असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने बुधवार को कहा कि राज्य सरकार असम विधानसभा के आगामी सत्र में कई “ऐतिहासिक” विधेयक पेश करेगी, जिनमें ‘लव जिहाद’, बहुविवाह और वैष्णव सत्रों के संरक्षण से संबंधित विधेयक शामिल हैं।
सरमा ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा, “इस साल विधानसभा में लव जिहाद, बहुविवाह और राज्य के वैष्णव सत्रों के संरक्षण से संबंधित ऐतिहासिक विधेयक पेश किए जाएँगे। इन प्रस्तावों पर सदन में चर्चा की जाएगी और विधेयक पारित होने के बाद, हम मीडिया को इसकी जानकारी देंगे।”
विधानसभा का अगला सत्र अगले महीने होने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित कानूनों का विवरण राज्य मंत्रिमंडल द्वारा मसौदों को मंज़ूरी मिलने के बाद साझा किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “जब मंत्रिमंडल इसे मंज़ूरी दे देगा, तब हम आपको विस्तृत जानकारी दे पाएँगे।”
यह कदम सरमा द्वारा ‘लव जिहाद’ और बहुविवाह जैसी प्रथाओं पर अंकुश लगाने के लिए कानूनी उपायों की बार-बार की गई मांग के बीच उठाया गया है, जिन्हें उन्होंने पहले शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को प्रभावित करने वाली सामाजिक चिंताएँ बताया था। ‘लव जिहाद’ शब्द का इस्तेमाल दक्षिणपंथी समूह मुस्लिम पुरुषों द्वारा हिंदू महिलाओं को शादी के ज़रिए धर्म परिवर्तन के लिए लुभाने की एक चाल का आरोप लगाने के लिए करते हैं।
अगस्त 2024 में, सरमा ने कहा था कि उनकी सरकार जल्द ही ‘लव जिहाद’ से जुड़े मामलों में आजीवन कारावास का प्रावधान करने वाला एक कानून लाएगी। उन्होंने दावा किया था कि धोखे से शादी करके जबरन धर्मांतरण को रोकने के लिए ऐसा कानून ज़रूरी है। इससे पहले, 2023 में, उन्होंने कहा था कि राज्य बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाने की योजना बना रहा है और इस संबंध में एक विधेयक विधानसभा में पेश किया जाएगा।
मालूम हो कि असम में सरकारी कर्मचारियों के बीच एक से ज़्यादा शादियों पर प्रशासनिक प्रतिबंध पहले ही लागू हो चुके हैं। पिछले साल, सरमा ने कहा था कि अगर कोई अधिकारी अपने पहले जीवनसाथी के जीवित रहते बिना आधिकारिक अनुमति के दूसरी शादी करता है, तो उसके ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आगामी विधेयक असम में पर्सनल लॉ और सामाजिक प्रथाओं में सुधार के लिए सरकार के व्यापक प्रयासों का हिस्सा होने की उम्मीद है।
