कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने तीन देशों के यूरोपीय दौरे की शुरुआत करते हुए ब्रुसेल्स में यूरोपीय संसद (एमईपी) के कुछ सदस्यों के साथ बंद कमरे में बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, बेल्जियम की राजधानी में उनकी बैठकों के दौरान उठाए गए विषयों में मणिपुर में मानवाधिकार की स्थिति भी शामिल रही। ये ‘भारत, मणिपुर में स्थिति’ नामक एक प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में आया है जिसे जुलाई में यूरोपीय संसद द्वारा अपनाया गया था।
ब्रुसेल्स में इस चर्चा को जो उस दिन के आधिकारिक संसदीय एजेंडे में सूचीबद्ध नहीं थी, को विपक्षी पार्टी के सूत्रों ने सफल बताया है।
भारत ने अतीत में कहा है कि न्यायपालिका सहित सभी स्तरों पर भारतीय अधिकारी मणिपुर की स्थिति से अवगत हैं और शांति और सद्भाव तथा कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कदम उठा रहे हैं।
जब यूरोपीय संसद ने मणिपुर में झड़पों के विशेष संदर्भ में भारत में मानवाधिकार की स्थिति पर एक प्रस्ताव अपनाया था तक विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था, “यूरोपीय संसद को सलाह दी जाएगी कि वह अपने आंतरिक मुद्दों पर अपने समय का अधिक उत्पादक ढंग से उपयोग करे।”
उन्होंने कहा था कि “भारत के आंतरिक मामलों में इस तरह का हस्तक्षेप अस्वीकार्य है, और औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है”।
इससे पहले गुरुवार को गांधी ने यूरोपीय संघ (ईयू) के भीतर मानवाधिकार के मुद्दों पर केंद्रित नागरिक समाज संगठनों द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लिया। दिन का समापन बेल्जियम स्थित भारतीय प्रवासियों के साथ रात्रि भोज पर बातचीत के साथ हुआ।
रविवार को नीदरलैंड के लिए रवाना होने से पहले शनिवार को उनके फ्रांसीसी सांसदों के साथ बैठक करने और साइंसेज पो यूनिवर्सिटी में छात्रों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है। वहां वह 400 साल पुरानी लीडेन यूनिवर्सिटी का दौरा करेंगे और छात्रों से बातचीत करेंगे।
11 सितंबर को कांग्रेस नेता नॉर्वे जाएंगे जहां वह राजधानी ओस्लो में सांसदों से मुलाकात करेंगे। वह अप्रवासी भारतीयों से भी मिलेंगे और ओस्लो विश्वविद्यालय में एक बैठक में भाग लेंगे।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि इंडियन ओवरसीज कांग्रेस गांधी के लिए कार्यक्रम आयोजित कर रही है। जी20 शिखर सम्मेलन के समापन के एक दिन बाद 12 सितंबर को उनका लौटने का कार्यक्रम है।
जी20 नेताओं का शिखर सम्मेलन 9 और 10 सितंबर को दिल्ली में हो रहा है।
