विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा नए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की नियुक्ति के लिए जल्दबाजी में लिया गया “आधी रात का फैसला” “अपमानजनक” और “अशिष्टतापूर्ण” था। मुख्य एवं अन्य चुनाव आयुक्तों को चुनने के लिए गठित तीन सदस्यीय पैनल में शामिल गांधी ने एक्स पर अपना असहमति नोट साझा करते हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को समिति से हटाने के लिए केंद्र की आलोचना की।
अपने असहमति नोट में कांग्रेस सांसद ने कहा कि जल्दबाजी में लिए गए इस निर्णय से करोड़ों मतदाताओं की “हमारी चुनावी प्रक्रिया की अखंडता” को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
गांधी ने कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री द्वारा नए मुख्य चुनाव आयुक्त के चयन का निर्णय आधी रात को लेना अपमानजनक और अशिष्टतापूर्ण है, जबकि समिति की संरचना और प्रक्रिया को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी जा रही है और इस पर 48 घंटे से भी कम समय में सुनवाई होनी है।”
उन्होंने कहा, “किसी भी देश में फ्री एंड फेयर इलेक्शन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है,,,,मुख्य एवं अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति। सुप्रीम कोर्ट के आदेश को धता बताते हुए मुख्य न्यायाधीश को चयन प्रक्रिया से अलग कर देना करोड़ों मतदाताओं की चिंता बढ़ा देने वाला है। जब इसके चयन की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है और अगले 48 घंटों के भीतर इसकी सुनवाई होनी है तो आधी रात को बैठक कर नियुक्ति कर देना कहाँ तक उचित है?”
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मालूम हो कि प्रतिपक्ष के नेता के रूप में राहुल गांधी भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति हेतु तीन सदस्यीय चयन समिति के सदस्य हैं।
राष्ट्रपति ने सोमवार देर रात पूर्व आईएएस अधिकारी ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और हरियाणा के मुख्य सचिव डॉ. विवेक जोशी को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली उच्च स्तरीय समिति की बैठक के कुछ घंटों बाद हुआ, जिसमें गांधी ने नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी, क्योंकि बुधवार को चयन प्रक्रिया पर एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।
राजीव कुमार के उत्तराधिकारी ज्ञानेश कुमार संशोधित कानून के तहत नियुक्त होने वाले पहले मुख्य चुनाव आयुक्त बन गए हैं। इस कानून के तहत चयन समिति में मुख्य न्यायाधीश की जगह गृह मंत्री को शामिल किया गया है।
इस कदम की कांग्रेस ने कड़ी आलोचना की है, जिसने सरकार पर सुप्रीम कोर्ट की जांच को “नजरअंदाज” करने और उसके फैसले से पहले नियुक्ति करने का आरोप लगाया है।
वेणुगोपाल ने कहा, “इस तरह का घृणित व्यवहार केवल उन संदेहों की पुष्टि करता है जो कई लोगों ने व्यक्त किए हैं कि कैसे सत्तारूढ़ शासन चुनावी प्रक्रिया को नष्ट कर रहा है… चाहे वह फर्जी मतदाता सूची हो, या ईवीएम हैकिंग की चिंताएं हों – सरकार और उनके द्वारा नियुक्त मुख्य चुनाव आयुक्त ऐसी घटनाओं के कारण गहरे संदेह के दायरे में हैं।”
