विपक्षी नेताओं ने गुरुवार को लोकसभा में बड़े सुरक्षा उल्लंघन के लिए भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की आलोचना की, और इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह से स्पष्टीकरण की भी मांग की। संसद का शीतकालीन सत्र आज शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने बैठक की और सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में जोरदार तरीके से उठाने का फैसला किया।
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शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा, “यह एक गंभीर सुरक्षा उल्लंघन है और देश के लिए शर्मनाक है। अगर हम लोकतंत्र के मंदिर को सुरक्षित नहीं रख सकते, तो हम पूरे देश की कानून-व्यवस्था को कैसे सुरक्षित रख सकते हैं। गृह मंत्री अमित शाह को स्पष्टीकरण देना चाहिए…हमने 22 साल पहले हुई घटना से क्या सीखा?”
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इसी तरह, शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने भी सरकार पर कटाक्ष किया और कहा, “संसद में सबसे अच्छी सुरक्षा है लेकिन फिर भी कुछ लड़के वहां घुस गए। उनके पास कोई हथियार नहीं था, यह सही है, लेकिन वे संसद में कूद गए। सरकार पिछले एक महीने से चुनाव प्रचार, सरकार बनाने, शपथ ग्रहण समारोह और देश की सुरक्षा में व्यस्त है। यह ‘राम भरोसे’ है।”
कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “देश के प्रधानमंत्री को ऐसी घटना पर दुख जताना चाहिए था और इस चूक पर क्या कदम उठाए जाएंगे, ये बताना चाहिए था। ताज्जुब है कि आज प्रधानमंत्री के साथ सरकार के मंत्रियों को कोई लेना-देना ही नहीं है। उनका ऐसा एटीट्यूड है कि- जो हो गया, सो हो गया। इंटेलिजेंस फेल्योर का मुद्दा हमने कल सर्वदलीय बैठक में भी उठाया था। हम डरे हुए नहीं है, लेकिन इस पर गहन चर्चा होनी चाहिए। प्रधानमंत्री को उन सांसदों की भी सराहना करनी चाहिए, जिन्होंने कल बहादुरी दिखाते हुए हमले को रोका।”
वहीं कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, “लोकतंत्र में अगर आवाज नहीं उठाई तो सदन में बैठने की क्या जरूरत? कल पूरी दुनिया ने देखा कि दो लोग BJP सांसद द्वारा बनवाए गये पास पर अंदर आए। अगर वो स्मोक बम की जगह कुछ होता तो! आज संसद की सुरक्षा का सवाल है और अगर हम मांग कर रहे हैं गृहमंत्री जी अपना वक्तव्य दें। ऐसे में डेरेक ओ ब्रायन समेत सभी लोगों की मांग जायज़ है। लेकिन आप हमें अपनी बात रखने भी नहीं दे रहे हैं। सरकार के ही प्रस्ताव पर उन्हें निकाला गया और मैं इस पूरे मामले में सरकार को दोषी मानता हूं।”
इस बीच, कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला और कई अन्य राज्यसभा सांसदों ने संसद सुरक्षा उल्लंघन की घटना पर सस्पेंशन ऑफ बिजनेस नोटिस दिया, जिसमें संसद में सुरक्षा उल्लंघन पर चर्चा करने और इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से जवाब देने की मांग की गई।
कांग्रेस सांसद मनिकम टैगोर ने भी इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए लोकसभा में स्थगन प्रस्ताव नोटिस दिया।
आम आदमी पार्टी (आप) सांसद राघव चड्ढा ने भी सरकार पर निशाना साधा और संसद में सुरक्षा चूक पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “ये घुसपैठिए अंदर कैसे आए? वे स्प्रे कैन की तस्करी कैसे कर पाए, जहां एक पेन की भी अनुमति नहीं है? सरकार उस सांसद के खिलाफ क्या कार्रवाई कर रही है, जिसने कथित तौर पर उनके विजिटर पास पर हस्ताक्षर किए थे? क्या उन्हें निष्कासित किया जाएगा?”
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सरकार पर निशाना साधा और कहा कि वह इस तथ्य से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है कि घुसपैठियों को एक भाजपा सांसद ने प्रवेश दिया था।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पोस्ट कर कहा, “INDIA की पार्टियां मांग कर रही हैं कि संसद में हुई बेहद गंभीर और ख़तरनाक सुरक्षा चूक पर दोनों सदनों में गृह मंत्री विस्तृत बयान दें और उसके बाद इसपर चर्चा हो। और घुसपैठ करने वालों को विजिटर पास दिलवाने वाले BJP सांसद प्रताप सिम्हा के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई हो।
उन्होंने आगे कहा कि मोदी सरकार द्वारा इन पूरी तरह से वैध और उचित मांगों को मानने से इंकार करने के कारण आज सुबह लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही स्थगित हो गई।
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इससे पहले के पोस्ट में रमेश ने कहा था, “बीजेपी IT सेल किसी भी तरह से दो तथ्यों से ध्यान भटकाना चाहती है: संसद की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई थी। और लोकसभा में खतरनाक ढंग से घुसपैठ करने वालों को मैसूर से बीजेपी सांसद प्रताप सिम्हा ने संसद में प्रवेश की इजाज़त दी थी।
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हालांकि, बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया कि घुसपैठिए कांग्रेस-कम्युनिस्ट धुरी से जुड़े थे। उन्होंने कहा, “जैसा कि विवरण सामने आ रहा है, यह स्पष्ट हो रहा है कि संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने वालों का डीएनए कांग्रेस-कम्युनिस्ट धुरी से जुड़ा हुआ है। वे लोग जो राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा का हिस्सा थे और अतीत में देखे गए सुनियोजित विरोध प्रदर्शनों में सक्रिय भागीदार थे।”
मालूम हो कि बुधवार, 13 दिसंबर को, सागर शर्मा और मनोरंजन डी ने सार्वजनिक गैलरी से लोकसभा कक्ष में छलांग लगाई, कनस्तरों से पीली गैस छोड़ी और सांसदों द्वारा पकड़े जाने से पहले नारे लगाए। दोनों को पुलिस हिरासत में ले लिया गया, और कुछ ही समय बाद, एक पुरुष और एक महिला, जिनकी पहचान अमोल शिंदे और नीलम के रूप में हुई, को संसद भवन के बाहर पीले रंग का धुआं छोड़ने वाले डिब्बे लेकर विरोध करने के लिए हिरासत में लिया गया।
सूत्रों ने बताया कि गिरफ्तार में लिए गए पांच लोगों के अलावा योजना बनाने में एक व्यक्ति और शामिल था। लोकसभा में प्रवेश करने वाले दो आरोपियों सहित पांच आरोपी गुरुग्राम में ललित झा के आवास पर रुके थे। जबकि पांच की पहचान कर ली गई है और उन्हें पकड़ लिया गया है, छठा अभी भी फरार है। संसद में भारी सुरक्षा चूक को लेकर लोकसभा सचिवालय ने गुरुवार को आठ सुरक्षाकर्मियों को निलंबित कर दिया।
