपर्क साधा गया यकीन खबर लिखे जाने तक जबाव उपलब्ध नहीं हो पाया है।

दूसरी तरफ फर्ज़ीवाड़े की जड़ में बैठे महादेव की डिग्री फ़र्ज़ी होने के साथ आपराधिक गतिविधियों और संगठनात्मक संगलिप्तता खासतौर पर हत्या, और कोडीन सिरप में भी लिप्त होना पाया जाना।

*मोदी–योगी युग का काला कारोबार: खांसी के सिरप में डूबती पूर्वांचल की सांसें*

सितंबर में एक छात्रा के साथ यौन शोषण के बाद छत से फेंके जाने की घटना भी शामिल है छात्रा आज कल की मेहमान है ऐसे में आखिर क्यों विश्विद्यालय इस भ्रष्टाचार को बचाना चाहता है।बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ गाजीपुर के एक पीजी कॉलेज के प्रिंसिपल की भूमिका भी जांच के घेरे में है। विश्विद्यालय कब तक इसको बचाता है, या कार्रवाई करके इसकी फ़ाइल बंद करता है देखना दिलचस्प होगा।

 

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